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24 घंटे में 6900 करोड़ स्वाहा! मिसाइलों की रेस में ईरान से पिछड़ रहा अमेरिका? सीक्रेट रिपोर्ट

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Source :- LIVE HINDUSTAN

अमेरिका-ईरान युद्ध के चौथे दिन पेंटागन ने हथियारों की कमी की चेतावनी दी है, लेकिन ट्रंप का दावा है कि अमेरिका ‘हमेशा’ युद्ध लड़ सकता है। जानें इस महायुद्ध और अमेरिका के भारी आर्थिक खर्च की पूरी ग्राउंड रिपोर्ट।

अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहा भीषण संघर्ष आज चौथे दिन में प्रवेश कर गया है। पेंटागन (अमेरिकी रक्षा विभाग) से लीक हुई जानकारी से यह संकेत मिला है कि अगर अमेरिका अगले 10 दिनों तक ईरान पर हमले जारी रखता है, तो उसके पास मौजूद महत्वपूर्ण मिसाइलों के भंडार में भारी कमी आ सकती है।

हमले की शुरुआत और ईरान का पलटवार

शुक्रवार दोपहर को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पत्रकारों से कहा था कि वह ईरान के साथ चल रही परमाणु वार्ता से खुश नहीं हैं। इसके ठीक तीन घंटे बाद, उन्होंने एक बड़े सैन्य ऑपरेशन का आदेश दिया। इस अमेरिकी हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और कई शीर्ष सैन्य कमांडरों की मौत हो गई। इसके जवाब में ईरान ने मिसाइलों और ड्रोनों के जरिए बहरीन, सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और इराक में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है।

हथियारों की कमी: ट्रंप और सैन्य अधिकारियों के अलग-अलग दावे

अल जजीरा की एक रिपोर्ट के अनुसार, पेंटागन ने ट्रंप को सूचित किया है कि अगर यह युद्ध लंबा खिंचता है, तो गोला-बारूद के भंडार को फिर से भरने में भारी लागत का जोखिम उठाना पड़ सकता है। 23 फरवरी को ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की रिपोर्ट में बताया गया था कि पेंटागन के अधिकारियों और जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन ने ट्रंप को चेतावनी दी थी कि इजरायल और यूक्रेन को सैन्य सहायता देने के कारण अमेरिका के महत्वपूर्ण हथियारों का रिजर्व पहले से ही गंभीर रूप से कम हो चुका है। इससे ईरान के हमलों को रोकने में मुश्किलें आ सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका के उन्नत मिसाइल रक्षा कवच मुख्य रूप से रूस या चीन जैसी बड़ी शक्तियों के छोटे और तीव्र हमलों को रोकने के लिए बनाए गए थे, न कि ईरान जैसे लगातार और कम लागत वाले रॉकेट हमलों के लिए।

राष्ट्रपति ट्रंप का दावा

सभी चेतावनियों के उलट, राष्ट्रपति ट्रंप ने मंगलवार को ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट में लिखा कि अमेरिका के पास हथियारों का लगभग असीमित भंडार है। उन्होंने दावा किया कि इन हथियारों की मदद से युद्ध “हमेशा के लिए” और बहुत सफलतापूर्वक लड़ा जा सकता है। सोमवार को ट्रंप ने यह भी कहा था कि ईरान पर हमले की योजना चार से पांच सप्ताह के लिए बनाई गई थी, लेकिन यह उससे कहीं अधिक समय तक चल सकता है।

कौन से हथियार हो रहे हैं कम?

अल जजीरा की रिपोर्ट चेतावनी देती है कि अमेरिका के उन्नत प्रिसिजन मूनिशन्स (सटीक मारक हथियार) और महत्वपूर्ण इंटरसेप्टर्स खत्म होने की कगार पर हैं। पिछले साल ईरान के साथ हुए युद्ध में अमेरिका ने अपने THAAD इंटरसेप्टर्स का 25% (150 इंटरसेप्टर्स) इस्तेमाल कर लिया था। अमेरिकी मीडिया के अनुसार, पिछले साल युद्ध के दौरान जहाजों पर तैनात इंटरसेप्टर्स भी खत्म हो गए थे। JDAMs (जॉइंट डायरेक्ट अटैक मूनिशन्स), सामान्य बमों को सटीक स्मार्ट हथियारों में बदलने वाली इन जीपीएस-गाइडेड किट पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है।

जहाजों से लॉन्च होने वाली स्टैंडर्ड मिसाइल-3 (SM-3) की संख्या भी तेजी से घट रही है। इसका कारण धीमी निर्माण गति, यमन के हूती विद्रोहियों के खिलाफ लगातार अभियान और ईरान के साथ पिछले टकराव हैं। सोमवार को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एक चौंकाने वाला आंकड़ा पेश किया। उन्होंने बताया कि ईरान हर महीने लगभग 100 मिसाइलों का उत्पादन कर रहा है, जबकि इसके मुकाबले अमेरिका एक महीने में केवल 6 या 7 इंटरसेप्टर ही बना पाता है।

युद्ध की भारी आर्थिक कीमत

इस संघर्ष का अमेरिका पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है:

दैनिक खर्च: हमलों के पहले 24 घंटों में ही अमेरिका ने लगभग 779 मिलियन डॉलर (करीब 6,900 करोड़ रुपये) खर्च कर दिए हैं।

कैरियर स्ट्राइक ग्रुप का खर्च: दुनिया के सबसे बड़े विमान वाहक पोत ‘यूएसएस गेराल्ड आर फोर्ड’ जैसे कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को संचालित करने का खर्च लगभग 6.5 मिलियन डॉलर (करीब 58 करोड़ रुपये) प्रतिदिन है।

हमले से पहले की तैयारी: विमानों और जहाजों की तैनाती सहित हमले से पहले की सैन्य तैयारियों पर अनुमानित 630 मिलियन डॉलर (करीब 5,556 करोड़ रुपये) का खर्च आया।

लंबा युद्ध खिंचने का अनुमान: पेन व्हार्टन बजट मॉडल के निदेशक केंट स्मेटर्स के अनुसार, यदि यह युद्ध ट्रंप के संकेत के मुताबिक लंबा चलता है, तो अमेरिका को 210 बिलियन डॉलर (करीब 18.87 लाख करोड़ रुपये) की भारी-भरकम राशि खर्च करनी पड़ सकती है।

पिछला खर्च (अक्टूबर 2023 से): ब्राउन यूनिवर्सिटी की 2025 ‘कॉस्ट्स ऑफ वॉर’ रिपोर्ट के अनुसार, 7 अक्टूबर 2023 (हमास के इज़राइल पर हमले) के बाद से अमेरिका इज़राइल को 21.7 बिलियन डॉलर की सैन्य सहायता दे चुका है। यमन, ईरान और मध्य पूर्व के अन्य अभियानों को मिलाकर यह कुल खर्च 31.35 बिलियन डॉलर (2.82 लाख करोड़ रुपये) से 33.77 बिलियन डॉलर (3.04 लाख करोड़ रुपये) के बीच पहुँच चुका है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN