Home राष्ट्रीय समाचार बांग्लादेश: प्रचंड जीत के बाद बीएनपी ने शेख़ हसीना को लेकर भारत...

बांग्लादेश: प्रचंड जीत के बाद बीएनपी ने शेख़ हसीना को लेकर भारत से ये कहा

17
0

Source :- BBC INDIA

बीएनपी के वरिष्ठ नेता सलाहुद्दीन अहमद

इमेज स्रोत, MUNIR UZ ZAMAN/AFP via Getty Images

एक घंटा पहले

पढ़ने का समय: 4 मिनट

बांग्लादेश चुनावों में भारी बहुमत से जीत हासिल करने वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने भारत से फिर शेख़ हसीना को प्रत्यर्पित करने की अपनी मांग दोहराई.

शेख़ हसीना को अगस्त 2024 में बांग्लादेश में हुए युवाओं के आंदोलन के बाद अपदस्थ कर दिया गया था.

वो वहां से भागकर भारत आ गई थीं और तभी से वो यहां शरण लिए हुए हैं.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ बीएनपी के वरिष्ठ नेता सलाहुद्दीन अहमद ने कहा, “विदेश मंत्री पहले ही उनके प्रत्यर्पण के मामले को आगे बढ़ा चुके हैं और हम भी इसका समर्थन करते हैं.”

उन्होंने कहा, “हम हमेशा क़ानून के अनुसार उनके प्रत्यर्पण की मांग करते हैं. यह दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों के बीच का मामला है. हमने भारत सरकार से भी अनुरोध किया है कि कृपया उन्हें बांग्लादेश वापस भेजें ताकि वे मुक़दमे का सामना कर सकें.”

अहमद ने कहा, “हमें भारत समेत सभी देशों के साथ पारस्परिक सम्मान और समानता पर आधारित मित्रतापूर्ण संबंध चाहिए.”

उनकी यह टिप्पणी गुरुवार को हुए आम चुनावों में बीएनपी की भारी जीत के तुरंत बाद आई.

अगस्त 2024 में हुए आंदोलन के बाद यह पहला चुनाव था.

पिछले साल नवंबर में बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख़ हसीना और पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां ख़ान कमाल को उनकी ग़ैर मौजूदगी में मौत की सज़ा सुनाई थी.

दोनों पर 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान भीड़ के हिंसक दमन का आरोप लगाया गया था.

उन्हें मानवता के ख़िलाफ़ अपराध का दोषी क़रार दिया गया था.

शेख़ हसीना ने इस फ़ैसले को ग़ैर क़ानूनी क़रार दिया था और कहा था कि उनके पक्ष को सुने बिना ये फ़ैसला सुनाया गया है.

इस चुनाव में शेख़ हसीना की पार्टी अवामी लीग को हिस्सा लेने से बैन कर दिया गया था.

शेख़ हसीना, अगस्त 2024 में बांग्लादेश से भागकर भारत आ गई थीं

इमेज स्रोत, AFP via Getty Images

शेख़ हसीना ने इसके बाद चुनाव को ‘अलोकतांत्रिक’ बताया था.

सलाहुद्दीन अहमद ने चुनाव को लेकर उठी आलोचनाओं को खारिज कर दिया.

अहमद ने कहा, “देश के लोग जानते हैं कि यह एक बेहद समावेशी चुनाव है. यदि आप अवामी लीग के बहिष्कार का उल्लेख करना चाहते हैं, तो लोगों ने अगस्त 2024 के जनविद्रोह के माध्यम से उन्हें पहले ही ख़ारिज कर दिया है.”

अवामी लीग को बाहर किए जाने का फैसला अंतरिम सरकार ने लिया था, जिसका नेतृत्व मोहम्मद यूनुस कर रहे थे.

2025 में आंदोलन के दौरान पार्टी के आचरण की जांच के बीच उसकी गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था.

अहमद ने कहा, “उन पर मुक़दमा चलाया जा रहा है और राजनीतिक दल अवामी लीग के ख़िलाफ़ भी जांच जारी है. यह प्रक्रिया के तहत है.”

भारत और अवामी लीग का रिश्ता

शेख़ हसीना और पीएम नरेंद्र मोदी

इमेज स्रोत, Narendra Modi/X

भारत और बांग्लादेश की अवामी लीग के बीच संबंध सिर्फ़ ऐतिहासिक ही नहीं, बल्कि गहरे भरोसे पर टिके रहे हैं.

1971 के बांग्लादेश मुक्त‍ि संग्राम के दौरान बना यह रिश्ता पिछले पचास साल से भी ज़्यादा समय से कम-ज़्यादा उतार-चढ़ाव के साथ कायम है.

सिर्फ़ डेढ़ साल पहले, जब अवामी लीग अपने इतिहास के सबसे कठिन दौर में से एक से गुज़र रही थी, तब भारत ने पार्टी की नेता शेख़ हसीना को शरण दी थी.

उन्हें भारतीय धरती पर सुरक्षित पनाह दी गई और वह आज भी कड़ी सुरक्षा के बीच भारत की सम्मानित मेहमान के रूप में रह रही हैं.

इसके अलावा, 5 अगस्त 2024 से अब तक अवामी लीग के हज़ारों नेता और कार्यकर्ता- पूर्व सांसद, मंत्री, समर्थक और राजनीतिक आयोजक- भी भारत में शरण ले चुके हैं.

इस दौरान भारत ने बार-बार और आधिकारिक तौर पर कहा कि वह बांग्लादेश में ‘समावेशी’ और ‘सहभागी’ चुनाव चाहता है- जिसका साफ़ मतलब था कि भारत चाहता था कि अवामी लीग को भी चुनाव लड़ने का मौका मिले.

लेकिन ऐसा नहीं हुआ. अवामी लीग की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगने के बाद बांग्लादेश चुनाव आयोग ने पार्टी को चुनाव लड़ने का अवसर नहीं दिया. नतीजतन, 12 फरवरी को अवामी लीग के बिना ही चुनाव हुए.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

SOURCE : BBC NEWS