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‘मेरे पिता ने मेरे पति को मारा और मुझे ज़िंदा लाश बनाकर छोड़ दिया’

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Source :- BBC INDIA

तनुप्रिया और राहुल मंडल दरभंगा मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में बीएससी नर्सिंग कर रहे थे

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दोपहर के 11 बज रहे थे. मैं सुपौल के पिपरा प्रखंड के तुलापट्टी गांव पहुंची थी. गुनगुनी धूप निकली थी और लोग अपने घरों के बाहर बैठे उसका मज़ा ले रहे थे.

लेकिन तुलापट्टी में ही एक छोटे से अंधेरे कमरे में एक 20 साल की लड़की कंबल में सिमटी सोने की कोशिश कर रही थी. उसके ससुर उसको पुकारते हैं, “तनु बेटा, तुमसे कोई मिलने आया है.”

दो-तीन बार पुकारने पर वह कंबल हटाती हैं. उनकी आंखों में आंसू हैं और हाथ में टैब जिस पर उनके पुराने ख़ुशनुमा दिनों का वीडियो चल रहा है.

यह तनुप्रिया हैं, जिनके पति राहुल की गोली मारकर हत्या करने का आरोप उनके अपने पिता पर है.

वह एक दुबली पतली लड़की हैं, जिनकी बड़ी-बड़ी आंखें उनके जीवन में मौजूदा पीड़ा की गवाही देती हैं. वह सुबह जल्दी नहीं उठना चाहतीं. वह देर तक सोना चाहती हैं ताकि ज़िंदगी का एक और दिन किसी तरह से गुज़र जाए.

तनुप्रिया की कहानी भारत में एक लड़की के ख़ुद के जीवन से जुड़े फ़ैसले लेने, जातीयता की जकड़न और पितृसत्ता की पकड़ में उलझे समाज की कहानी कहती है.

तनुप्रिया और राहुल की प्रेम कहानी

तनुप्रिया का आरोप है कि उनके पिता ने कट्टे से उनके पति की छाती में गोली मारकर हत्या कर दी

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तनुप्रिया बिहार के सहरसा के बनगांव की रहने वाली हैं वहीं राहुल सुपौल के तुलापट्टी गांव के रहने वाले थे.

तनुप्रिया की शुरुआती पढ़ाई सहरसा में ही हुई. पढ़ाई में तेज़ तनुप्रिया, प्रेमशंकर झा और गुंजन कुमारी की सबसे बड़ी बेटी हैं.

प्रेम शंकर झा की दवाइयों की दुकान है और गुंजन कुमारी सरकारी स्कूल में संस्कृत पढ़ाती हैं. तनुप्रिया के दो छोटे भाई हैं.

तनुप्रिया की राहुल कुमार से मुलाकात दरभंगा मेडिकल कॉलेज में हुई.

राहुल सामान्य किसान परिवार से ताल्लुक रखते थे. दसवीं तक पढ़े उनके पिता गणेश मंडल खेती करते हैं और बारहवीं तक पढ़ी मां अनीता देवी गृहिणी हैं.

‘मंडल’ बिहार में अति पिछड़ी जाति समूह में आते हैं.

राहुल और तनुप्रिया

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राहुल और तनुप्रिया दोनों ही दरभंगा मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में बीएससी नर्सिंग कर रहे थे.

तनु बताती हैं, “राहुल मुझसे एक साल सीनियर था. मेडिकल प्रोफ़ेशन में सीनियर जूनियर का इंटरेक्शन ज़्यादा होता है, इसलिए मेरी राहुल से दोस्ती हो गई. वह मेरा सबसे अच्छा दोस्त था. कॉलेज में सभी लोग यह देखकर आश्चर्य करते थे कि हमारे बीच कभी कोई लड़ाई क्यों नहीं हुई.”

राहुल, तनुप्रिया को पढ़ाई लिखाई में मदद करता था. लेकिन दोनों के बीच असल में बुलेट ने नजदीकियां बढ़ाईं.

राहुल के पास बुलेट थी और तनु को बुलेट चलाने का शौक था. आज भी तनु के इंस्ट्राग्राम पर राहुल के साथ बुलेट चलाते कई वीडियो हैं.

तनुप्रिया उनको दिखाते हुए चहक उठती हैं. वह कहती हैं, “हम दोनों साथ-साथ पढ़ते और घूमते थे. डेटिंग जैसा कुछ नहीं था. हम बुलेट से मंदिर जाते. मैं एक ब्राह्मण परिवार से आती हूं और मेरे पति ईबीसी (अति पिछड़ा) से आते थे. कॉलेज में बहुत लोगों को यह पसंद नहीं आया. मेरे पिता प्रेमशंकर झा तक यह बात पहुंचा दी गई कि मेरा अफ़ेयर तथाकथित निचली जाति के लड़के से चल रहा है.”

तनुप्रिया कहती हैं कि दोनों सोच समझ कर शादी का फ़ैसला लिया था

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तनुप्रिया और राहुल के बीच दोस्ती की सूचना परिवार तक पहुंच चुकी थी.

तनुप्रिया बताती हैं कि बीते साल (2025) 27 मार्च को वह अपने घर बनगांव गई तो परिवार वालों ने उनको प्रताड़ित करना शुरू कर दिया.

तनुप्रिया ने कहा, “उन लोगों ने दबाव बनाया कि मैं राहुल पर रेप का केस फ़ाइल करूं. लेकिन जब उसने मुझे ग़लत तरीक़े से छुआ तक नहीं तो मैं ऐसा कैसे कर सकती थी. आप किसी से फ्रेंडशिप करते हैं तो इसका मतलब यह तो नहीं कि आप पर कोई प्रेशर पड़े और आप अपने दोस्त का करियर बर्बाद कर दें.”

तनुप्रिया कहती हैं, “मेरे मना करने पर घरवालों में मुझे मारना शुरू कर दिया. जब मेरे लिए बर्दाश्त करना मुश्किल हो गया तब मैनें इंस्टा के जरिए राहुल को मैसेज़ भेजा कि मुझे बचा लें. मेरे पास फ़ोन नहीं था और लैपटॉप पर इंस्टा ही एक तरीक़ा था जिससे मैं राहुल से संपर्क कर सकती थी.”

तनुप्रिया ने राहुल की मदद से अपना घर छोड़ दिया. दोनों ने अपनी ज़िंदगी के बारे में सोचा और फिर सोच-समझ कर शादी का फ़ैसला लिया.

तनुप्रिया बताती हैं, “हमने लखीसराय के अशोकधाम में शादी की और सुपौल कोर्ट में शपथ पत्र वगैरह भी बनवा लिया. फिर बनगांव पुलिस स्टेशन में भी मेरा 161 और 164 का स्टेटमेंट हुआ कि मैंने यह शादी अपनी मर्ज़ी से की है.”

वह कहती हैं, “शादी के बाद मैं डीएमसीएच आ गई. मैं बीएससी नर्सिंग के साथ-साथ यूपीएससी की तैयारी करने लगी. राहुल ने मेरे लिए टैब ख़रीदा और कहा, बस पढ़ाई करो. 5 अगस्त को भी उसने कहा था कि तुम पॉलिटिकल साइंस का चैप्टर कंप्लीट कर लेना. मैंने कहा था कि शाम में कर लूंगी, लेकिन वह शाम कभी आई ही नहीं.”

पांच अगस्त को क्या हुआ था?

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SOURCE : BBC NEWS