Source :- LIVE HINDUSTAN
संक्षेप:
सालों तक बैंक एफडी, सेविंग अकाउंट और सोना ही सुरक्षित भविष्य की पहचान थे। 6–7% रिटर्न को ‘सेफ्टी नेट’ माना जाता था। लेकिन अब महंगाई, बढ़ती जरूरतें और बेहतर जानकारी ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या सिर्फ सुरक्षित रहना ही काफी है?
Fixed Deposit: सालों तक बैंक एफडी, सेविंग अकाउंट और सोना ही सुरक्षित भविष्य की पहचान थे। 6–7% रिटर्न को ‘सेफ्टी नेट’ माना जाता था। लेकिन अब महंगाई, बढ़ती जरूरतें और बेहतर जानकारी ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या सिर्फ सुरक्षित रहना ही काफी है? इसी सवाल ने भारतीय परिवारों को म्यूचुअल फंड, शेयर बाजार और SIP जैसे निवेश विकल्पों की ओर मोड़ा है, जहां जोखिम तो है, लेकिन लंबे समय में बेहतर रिटर्न की उम्मीद भी।
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एफडी से म्यूचुअल फंड की ओर झुकाव
आज एफडी से म्यूचुअल फंड की ओर झुकाव साफ दिखता है। लोग समझने लगे हैं कि अगर पैसा महंगाई से तेज नहीं बढ़ा, तो असल में उसकी ताकत घट रही है। SIP जैसे विकल्पों ने निवेश को आसान बना दिया है। ₹5,000 या ₹8,000 महीने की छोटी रकम से भी लोग बाजार में हिस्सेदारी कर पा रहे हैं। उतार-चढ़ाव के बावजूद कई परिवारों ने देखा है कि लंबे समय में इक्विटी आधारित निवेश ने एफडी या सेविंग अकाउंट से बेहतर नतीजे दिए हैं। यही वजह है कि अब “मार्केट गिरेगा तो क्या होगा” से ज्यादा “लंबे समय में क्या मिलेगा” पर फोकस बढ़ रहा है।
सिर्फ रिटर्न ही नहीं, सोच भी बदल रही है। पहले जोखिम से पूरी तरह बचने की कोशिश होती थी, अब जोखिम को समझकर अपनाने की मानसिकता बन रही है। परिवार अपने निवेश को अलग-अलग जगह बांट रहे हैं। थोड़ा एफडी, थोड़ा म्यूचुअल फंड, कुछ शेयर, यहां तक कि इंटरनेशनल फंड या ETF भी। हालांकि इसके साथ तनाव भी आता है। बाजार गिरते ही मोबाइल पर पोर्टफोलियो बार-बार चेक करना, घबराहट महसूस होना—ये सब इस नए दौर का हिस्सा हैं। लेकिन लोग यह भी सीख रहे हैं कि धैर्य और अनुशासन ही असली कुंजी है।
सिर्फ पैसों तक सीमित नहीं है बदलाव
इस बदलाव का असर सिर्फ पैसों तक सीमित नहीं है, बल्कि पारिवारिक रिश्तों पर भी दिख रहा है। अब निवेश के फैसले अकेले नहीं लिए जाते। पति-पत्नी मिलकर प्लान करते हैं, बच्चे भी समझने लगते हैं कि पैसा कैसे बढ़ता है और कैसे घट सकता है। बातचीत खुली हो रही है और वित्तीय समझ बढ़ रही है। आज भारतीय परिवार के लिए वित्तीय सुरक्षा का मतलब सिर्फ गारंटीड रिटर्न नहीं, बल्कि सही प्लानिंग, समझदारी भरा जोखिम और भविष्य के लिए तैयार रहना बनता जा रहा है। यही है 7% से आगे की नई सोच।
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