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राहुल गांधी के ख़िलाफ़ विशेषाधिकार हनन का नोटिस नहीं देगी भाजपा, प्रियंका गांधी क्या बोलीं

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Source :- BBC INDIA

बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने कहा है कि सरकार राहुल गांधी के ख़िलाफ़ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव नहीं लाएगी.

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3 घंटे पहले

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सरकार लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के ख़िलाफ़ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव नहीं लाएगी.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने गुरुवार को कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के ख़िलाफ़ कोई विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव नहीं है, लेकिन उन्होंने उनके विरुद्ध कार्रवाई की मांग करते हुए एक मूल प्रस्ताव पेश करने के लिए नोटिस दिया है.

हालांकि मीडिया में आई ख़बरों के मुताबिक़ कल राहुल गांधी की ओर से दिए गए भाषण के कुछ शब्द और लाइनें संसद की कार्यवाही से हटाई जा सकती हैं क्योंकि कहा जा रहा है कि उन्होंने जो आरोप लगाए थे, उनकी पुष्टि नहीं हुई थी.

संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने कल कहा था कि राहुल गांधी ‘निराधार आरोप’ लगा रहे हैं. रिजिजू ने कहा था कि राहुल गांधी के भाषण की ‘ग़लत बातों’ को कार्यवाही से हटा दिया जाएगा.’

दरअसल संसद में एक लंबे गतिरोध के बाद बुधवार को लोकसभा में बजट पर बोलते हुए विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अमेरिका और भारत की ट्रेड डील पर मोदी सरकार पर कई आरोप लगाए.

उन्होंने जेफ़री एपस्टीन फ़ाइल्स, अनिल अंबानी और अदानी से जुड़े मामलों का ज़िक्र किया था. उन्होंने अनिल अंबानी और केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी पर भी आरोप लगाए थे.

संसद में एक लंबे गतिरोध के बाद बुधवार को लोकसभा में बजट पर बोलते हुए विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अमेरिका और भारत की ट्रेड डील पर मोदी सरकार पर कई आरोप लगाए.

उन्होंने जेफ़री एपस्टीन फ़ाइल्स, अनिल अंबानी और अदानी से जुड़े मामलों का ज़िक्र किया था. उन्होंने अनिल अंबानी और केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी पर भी आरोप लगाए थे.

निशिकांत दुबे का कहना था कि राहुल गांधी अनर्गल आरोप लगा कर प्रधानमंत्री और देश को बदनाम कर रहे हैं.

निशिकांत दुबे ने कहा, “कोई विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव नहीं है. मैंने एक मूल प्रस्ताव पेश करने के लिए नोटिस दिया है. इसमें मैंने कहा है कि राहुल गांधी कथित रूप से सोरोस फाउंडेशन, फोर्ड फाउंडेशन, यूएसएआईडी से जुड़े रहे हैं और थाईलैंड, कंबोडिया, वियतनाम तथा अमेरिका जैसे देशों की यात्राएं करते रहे हैं. उनका संबंध भारत-विरोधी ताकतों से रहा है. मैंने मांग की है कि उनकी सदस्यता रद्द की जाए और उन्हें आजीवन चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित किया जाए.”

निशिकांत दुबे ने नोटिस में कहा है, ”यदि मैं, एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि के रूप में ,भले ही मेरा प्रभाव क्षेत्र सीमित हो और मेरी पृष्ठभूमि साधारण हो, यह बात आपके संज्ञान में न लाऊं, तो मैं अपने देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता की रक्षा करने के अपने संवैधानिक दायित्व का निर्वहन नहीं कर पाऊंगा.”

कांग्रेस ने क्या कहा

राहुल गांधी

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कांग्रेस ने इससे पहले विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव की ख़बरों पर अपनी प्रतिक्रिया दी थी.

कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने राहुल गांधी के ख़िलाफ़ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने की ख़बरों पर कहा था, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों के साथ विश्वासघात किया है. अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील से किसानों का बहुत नुकसान होने वाला है. इसी कारण आज लेबर यूनियन स्ट्राइक पर हैं और हम उनका सपोर्ट कर रहे हैं. मोदी सरकार चाहे राहुल जी के खिलाफ विशेषाधिकार नोटिस लाएं या एफ़आईआर करें, उन्हें फर्क नहीं पड़ता.

इस बारे में संसद के अंदर पूछे एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, ”मोदी जी के भी ख़िलाफ़ भी नोटिस होना चाहिए था.”

दरअसल राहुल गांधी ने बुधवार को बजट पर चर्चा के दौरान भारत-अमेरिका ट्रेड डील करते हुए कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका के सामने पूरी तरह ‘आत्मसमर्पण’ कर दिया है.

इसी दौरान उन्होंने एपस्टीन फ़ाइलों का हवाला देकर उद्योगपति अनिल अंबानी और केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी पर भी आरोप लगाए थे.

बाद में हरदीप पुरी ने एक प्रेस क़ॉन्फ़्रेंस कर इस मामले में अपना पक्ष रखा था.

इसके बाद निशिकांत दुबे समेत बीजेपी के कई नेताओं ने कहा था कि राहुल गांधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दूसरे नेताओं की छवि खराब कर रहे हैं.

निशकांत दुबे ने कहा कि राहुल गांधी सदन को गुमराह कर रहे हैं.

बुधवार को लोकसभा में राहुल गांधी जेफ़री एपस्टीन फ़ाइल्स, अनिल अंबानी और अदानी से जुड़े मामलों पर बोले थे.

उन्होंने अनिल अंबानी और केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी पर भी आरोप लगाए थे.

राहुल गांधी की ओर से इन मुद्दों को उठाने के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं के बीच तनाव देखने को मिला था,

हरदीप पुरी ने कहा कि एपस्टीन से उनकी मुलाकात केवल “कुछ मौकों पर, वह भी एक प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के तौर पर हुई थी और उनके साथ सिर्फ एक ईमेल का आदान-प्रदान हुआ था.”

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि राहुल गांधी ‘निराधार आरोप’ लगा रहे हैं. रिजिजू ने कहा कि राहुल गांधी के भाषण की ‘ग़लत बातों को कार्यवाही से हटा दिया जाएगा.’

राहुल गांधी के इस भाषण से पहले विपक्ष इस बात का विरोध कर रहा था कि उनके नेता को पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण का उल्लेख करने के बाद बोलने नहीं दिया गया.

निशिकांत दुबे

पिछले सप्ताह लोकसभा में अपने भाषण के दौरान राहुल गांधी ने जनरल नरवणे की संस्मरणों की किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ के अंश उद्धृत करने की कोशिश की थी. इसके बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था.

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा था कि अप्रकाशित अंश को कोट नहीं किया जा सकता. इसके बाद विपक्ष ने आरोप लगाया कि उसके नेता को बोलने नहीं दिया जा रहा है. इस विवाद के बढ़ने के बाद विपक्षी नेताओं ने बताया कि उन्होंने ओम बिरला को हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया है.

इस विवाद के बाद बुधवार को जब लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई तो बजट पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील का ज़िक्र किया और कहा कि प्रधानमंत्री ने अमेरिका के सामने ‘आत्मसमर्पण’ कर दिया है.

इसके साथ ही उन्होंने एपस्टीन फ़ाइल्स का ज़िक्र किया और कहा कि केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने ही अनिल अंबानी का परिचय अमेरिकी निवेशक और यौन अपराधी जेफ़री एपस्टीन से कराया था.

इसी के बाद किरेन रिजिजू और बीजेपी नेता सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी पर आपत्तिजनक बयान देने का आरोप लगाया था. इसके बाद बीजेपी नेताओं के बीच राहुल गांधी के ख़िलाफ़ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने की चर्चा तेज हुई थी.

रिजिजू ने कहा, “बजट पर भाषण देते समय राहुल गांधी बिना किसी तर्क, बिना किसी सबूत और बिना किसी नोटिस के आरोप लगा रहे हैं. उन्होंने पूरे भाषण में जो भी ग़लत बातें कही हैं, सब हटाई जाएंगी और जो भी असंसदीय शब्द उन्होंने इस्तेमाल किए हैं, उन्हें भी हटाया जाना चाहिए. खासकर जो भी ‘झूठ’ उन्होंने कहा है, ग़लत बातों का ज़िक्र किया है और आरोप लगाए हैं उन्हें हटाया जाना चाहिए.”

हरदीप पुरी

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वहीं सुधांशु त्रिवेदी ने कहा था, ”राहुल गांधी ने चेतावनी के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर फिर से झूठे आरोप लगाए और आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया. उनके मुताबिक़, संसद में बोलने की एक मर्यादा और शालीन भाषा होती है, जिसका पालन हर सदस्य को करना चाहिए.”

त्रिवेदी ने कहा, ”राहुल गांधी का व्यवहार और ‘संसदीय मर्यादा का पालन’ न करना दिखाता है कि कांग्रेस अपनी राजनीतिक हार से बौखला गई है. राहुल गांधी होशो-हवास खो चुके हैं.”

त्रिवेदी ने कहा कि राहुल गांधी को शायद यह भी ध्यान नहीं है कि वे किस पद पर हैं और क्या बोल रहे हैं.

क्या है मूल प्रस्ताव

मूल प्रस्ताव का नोटिस प्रक्रिया सामान्य नोटिस से अलग होता है.

यदि लोकसभा अध्यक्ष इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हैं, तो इस पर चर्चा और मतदान होगा और प्रस्ताव पारित होने की स्थिति में राहुल गांधी की सदस्यता तक प्रभावित हो सकती है.

मूल प्रस्ताव स्वतंत्र और पूर्ण प्रस्ताव होता है, जिसे सदन की स्वीकृति के लिए पेश किया जाता है. इसे इस प्रकार तैयार किया जाता है कि वह अपने आप में पूर्ण हो और सदन के किसी स्पष्ट निर्णय को व्यक्त करने में सक्षम हो.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

SOURCE : BBC NEWS