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2026 में चमकेगा भारत! बनेगा दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोलर मार्केट, NSEFI ने की बड़ी भविष्यवाणी

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Source :- LIVE HINDUSTAN

भारत सौर ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और 2026 तक दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोलर मार्केट बनने की ओर अग्रसर है। NSEFI के अनुसार, देश ने रिकॉर्ड गति से सोलर क्षमता बढ़ाई है और सरकारी योजनाओं के समर्थन से यह ग्रोथ आगे भी जारी रहने की उम्मीद है।

भारत अब ग्रीन एनर्जी की दौड़ में तेजी से आगे बढ़ रहा है और आने वाले समय में यह दुनिया के सबसे बड़े सोलर एनर्जी मार्केट में शामिल हो सकता है। नेशनल सोलर एनर्जी फेडरेशन ऑफ इंडिया (National Solar Energy Federation of India -NSEFI) के अनुसार, देश ने हाल के महीनों में सोलर एनर्जी के क्षेत्र में रिकॉर्डतोड़ प्रगति की है। सिर्फ 14 महीनों में करीब 50 गीगावाट नई क्षमता जोड़कर भारत ने कुल सौर क्षमता को 150 गीगावाट तक पहुंचा दिया है। यह उपलब्धि इसलिए भी खास है, क्योंकि शुरुआती 50 गीगावाट तक पहुंचने में जहां 11 साल लगे थे, वहीं अब उतनी ही क्षमता बेहद कम समय में जोड़ ली गई है।

इस तेज रफ्तार के पीछे सरकार की कई बड़ी योजनाएं और नीतियां हैं, जो सौर ऊर्जा को बढ़ावा दे रही हैं। पीएम सौर्य घर योजना (PM Surya Ghar Yojana), पीएम कुसुम योजना (PM Kusum Yojana) और राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission) जैसी पहलें इस ग्रोथ को मजबूती दे रही हैं। इन योजनाओं की वजह से न केवल बड़े प्रोजेक्ट्स बल्कि घरों और छोटे व्यवसायों में भी सोलर एनर्जी का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है।

NSEFI (National Solar Energy Federation of India -NSEFI) का मानना है कि भारत 2030 तक 500 गीगावाट नॉन-फॉजिल एनर्जी क्षमता हासिल करने के लक्ष्य पर तेजी से आगे बढ़ रहा है, जिसमें सौर ऊर्जा की हिस्सेदारी 280-300 गीगावाट तक हो सकती है। मौजूदा रफ्तार को देखें तो भारत हर साल लगभग 50 गीगावाट नई सौर क्षमता जोड़ रहा है, जो इसे 2026 तक दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सौर बाजार बना सकता है। खास बात यह है कि जहां अमेरिका और यूरोप में सोलर एनर्जी की ग्रोथ धीमी पड़ रही है, वहीं भारत लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

आने वाले सालों में कॉमर्शियल और इंडस्ट्रियल (C&I) सेक्टर और डिस्ट्रीब्यूटेड रिनवेबल एनर्जी (Distributed Renewable Energy) इस ग्रोथ के सबसे बड़े इंजन बन सकते हैं। कंपनियां अब बिजली के लिए सौर ऊर्जा की ओर तेजी से रुख कर रही हैं, जिससे लागत कम हो रही है और पर्यावरण को भी फायदा मिल रहा है। साथ ही सरकार की PLI स्कीम और मेक इन इंडिया जैसी नीतियों ने सोलर मैन्युफैक्चरिंग को भी मजबूत किया है, जिससे भारत आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

भारत का सौर ऊर्जा सेक्टर एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है, जहां तेज विकास, मजबूत नीतियां और बढ़ती मांग मिलकर इसे ग्लोबल एनर्जी मानचित्र पर एक बड़ी ताकत बना रहे हैं। आने वाले कुछ साल भारत के लिए क्लीन एनर्जी के क्षेत्र में गेमचेंजर साबित हो सकते हैं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN