Home  लाइफस्टाइल समाचार महाशिवरात्रि पर सुहागिन महिलाएं हरे रंग की चूड़ी पहनना क्यों पहनती हैं?

महाशिवरात्रि पर सुहागिन महिलाएं हरे रंग की चूड़ी पहनना क्यों पहनती हैं?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

Mahashivratri 2026: 15 फरवरी को भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती के शुभ विवाह का दिन मनाया जाएगा। इस दिन सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य की कामना के लिए हरे रंग की चूड़ी को पहनती है। शिवरात्रि के दिन हरे रंग की चूड़ी पहनने के लिए ये मान्यता प्रचलित हैं।

15 फरवरी को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा। हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का खास महत्व है। इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह सम्पन्न हुआ था। इसीलिए महाशिवरात्रि पर सुहागिन महिलाओं के साथ ही कुंवारी कन्या और पुरुष के पूजा करने का खास महत्व होता है। सुहागिन महिलाएं महाशिवरात्रि पर 16 शृंगार करके तैयार होती है। जिसमे हरे रंग की चूड़ियां भी शामिल हैं। महाशिवरात्रि में महिलाएं अक्सर हरे रंग की चूड़ियां ही पहनना पसंद करती हैं। जो कि पूरी तरह से भोलेनाथ से जुड़ा है।

सुहागिन महिलाएं क्यों पहनती है हरी चूड़ियां

महाशिवरात्रि पर सुहागिन महिलाओं को हरी चूड़ियां पहनना शुभ माना जाता है। इसका सीधा कनेक्शन भगवान भोलेनाथ से जुड़ा है। मान्यता है कि भगवान भोलेनाथ ने माता पार्वती को शादी के मौके पर सोने-चांदी या कीमती पत्थरों की बजाय हरे रंग के लाख की चूड़ियां पहनाई थीं। माता पार्वती और भगवान शिव के सुखी वैवाहिक जीवन के सिंबल के तौर पर महिलाएं भी इस दिन सौभाग्य पाने के लिए हरी चूड़ियों को पहनती हैं।

वहीं दूसरी मान्यतानुसार भगवान शिव को हरियाली प्रिय है। उन्हें हरा-भरा वातावरण पसंद आता है। उन्हें चढ़ने वाली चीजों में भी भांग के हरे पत्ते, धतूरा,बेलपत्र जैसी हरी चीजें पसंद आती है। भगवान का प्रिय महीना सावन होता है। जिसमे भी महिलाओं के सौभाग्य के लिए हरे रंग के कपड़े और शृंगार में हरा रंग शामिल करना अच्छा माना जाता है। जिसकी वजह से भगवान भोलेनाथ की ब्लेसिंग्स पाने और शिव-शंभू को प्रसन्न करने के लिए महिलाएं हरे रंग की चूड़ियां पहनती हैं। इसका सीधा कनेक्शन सौभाग्य से जुड़ा रहता है।

पति दे सकते हैं हरे रंग की चूड़ी

सुहागिन महिलाएं सौभाग्य की कामना के लिए महाशिवरात्रि पर हरे रंग की चूड़ियां पहनती हैं। वहीं अगर ये चूड़ियां महिलाओं को उनके पति गिफ्ट में देते हैं तो इसे भगवान का विशेष आशीर्वाद माना जाता है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN