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स्काउटिंग से मसाज तक… एपस्टीन ने लड़कियों को जाल में ऐसे फंसाया; पढ़ें अंदर की कहानी

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Source :- LIVE HINDUSTAN

संक्षेप:

अमेरिकी न्याय विभाग ने हाल ही में एपस्टीन फाइल्स ट्रांसपेरेंसी एक्ट के तहत 35 लाख से अधिक पन्नों के दस्तावेज, ईमेल, पुलिस रिपोर्ट्स, तस्वीरें और वीडियो जारी किए हैं, जिसमें जेफरी एपस्टीन और घिसलेन मैक्सवेल के शोषण नेटवर्क के कई चौंकाने वाले राज सामने आए हैं।

एपस्टीन फाइल्स जारी होने के बाद से ही दुनिया भर में हड़कंप मचा हुआ है। अमेरिकी न्याय विभाग (DoJ) ने हाल ही में एपस्टीन फाइल्स ट्रांसपेरेंसी एक्ट के तहत 35 लाख से अधिक पन्नों के दस्तावेज, ईमेल, पुलिस रिपोर्ट्स, तस्वीरें और वीडियो जारी किए हैं, जिसमें जेफरी एपस्टीन और घिसलेन मैक्सवेल के शोषण नेटवर्क के कई चौंकाने वाले राज सामने आए हैं। ये फाइलें न सिर्फ अमेरिका बल्कि यूरोप और अन्य देशों की कई नामचीन हस्तियों को जांच के घेरे में ला रही हैं। सवाल यह है कि एपस्टीन ने हजारों लड़कियों को कैसे अपने यौन शोषण के जाल में फंसाया?

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द टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह सब मिशिगन के एक ग्रीष्मकालीन कला शिविर में शुरू हुआ, जहां 14 साल की लड़की (जिन्हें फाइलों में ‘जेन’ के नाम से जाना जाता है) आइसक्रीम खाते हुए घिसलेन मैक्सवेल से मिलीं। मैक्सवेल अपने यॉर्कशायर टेरियर कुत्ते को घुमा रही थीं। बातचीत शुरू में हल्की-फुल्की थी, लेकिन तभी 41 साल के जेफरी एपस्टीन की एंट्री होती है। उसने अपनी वित्त-पोषित छात्रवृत्तियों और अपने नाम पर बने शिविर लॉज के बारे में बताया।

इसके बाद एपस्टीन फ्लोरिडा के पाम बीच पहुंचा और जेन की मां को प्रभावित करते हुए उन्हें अपने शानदार बंगले में बुलाया। इस दौरान उसने लड़की की प्रतिभा की तारीफ की और मदद का वादा किया, जिससे जेन उसके जाल में फंस गई। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ ही महीनों में जेन एपस्टीन को पैसे के बदले ‘मसाज’ देने लगी, जो समय के साथ यौन शोषण में बदल गया। रिपोर्ट के अनुसार, वह लगभग तीन साल तक इस जाल में फंसी रही।

एपस्टीन ने 1000 से अधिक महिलाओं का किया शोषण

जेन की यह कहानी अमेरिकी न्याय विभाग (DoJ) द्वारा जारी की गई 35 लाख पन्नों की फाइलों में दर्ज सैकड़ों कहानियों में से सिर्फ एक है। इन फाइलों में ईमेल, पुलिस रिपोर्ट, तस्वीरें और पीड़ितों के बयान शामिल हैं। DoJ का अनुमान है कि एपस्टीन ने 1000 से अधिक महिलाओं का यौन शोषण किया, जिनमें से ज्यादातर के नाम गुप्त रखे गए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, एपस्टीन के तरीके जगह और लक्ष्य के हिसाब से अलग-अलग थे। फ्लोरिडा में वह गरीब इलाकों की लड़कियों को निशाना बनाता था और उन्हें पाम बीच स्थित अपने घर में मसाज के बदले पैसे देता था। न्यूयॉर्क में वह महत्वाकांक्षी युवतियों को छात्रवृत्ति, प्रभावशाली लोगों से संपर्क और मैनहट्टन के टाउनहाउस में पार्टियों के निमंत्रण का लालच देकर फंसाता था। पूर्वी यूरोप में मॉडलिंग के संपर्कों का इस्तेमाल कर महिलाओं को प्रसिद्धि के वादे देकर लुभाया जाता था, और फिर उन्हें अमेरिका ले जाया जाता था।

टाइम्स की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भर्ती प्रक्रिया में घिसलेन मैक्सवेल की बहुत अहम भूमिका थी। गवाहों ने बताया कि वह स्कूलों का जायजा लेती थीं और परिवारों की आर्थिक स्थिति पूछकर कमजोरियों का पता लगाती थीं। शुरुआत में बच्चों को बहलाने-फुसलाने का काम मासूमियत भरे तरीकों से होता था, जैसे सिनेमा ले जाना, खरीदारी कराना, उपहार देना और ध्यान आकर्षित करना।

मसाज के बदले 300 यूएस डॉलर

एपस्टीन मसाज के लिए 300 अमेरिकी डॉलर का भुगतान करता था। अगर कोई लड़की अपनी सहेली को साथ लाती थी, तो उसे अलग से 300 डॉलर मिलते थे। इससे एक ऐसा नेटवर्क बन गया जो खुद-ब-खुद चलता रहता था। पीड़ितों को देश भर में हवाई जहाज से पाम बीच, न्यूयॉर्क, न्यू मैक्सिको या एपस्टीन के निजी द्वीप ले जाया जाता था। कुछ मामलों में उन्हें लंदन या पेरिस में भी ठहराया गया।

रिपोर्ट के अनुसार, एपस्टीन किराया, हवाई यात्रा, चिकित्सा खर्च और कला-नृत्य स्कूलों में छात्रवृत्ति तक के लिए पैसे देता था। कुछ पीड़ितों को ‘निजी सत्रों’ के लिए दूसरों को भर्ती करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता था। ईमेल से पता चलता है कि भुगतान, शिक्षा और संसाधनों की पूरी योजना बनाई जाती थी, जिससे निर्भरता बढ़ती गई और भागना लगभग असंभव हो गया।

पीड़ित महिलाएं खुद को बतातीं ‘मानव गर्भगृह’

समय के साथ एपस्टीन और मैक्सवेल ने इस नेटवर्क को और औपचारिक रूप दिया। ईमेल में ‘मसाज के लिए दोस्त ढूंढने’ और लड़कियों का चयन रूप-रंग, उम्र तथा अनुमानित बुद्धिमत्ता के आधार पर करने की चर्चा मिलती है। किशोरियों द्वारा स्कूल के दोस्तों को भर्ती करने से शुरू हुआ यह सिलसिला धीरे-धीरे मानव तस्करी गिरोह में बदल गया। फाइलों से बरामद डायरियों में बार-बार गर्भधारण की घटनाओं का जिक्र है, जहां पीड़ित महिलाएं खुद को एपस्टीन और मैक्सवेल की घिनौनी योजना में ‘मानव गर्भगृह’ बताती हैं।

बता दें कि जेफरी एपस्टीन ने 2019 में जेल में आत्महत्या कर ली थी, जबकि घिसलेन मैक्सवेल को 2022 में 20 साल की सजा सुनाई गई। 2020 में स्थापित एक मुआवजा कोष ने 150 पीड़ितों को कुल 120 मिलियन अमेरिकी डॉलर का भुगतान किया है, लेकिन कई लोगों के लिए यह आर्थिक मुआवजा भी उस संकट से उबार नहीं सका है और आज भी परेशान हैं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN