Source :- LIVE HINDUSTAN
सरकारी कर्मचारी अक्सर मान लेते हैं कि अगर फिटमेंट फैक्टर 2.5 या 2.8 हुआ तो उनकी सैलरी 150% या उससे ज्यादा बढ़ जाएगी। लेकिन हकीकत इससे काफी अलग होती है।
8th Pay Commission: जब भी 8वें वेतन आयोग की चर्चा शुरू होती है, सबसे ज्यादा जिस शब्द पर ध्यान जाता है वह है ‘फिटमेंट फैक्टर’। सरकारी कर्मचारी अक्सर मान लेते हैं कि अगर फिटमेंट फैक्टर 2.5 या 2.8 हुआ तो उनकी सैलरी 150% या उससे ज्यादा बढ़ जाएगी। लेकिन हकीकत इससे काफी अलग होती है। असली बढ़ोतरी इतनी बड़ी नहीं होती, क्योंकि इसमें एक अहम रोल होता है डीए यानी महंगाई भत्ते के मर्जर का है।
क्या है फिटमेंट फैक्टर
सबसे पहले समझिए कि फिटमेंट फैक्टर होता क्या है। यह एक मल्टीप्लायर है, जिससे नई बेसिक सैलरी तय की जाती है। जब नया वेतन आयोग लागू होता है, तब तक कर्मचारियों को महंगाई भत्ता (DA) मिल रहा होता है, जो हर छह महीने में बढ़ता है। कई बार नया आयोग लागू होने तक DA 100% या उससे ज्यादा तक पहुंच जाता है। ऐसे में पहले मौजूदा बेसिक पे में जमा हुआ DA जोड़ा जाता है, उसके बाद फिटमेंट फैक्टर लागू किया जाता है। यानी जो रकम पहले से मिल रही थी, उसे समायोजित करने के बाद ही असली बढ़ोतरी निकलती है।
इसका सबसे साफ उदाहरण 7th पे कमीशन के दौरान देखने को मिला। उस समय फिटमेंट फैक्टर 2.57 रखा गया था और DA करीब 125% था। मान लीजिए किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 7,000 रुपये थी। 125% DA जोड़ने पर कुल सैलरी 15,750 रुपये हो गई। जब 2.57 से नई बेसिक तय हुई तो वह 18,000 रुपये बनी। यानी असली बढ़ोतरी सिर्फ 2,250 रुपये रही, जो लगभग 14.3% थी। यानी 157% जैसी दिखने वाली बढ़ोतरी असल में करीब 14% ही निकली।
अगर पुराने वेतन आयोगों का रिकॉर्ड देखें तो असली बढ़ोतरी 14% से 31% के बीच ही रही है। छठे वेतन आयोग में जरूर 54% की बड़ी छलांग मिली थी, लेकिन उसके बाद सातवें वेतन आयोग में बढ़ोतरी फिर से सीमित रही। यही वजह है कि आठवें वेतन आयोग से भी 150% जैसी उम्मीदें लगाना व्यावहारिक नहीं माना जा रहा।
क्या है नियम
बता दें कि फिटमेंट फैक्टर सिर्फ बेसिक पे पर लागू होता है। अंतिम इन-हैंड सैलरी में एचआरए, ट्रांसपोर्ट अलाउंस और अन्य भत्ते भी शामिल होते हैं, जो शहर और पद के हिसाब से अलग-अलग होते हैं। इसलिए कुल वेतन पर असर व्यक्ति विशेष के हिसाब से बदल सकता है। पिछले ट्रेंड को देखें तो 15% से 30% के बीच वास्तविक बढ़ोतरी ज्यादा यथार्थवादी मानी जा सकती है। हां, अगर सरकार 2.86 जैसे ज्यादा फिटमेंट फैक्टर को मंजूरी देती है तो असर बड़ा हो सकता है। फिलहाल आधिकारिक घोषणा का इंतजार है, लेकिन इतना तय है कि सिर्फ फिटमेंट फैक्टर का आंकड़ा देखकर सैलरी बढ़ोतरी का अंदाजा लगाना सही तस्वीर नहीं दिखाता।
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