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तारिक़ रहमान बने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री लेकिन ‘संवैधानिक सुधार परिषद’ की शपथ क्यों नहीं ली?

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Source :- BBC INDIA

राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने तारिक़ रहमान को प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई है

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5 घंटे पहले

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बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री के रूप में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) अध्यक्ष तारिक़ रहमान ने शपथ ली है.

13वें राष्ट्रीय संसदीय चुनाव में दो-तिहाई सीटें जीतने के बाद बीएनपी ने मंगलवार को सरकार बनाई है.

बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने तारिक़ रहमान को प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई.

शेख़ हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग सरकार के पतन के बाद अंतरिम सरकार के सत्ता में आने के 18 महीने बाद चुनाव हुए थे जिसके बाद इस सरकार का गठन किया गया है.

इससे पहले मंगलवार को दिन में ही नए सांसदों का शपथ ग्रहण समारोह हुआ.

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तारिक़ रहमान समेत बीएनपी सांसद

मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिरुद्दीन ने 13वें राष्ट्रीय संसद चुनाव में नव निर्वाचित संसद सदस्यों को शपथ दिलाई. हालिया चुनाव में बीएनपी ने पूर्ण बहुमत हासिल किया. उसके गठबंधन ने 212 सीटों पर जीत दर्ज की है.

हालांकि, शपथ ग्रहण समारोह के दौरान एक नया विवाद भी शुरू हो गया. सांसदों के शपथ ग्रहण के साथ-साथ संविधान में तब्दीली के लिए भी संवैधानिक सुधार परिषद के सदस्य के तौर पर शपथ दिलाई जा रही थी.

इस परिषद के सदस्य के तौर पर शपथ लेने से बीएनपी ने इनकार कर दिया.

संसद भवन में बीएनपी के चुने हुए सांसदों के शपथ ग्रहण समारोह से पहले, बीएनपी स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य सलाहुद्दीन अहमद ने पार्टी सांसदों को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि वे आज संवैधानिक सुधार परिषद के पद की शपथ नहीं ले रहे हैं.

जब अहमद यह घोषणा कर रहे थे तब पार्टी के चेयरमैन तारिक़ रहमान और जीते हुए सांसद मौजूद थे.

सलाहुद्दीन अहमद का बयान ग्राफ़िक्स में

बीएनपी नेता ने क्या घोषणा की है?

बीएनपी स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य सलाहुद्दीन अहमद जब यह घोषणा कर रहे थे तब उनके हाथ में सफ़ेद और नीले फॉर्म थे.

उन्होंने कहा, “हममें से कोई भी संवैधानिक सुधार परिषद का चुना हुआ सदस्य नहीं है और यह अभी तक संविधान में शामिल नहीं है. अगर जनमत संग्रह के फ़ैसले के अनुसार संवैधानिक सुधार परिषद बनती है, तो इसे पहले संविधान में शामिल करना होगा और यह प्रावधान करना होगा कि संवैधानिक सुधार परिषद के सदस्य किस पद की शपथ लेंगे.”

फॉर्म दिखाते हुए सलाहुद्दीन अहमद ने कहा, “ऐसे फ़ॉर्म संविधान के तीसरे शेड्यूल में होंगे. संसद में इन्हें क़ानूनी तौर पर अपनाए जाने के बाद, संवैधानिक सुधार परिषद के सदस्यों के शपथ लेने का प्रावधान किया जा सकता है. हमने अब तक संविधान का पालन किया है. मुझे उम्मीद है कि हम आने वाले दिनों में भी ऐसा करते रहेंगे.”

फिर उन्होंने पार्टी सदस्यों से कहा, “मैंने माननीय चेयरमैन (तारिक़ रहमान) के कहने पर उनकी मौजूदगी में अपनी पार्टी के फ़ैसले के बारे में बताया.”

इसके बाद बीएनपी सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिरुद्दीन के सामने शपथ ली.

13वीं राष्ट्रीय संसद के चुनाव में 299 सीटों में से बीएनपी ने अकेले 209 और उसके गठबंधन ने कुल 212 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत हासिल किया है.

एनसीपी के नव निर्वाचित छह सांसद

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जमात-ए-इस्लामी के सांसदों ने दोनों शपथ लीं

बीएनपी के इस फ़ैसले की सोशल मीडिया पर भी चर्चाएं हैं. पत्रकार इंद्रजीत कुंडू ने एक्स पर लिखा, “बीएनपी ने यूनुस-नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के उस प्रस्ताव को मानने से इनकार कर दिया है, जिसमें सांसदों से यह अपेक्षा की गई थी कि वे नए ‘संविधान सुधार परिषद’ के सदस्य के रूप में भी एक साथ शपथ लें.”

“इस परिषद का उद्देश्य संसद चुनावों के साथ कराए गए जनमत-संग्रह के अनुसार बांग्लादेश के संविधान में बदलाव करना है.”

“बीएनपी सांसदों ने केवल बांग्लादेश संसद के सदस्य के रूप में शपथ ली. बीएनपी का कहना है कि संविधान सुधार परिषद से संबंधित प्रावधान अभी मौजूदा संविधान का हिस्सा नहीं हैं और इन पर संसद में विस्तृत विचार-विमर्श होना आवश्यक है.”

वहीं जमात-ए-इस्लामी और नेशनल सिटिज़ंस पार्टी (एनसीपी) के छह निर्वाचित सांसदों ने संसद सदस्य और संवैधानिक सुधार परिषद के सदस्य के रूप में शपथ ली है.

दूसरी ओर बीएनपी के सांसदों ने सर्वसम्मति से तारिक़ रहमान को संसद में अपना नेता और प्रधानमंत्री चुना है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

SOURCE : BBC NEWS