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8th Pay Commission Latest News: सबसे बड़ा विवाद भत्तों के वर्गीकरण को लेकर सामने आया है। IRTSA का कहना है कि जहां सातवें वेतन आयोग ने 196 अलग-अलग भत्तों की विस्तार से समीक्षा की थी, वहीं 8वें वेतन आयोग की ऑनलाइन प्रक्रिया में इन्हें केवल 12 व्यापक श्रेणियों में समेट दिया गया है।
8वें वेतन आयोग को लेकर कर्मचारियों के बीच बहस तेज हो गई है। खासतौर पर भत्तों की समीक्षा और पेंशन से जुड़े मुद्दों पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। भारतीय रेल तकनीकी पर्यवेक्षक संघ (IRTSA) ने आयोग की मौजूदा प्रक्रिया में कई खामियां बताते हुए चिंता जताई है कि इससे कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की अहम समस्याएं अनदेखी रह सकती हैं।
फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक सबसे बड़ा विवाद भत्तों के वर्गीकरण को लेकर सामने आया है। IRTSA का कहना है कि जहां सातवें वेतन आयोग ने 196 अलग-अलग भत्तों की विस्तार से समीक्षा की थी, वहीं आठवें वेतन आयोग की ऑनलाइन प्रक्रिया में इन्हें केवल 12 व्यापक श्रेणियों में समेट दिया गया है।
कई जरूरी मुद्दे हो सकते हैं नजरअंदाज
संघ के अनुसार, हर भत्ता किसी विशेष काम, जोखिम या कार्य परिस्थितियों के आधार पर बनाया गया था। ऐसे में उन्हें सीमित श्रेणियों में बांटने से उनकी मूल भावना खत्म होने का खतरा है। इससे कर्मचारियों को अपनी विशिष्ट समस्याएं और मांगें सही तरीके से रखने में कठिनाई हो सकती है और कई जरूरी मुद्दे नजरअंदाज हो सकते हैं।
पेंशन और फैमिली पेंशन को लेकर भी संघ ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। IRTSA का कहना है कि आयोग की थीम्स में सेवानिवृत्ति से जुड़े कुछ पहलू जरूर शामिल हैं, लेकिन पेंशन को लेकर स्पष्ट और व्यापक फोकस नहीं दिख रहा है। यह मुद्दा इसलिए अहम है, क्योंकि लाखों रिटायर्ड कर्मचारियों और उनके परिवारों की आर्थिक सुरक्षा सीधे पेंशन पर निर्भर करती है। पिछले वेतन आयोगों में पेंशन सुधार को केंद्रीय विषय माना गया था, लेकिन इस बार इसे उतनी प्राथमिकता नहीं मिलने की आशंका जताई जा रही है।
आयोग की ऑनलाइन प्रक्रिया पर भी सवाल
आयोग की ऑनलाइन प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं। सुझाव देने के लिए बनाए गए डिजिटल सिस्टम में केवल नौ थीम्स के जरिए सभी मुद्दों को समेटने की कोशिश की गई है, जिसे संघ ने अपर्याप्त बताया है। इसके अलावा हर थीम पर सिर्फ 3,500 अक्षरों की सीमा और केवल एक दस्तावेज अपलोड करने की अनुमति भी बड़ी बाधा मानी जा रही है। संघ का कहना है कि अलग-अलग कैडर और पदों से जुड़ी जटिल समस्याओं को इतने सीमित दायरे में रखना संभव नहीं है, जिससे कर्मचारियों की बात पूरी तरह सामने नहीं आ पाएगी।
IRTSA ने अपने ज्ञापन में कई अन्य महत्वपूर्ण मांगें भी रखी हैं। इनमें कैरियर प्रगति योजना (MACPS) की समीक्षा, बदलती भूमिकाओं के अनुसार ग्रुप ‘A’, ‘B’ और ‘C’ की श्रेणियों का पुनर्गठन, और ऑनलाइन प्रक्रिया के साथ-साथ भौतिक रूप से ज्ञापन जमा करने तथा अदालती फैसलों को शामिल करने की अनुमति जैसी मांगें शामिल हैं।
अभी किस फेज में है 8वां वेतन आयोग
वर्तमान में आठवां वेतन आयोग परामर्श फेज में है और कर्मचारियों, पेंशनभोगियों तथा अन्य हितधारकों से सुझाव मांगे जा रहे हैं। आयोग ने सुझाव जमा करने की अंतिम तारीख बढ़ाकर 31 मार्च 2026 कर दी है, जिससे सभी संबंधित पक्षों को अपनी बात रखने के लिए अतिरिक्त समय मिल गया है।
कुल मिलाकर, अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आयोग अपने दायरे का विस्तार कर भत्तों और पेंशन जैसे अहम मुद्दों को पर्याप्त प्राथमिकता देगा या नहीं। क्योंकि इन फैसलों का सीधा असर लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और सेवानिवृत्त लोगों की आर्थिक स्थिति और भविष्य की सुरक्षा पर पड़ेगा।
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