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शिव तांडव स्तोत्रम आपको भी करता है भोले से कनेक्ट? यहां सीखें याद करने का आसान तरीका

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Source :- LIVE HINDUSTAN

शिव तांडव स्तोत्रम सुनने से एक सुखद सी मानसिक शांति मिलती है। माना जाता है कि अगर इसे बजाकर साथ में गाया जाए तो वाइब्रेशंस आपके लंग्स को भी हेल्दी रखते हैं। सीखें लिरिक्स याद करने का आसान तरीका।

शिवजी की आराधना के लिए संसार में कई मंत्र और स्तोत्र हैं, लेकिन शिव तांडव स्तोत्र की महिमा अलग ही है। यह केवल एक धार्मिक पाठ नहीं, बल्कि शब्द-शक्ति, लय और अटूट भक्ति का ऐसा संगम है, जो सुनने वाले के भीतर एक नई ऊर्जा का संचार कर देता है। शिव तांडव स्तोत्र सुनने में जितना अच्छा लगता है, साथ में गाना और भी पावरफुल है। अगर आपको शिव तांडव स्तोत्र नहीं आता है और याद करना चाहते हैं तो यहां सरल तरीका है। इसकी लिरिक्स को टुकड़ों में लिखा गया है जिसे आपको पढ़ने में आसानी होगी।

भाग 1: जटा और गंगा का वर्णन (श्लोक 1-3)

श्लोक 1

जटा-टवी-गलज्जल-प्रवाह-पावित-स्थले

गले-अवलम्ब्य-लम्बितां-भुजङ्ग-तुङ्ग-मालिकाम

डमड्डमड्डमड्डमन्-निनाद-वड्डमर्वयं

चकार-चण्डताण्डवं-तनोतु-नः-शिवः-शिवम

श्लोक 2

जटा-कटाह-सम्भ्रम-भ्रमन्-निलिम्प-निर्झरी-

विलोल-वीचि-वल्लरी-विराजमान-मूर्धनि

धगद्-धगद्-धगज्जल-ल्ललाट-पट्ट-पावके

किशोर-चन्द्र-शेखरे-रतिः-प्रतिक्षणं-मम

श्लोक 3

धरा-धरेन्द्र-नन्दिनी-विला-सबन्धु-बन्धुर-

स्फुरद्-दिगन्त-सन्तति-प्रमोद-मान-मानसे

कृपा-कटाक्ष-धोरणी-निरुद्ध-दुर्धरापदि

क्वचिद्-दिगम्बरे-मनो-विनोदमेतु-वस्तुनि

भाग 2: नाग और अग्नि का वर्णन (श्लोक 4-6)

श्लोक 4

जटा-भुजङ्ग-पिङ्गल-स्फुरत्-फणा-मणि-प्रभा-

कदम्ब-कुङ्कुम-द्रव-प्रलिप्त-दिग्वधू-मुखे

मदान्ध-सिन्धुर-स्फुरत्-त्वगुत्तरीय-मेदुरे

मनो-विनोद-मद्भुतं-बिभर्तु-भूत-भर्तरि

श्लोक 5

सहस्र-लोचन-प्रभृत्य-शेष-लेख-शेखर-

प्रसून-धूलि-धोरणी-विधूसराङ्घ्रि-पीठभूः

भुजङ्ग-राज-मालया-निबद्ध-जाट-जूटकः

श्रियै-चिराय-जायतां-चकोर-बन्धु-शेखरः

श्लोक 6

ललाट-चत्वर-ज्वलद्-धनञ्जय-स्फुलिङ्गभा-

निपीत-पञ्च-सायकं-नमन्-निलिम्प-नायकम

सुधा-मयूख-लेखया-विराजमान-शेखरं

महा-कपाल-सम्पदे-शिरो-जटाल-मस्तु-नः

भाग 3: संहारक और रक्षक रूप (श्लोक 7-9)

श्लोक 7

कराल-भाल-पट्टिका-धगद्-धगद्-धगज्ज्वल-

द्धनञ्जया-हुतीकृत-प्रचण्ड-पञ्च-सायके

धरा-धरेन्द्र-नन्दिनी-कुचाग्र-चित्र-पत्रक-

प्रकल्पनैक-शिल्पिनि-त्रिलोचने-मतिर्मम

श्लोक 8

नवीन-मेघ-मण्डली-निरुद्ध-दुर्धर-स्फुरत्-

कुहू-निशीथि-नीतमः-प्रबन्ध-बद्ध-कन्धरः

निलिम्प-निर्झरी-धर-स्तनोतु-कृत्ति-सिन्धुरः

कला-निधान-बन्धुरः-श्रियं-जगद्-धुरन्धरः

श्लोक 9

प्रफुल्ल-नील-पङ्कज-प्रपञ्च-कालिम-प्रभा-

वलम्बि-कण्ठ-कन्दली-रुचि-प्रबद्ध-कन्धरम

स्मरच्छिदं-पुरच्छिदं-भवच्छिदं-मखच्छिदं

गजच्छिदान्धक-च्छिदं-तमन्तक-च्छिदं-भजे

भाग 4: समर्पण और भक्ति (श्लोक 10-12)

श्लोक 10

अखर्व-सर्व-मङ्गला-कला-कदम्ब-मञ्जरी-

रस-प्रवाह-माधुरी-विजृम्भणा-मधुव्रतम

स्मरान्तकं-पुरान्तकं-भवान्तकं-मखान्तकं

गजान्त-कान्धक-कान्तकं-तमन्त-कान्तकं-भजे

श्लोक 11

जयत्व-दभ्र-विभ्रम-भ्रमद्-भुजङ्ग-मश्वस-

द्विनिर्गमत्-क्रम-स्फुरत्-कराल-भाल-हव्यवाट्

धिमिद्धिमिद्धिमिध्वनन्-मृदङ्ग-तुङ्ग-मङ्गल-

ध्वनि-क्रम-प्रवर्तित-प्रचण्ड-ताण्डवः-शिवः

श्लोक 12

दृषद्वि-चित्र-तल्पयो-र्भुजङ्ग-मौक्ति-कस्रजो-

र्गरिष्ठ-रत्न-लोष्ठयोः-सुहृद्वि-पक्ष-पक्षयोः

तृणार-विन्द-चक्षुषोः-प्रजा-मही-महेन्द्रयोः

सम-प्रवृत्तिकः-कदा-सदाशिवं-भजाम्यहम

भाग 5: अंतिम श्लोक और फल (श्लोक 13-15)

श्लोक 13

कदा-निलिम्प-निर्झरी-निकुञ्ज-कोटरे-वसन

विमुक्त-दुर्मतिः-सदा-शिरः-स्थ-मञ्जलिं-वहन

विमुक्त-लोल-लोचनो-ललाम-भाल-लग्नकः

शिवेति-मन्त्र-मुच्चरन-कदा-सुखी-भवाम्यहम

श्लोक 14

इमं-हि-नित्य-मेव-मुक्त-मुत्तमोत्तमं-स्तवं

पठन्-स्मरन्-ब्रुवन्-नरो-विशुद्धि-मेति-सन्ततम

हरे-गुरौ-सुभक्ति-माशु-याति-नान्यथा-गतिं

विमोहनं-हि-देहिनां-सुशङ्करस्य-चिन्तनम

श्लोक 15 (आरती)

पूजा-वसान-समये-दशवक्त्र-गीतं

यः-शम्भु-पूजन-परं-पठति-प्रदोषे

तस्य-स्थिरां-रथ-गजेन्द्र-तुरङ्ग-युक्तां

लक्ष्मीं-सदैव-सुमुखीं-प्रददाति-शम्भुः

याद करने की खास ट्रिक

सुनना शुरू करें: याद करने से पहले इसे किसी अच्छे गायक (जैसे उमा मोहन या शंकर महादेवन) की आवाज में 10-12 बार सुनें। कान जब शब्दों को पहचान लेंगे, तो जीभ अपने आप उन्हें बोलने लगेगी।

संधि विच्छेद: लंबे शब्दों को तोड़ लें। जैसे: ‘जटाटवी-गलज्जल-प्रवाह-पावित-स्थले’। इसे एक साथ पढ़ने के बजाय चार हिस्सों में पढ़ें।

लिखकर याद करें: हर रोज केवल 2 श्लोक लिखें। लिखने से शब्द दिमाग में छप जाते हैं।

अर्थ पर ध्यान दें: जब आप जानते हैं कि ‘निलिम्पनिर्झरी’ का मतलब गंगा है, तो शब्द याद रखना आसान हो जाता है। शुरुआत के श्लोकों में शिवजी की जटाओं, उनमें बहती गंगा और गले में लिपटे सांपों का वर्णन है। इसे याद करते समय शिवजी के ‘नटराज’ स्वरूप की कल्पना करें। मुख्य शब्द: जटाटवी, गलज्जल, लम्बितां, डमडमडमन।

मानसिक शांति का साइंस

संस्कृत के इन कठिन शब्दों का सही उच्चारण फेफड़ों और मस्तिष्क को सक्रिय करता है, जिससे मानसिक तनाव कम होता है।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दिए गए लिरिक्स केवल पाठकों को याद करने में सहूलियत देने के लिए हैं। संस्कृत शब्दों के जटिल विन्यास के कारण पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे शुद्ध उच्चारण सुनिश्चित करने के लिए किसी प्रामाणिक धार्मिक पुस्तक या विद्वान की सहायता अवश्य लें। किसी भी स्तोत्र या मंत्र का पाठ करने से पहले उसका शुद्ध उच्चारण और सही विधि जानना आवश्यक है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN