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924 संदिग्धों की मौत और 670 मुठभेड़ें, पाकिस्तान की क्राइम यूनिट यह क्या कर रही

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Source :- LIVE HINDUSTAN

जांच में सामने आया कि कई मामलों में मुठभेड़ों का ऑफिशियल डिटेल लगभग एक जैसा था। ज्यादातर घटनाओं में कहा गया कि आरोपी ने पहले गोली चलाई और पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाब दिया। लेकिन कई मामलों में गवाह मौजूद नहीं थे। 

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में पुलिस मुठभेड़ों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। यह मामला वहां के ह्यूमन राइट्स कमीशन ऑफ पाकिस्तान (HRCP) की एक रिपोर्ट के बाद सामने आया है। रिपोर्ट में दावा किया गया कि पंजाब के क्राइम कंट्रोल डिपार्टमेंट (CCD) की ओर से की गई कई मुठभेड़ें संदिग्ध परिस्थितियों में हुई हैं। मानवाधिकार आयोग ने इन घटनाओं की निष्पक्ष और न्यायिक जांच की मांग की है।

एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच सीसीडी ने करीब 670 मुठभेड़ों का दावा किया। इन एनकाउंटर्स में 924 संदिग्धों के मारे जाने की बात कही गई है, जबकि इसी दौरान केवल दो पुलिसकर्मियों की मौत हुई। आंकड़ों में यह भारी अंतर सवाल खड़े करता है। मानवाधिकार आयोग का कहना है कि अगर इतनी बड़ी संख्या में मुठभेड़ें हुईं, तो पुलिस पक्ष को भी अधिक नुकसान होना चाहिए था। आयोग ने इसे असंभव गणित करार देते हुए पारदर्शी जांच की जरूरत बताई है।

पुलिस का क्या है इस पर जवाब

एचआरसीपी की जांच में यह भी सामने आया कि कई मामलों में मुठभेड़ों का आधिकारिक विवरण लगभग एक जैसा था। ज्यादातर घटनाओं में कहा गया कि आरोपी ने पहले गोली चलाई और पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाब दिया। लेकिन कई मामलों में स्वतंत्र गवाह मौजूद नहीं थे और आरोपियों के खिलाफ दर्ज मामलों की जानकारी भी स्पष्ट नहीं थी। आयोग का कहना है कि इस तरह की एक जैसी कहानियां इन मुठभेड़ों की सच्चाई पर संदेह पैदा करती हैं।

पीड़ित परिवारों के गंभीर आरोप

पीड़ित परिवारों ने आरोप लगाया कि उनके परिजनों को पहले हिरासत में लिया गया और बाद में मुठभेड़ में मारे जाने की सूचना दी गई। कुछ परिवारों का कहना है कि उन्हें शव लेने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। मानवाधिकार आयोग ने इन आरोपों को गंभीर बताते हुए सरकार से मांग की है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए। साथ ही, अगर कहीं कानून का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN