Source :- LIVE HINDUSTAN
बीते अप्रैल में चीनी यात्रा के दौरान यूनुस ने जग रहा कि भारत के पूर्वी हिस्से के पास समुद्र तक पहुंचने का कोई रास्ता नहीं है। उन्होंने कहा था कि इस क्षेत्र में बांग्लादेश ही समुद्र का संरक्षक है।
बांग्लादेश में अंतरिम सरकार का शासन खत्म हो गया है। मंगलवार को बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के तारिक रहमान प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे। इससे पहले अंतरिम सरकार के मुखिया रहे मुहम्मद यूनुस ने इस्तीफा दे दिया है। अपने शासन काल में यूनुस ना तो बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ कोई ठोस कदम उठा पाए, और ना ही अपने देश के नेताओं द्वारा भारत विरोधी बयानबाजी पर लगाम लगा पाए। उनका पाकिस्तान प्रेम भी साफ साफ नजर आया। अब इस्तीफे से पहले भी उन्होंने भारत को लेकर एक भड़काऊ दिया है।
दरअसल मुहम्मद यूनुस ने अपने भाषण में भारत के पूर्वोत्तर राज्य के लिए किए इस्तेमाल किए जाने वाले नाम ‘सेवन सिस्टर्स’ का जिक्र किया है। हालांकि इस दौरान उन्होंने जानबूझकर भारत का नाम नहीं लिया। चुनी हुई सरकार को सत्ता सौंपने से पहले देश के नाम अपने आखिरी भाषण में, मुहम्मद यूनुस ने ‘सेवन सिस्टर्स’ का जिक्र नेपाल और भूटान के साथ किया।
यूनुस का भड़काऊ बयान
यूनुस ने इस दौरान एक सब-रीजनल इकोनॉमिक फ्रेमवर्क का प्रस्ताव रखा जो बांग्लादेश के समुद्री रास्ते को नेपाल, भूटान और ‘सेवन सिस्टर्स’ से जोड़ने की कोशिश करता है। यूनुस ने अपने भाषण में कहा, “हमारा ओपन सी सिर्फ एक भौगौलिक सीमा नहीं है, बल्कि यह बांग्लादेश के लिए वैश्विक व्यापार से जुड़ने का एक खुला दरवाजा है। नेपाल, भूटान और सेवन सिस्टर्स के साथ इस इलाके में बहुत ज्यादा आर्थिक क्षमता है।”
पहली बार नहीं उगला है जहर
यह पहली बार नहीं है जब यूनुस ने इस तरह की बातें कही हैं। इससे पहले भी उन्होंने भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। बीते अप्रैल में चीनी यात्रा के दौरान यूनुस ने जग रहा कि भारत के पूर्वी हिस्से के पास समुद्र तक पहुंचने का कोई रास्ता नहीं है। उन्होंने कहा था कि इस क्षेत्र में बांग्लादेश ही समुद्र का संरक्षक है।
क्या कह रहे हैं जानकार?
अब यूनुस के हालिया बयान से साफ नजर आया कि उन्होंने भारत का सीधा जिक्र ना करते हुए भारतीय राज्यों को सेवन सिस्टर्स कहने का फैसला लिया, जो उनके पुराने भाषणों में भी दिखा है। न्यूज 18 ने अपनी एक रिपोर्ट में शीर्ष इंटेलिजेंस सूत्रों के हवाले से बताया कि यह चूक नहीं, बल्कि जान-बूझकर दी गई स्ट्रेटेजिक मैसेजिंग है, जिसका मकसद भारत के नॉर्थ-ईस्ट की छवि को बदलना है। जानकारों का कहना है कि नॉर्थ-ईस्ट राज्यों को एक अलग क्षेत्र के तौर पर दिखाना, चीन, पश्चिमी देशों और इंटरनेशनल एजेंसियों के लिए एक सिग्नल के तौर पर समझा जा रहा है कि यह इलाका ‘इकॉनमिकली नेगोशिएबल इलाका’ है।
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