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Ramadan 2026: क्या गर्भवती महिलाएं वाकई रख सकती हैं रोजा? जानें क्या है डॉक्टर की सलाह

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Source :- LIVE HINDUSTAN

Ramadan Fasting During Pregnancy : डॉक्टरी सलाह और इस्लामिक मार्गदर्शक दोनों ही इस बात पर जोर देते हैं कि मां और बच्चे की सलामती सबसे ऊपर है। हर महिला का शरीर और उसकी गर्भावस्था की स्थिति अलग होती है, इसलिए यह फैसला केवल आस्था का नहीं, बल्कि सही मेडिकल समझ और सावधानी का भी होना चाहिए।

रमजान का महीना इबादत और रूहानी सुकून का समय होता है, लेकिन बात अगर किसी गर्भवती महिला की होती है, तो इस समय आस्था के साथ उसके लिए अपनी और बच्चे की सेहत की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। हर साल की तरह इस बार भी रमजान में यह सवाल कई गर्भवती महिलाओं के मन को परेशान कर रहा होगा कि क्या प्रेग्नेंसी के दौरान रोजा रखना सुरक्षित होगा? अगर आप भी इस सवाल का जवाब जानना चाहते हैं तो डॉक्टरी सलाह और इस्लामिक मार्गदर्शक दोनों ही इस बात पर जोर देते हैं कि मां और बच्चे की सलामती सबसे ऊपर है। हर महिला का शरीर और उसकी गर्भावस्था की स्थिति अलग होती है, इसलिए यह फैसला केवल आस्था का नहीं, बल्कि सही मेडिकल समझ और सावधानी का भी होना चाहिए।

शारदाकेयर-हेल्थसिटी की प्रसूति एवं स्त्रीरोग विशेषज्ञ डॉ. रुचि श्रीवास्तव कहती हैं कि रमजान का पाक महीना मुस्लिम महिलाओं के लिए भले ही ईमान और अनुशासन का समय हो लेकिन गर्भावस्था एक ऐसा समय होता है जिसमें मां का शरीर और भी ज्यादा संवेदनशील हो जाता है। गर्भवती महिलाओं के लिए रोजा रखना सेहतमंद विकल्प नहीं माना जाता है। बावजूद इसके इसे रखने या न रखने की सलाह डॉक्टर जांच के बाद ही देती है।

प्रेग्नेंसी के दौरान रोजा रखने से क्या समस्याएं हो सकती हैं

प्रेग्नेंसी के दौरान महिला के शरीर में कई तरह के बदलाव बहुत तेजी से होते हैं-ब्लड शुगर के स्तर में उतार-चढ़ाव, पानी की कमी, थकान और पोषण की जरूरतें बढ़ जाती हैं। लंबे समय तक खाना-पानी न लेने से थकान, चक्कर, सिर दर्द, ब्लड शुगर के गिरने और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं, जो मां और बच्चे, दोनों के लिए जोखिम पैदा कर सकती हैं।

ऐसे में अगर आप सोच रही हैं कि क्या रमजान में रोजा रखें या नहीं, तो सबसे पहले अपने डॉक्टर से मिलकर अपना हेल्थ चेकअप करवाएं। इस बात का ध्यान रखें कि आपका रोजा केवल तभी सुरक्षित माना जा सकता है जब आपकी गर्भावस्था सामान्य हो, आपकी पोषण स्थिति अच्छी हो, और आपको रोजा रखने से कोई गंभीर समस्या न हो।

गर्भवती महिलाओं को सलाह

गर्भवती महिलाओं के शरीर को रोजा के दौरान पर्याप्त पानी और पौष्टिक भोजन की आवश्यकता होती है। सहरी और इफ्तार के बीच पर्याप्त पानी, प्रोटीन, जटिल कार्बोहाइड्रेट और विटामिन-मिनरल युक्त भोजन लेना जरूरी है, ताकि मां की सेहत अच्छी बनी रहने के साथ शिशु को जरूरी पोषण भी मिल सके।

डॉक्टर से संपर्क कब करें

कई ऐसे शारीरिक संकेत हैं जिनका ध्यान रखना चाहिए जैसे अगर आपको बहुत ज्यादा कमजोरी, चक्कर, तेज सिर दर्द, मिचली, पैरों में ऐंठन, या बेहतर मात्रा में पानी न पीने से शौच की मात्रा कम होना जैसी समस्याएं परेशान कर रही हों तो तुरंत रोजा खोलकर डॉक्टर से संपर्क करें। याद रखें, आपके लिए सबसे पहले अपने स्वास्थ्य और शिशु की भलाई ही सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN