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18 दिन में ईरान ने US को दिए ऐसे जख्म, ‘रीपर’ से ‘लुकास’ पर होना पड़ा शिफ्ट; 3000 करोड़ का गच्चा?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

ईरान युद्ध में शुरू होने से अब तक कम से कम 11 एमक्यू-9 रीपर ड्रोन ईरानी वायु रक्षा प्रणालियों द्वारा मार कर गिराए जा चुके हैं, जिससे अमेरिका को कुल वित्तीय नुकसान 330 मिलियन डॉलर से अधिक हो गया है। इन भारी नुकसानों के बीच अमेरिकी सेना ने अब एक नई रणनीति अपनाई है।

अमेरिका-इजरायल के नेतृत्व वाले ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के दौरान ईरान के खिलाफ चल रही सैन्य कार्रवाई में अमेरिकी सेना को अपने प्रमुख एमक्यू-9 रीपर ड्रोन बेड़े में गंभीर नुकसान का सामना करना पड़ा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, फरवरी के अंत से अब तक कम से कम 11 एमक्यू-9 रीपर ड्रोन ईरानी वायु रक्षा प्रणालियों द्वारा मार गिराए जा चुके हैं, जिससे कुल वित्तीय नुकसान 330 मिलियन डॉलर से अधिक हो गया है। इन भारी नुकसानों के बीच अमेरिकी सेना ने अब एक नई रणनीति अपनाई है। लुकास नामक कम लागत वाला ड्रोन अब अमेरिका की नई उम्मीद बनकर उभरा है। यह ड्रोन ईरान के प्रसिद्ध शाहेद-136 की तर्ज पर विकसित किया गया है, लेकिन अमेरिकी तकनीक से अपग्रेडेड है।

वॉल स्ट्रीट जर्नल और अन्य रिपोर्टेस के मुताबिक, प्रत्येक रीपर ड्रोन की कीमत 30 से 32 मिलियन डॉलर के बीच है, जिससे कुल नुकसान 330 मिलियन डॉलर ( 30,48,46,74,000 भारतीय रुपये ) से अधिक हो गया है। मूल रूप से आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए डिजाइन किए गए ये धीमी गति वाले ड्रोन (अधिकतम स्पीड 480 किमी/घंटा) ईरान की उन्नत वायु रक्षा प्रणालियों जैसे एस-300 और खोरदाद-15 के सामने बेहद कमजोर साबित हुए हैं।

रीपर ड्रोनों पर हमलों की प्रमुख घटनाएं

  • 14 मार्च: होर्मोजगान प्रांत के बंदर अब्बास के ऊपर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने एक एमक्यू-9 को मार गिराया।
  • 15 मार्च: कुवैत के अली अल सलेम हवाई अड्डे पर ईरानी हमले के दौरान एक रीपर नष्ट हुआ।
  • रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआती दिनों में कतर की सेना द्वारा गलती से कम से कम एक रीपर को मार गिराया गया था।

लुकास और ईरानी शाहेद ड्रोन से रीपर की तुलना

एमक्यू-9 रीपर अमेरिकी सेना का प्रमुख लंबी दूरी का रिमोट-नियंत्रित विमान है, जो खुफिया जानकारी जुटाने और सटीक हमलों में माहिर है। लेकिन उच्च-तीव्रता वाले युद्ध में यह ‘मिसाइल ट्रक’ की भूमिका निभाते हुए भी ईरान की रक्षा प्रणालियों का शिकार हो रहा है। इसके जवाब में अमेरिका ने लो-कॉस्ट अनक्रूड कॉम्बैट अटैक सिस्टम (LUCAS) नामक सस्ते ‘कामिकेज’ ड्रोन को तैनात करना शुरू कर दिया है।

फीनिक्स स्थित स्पेक्ट्रवर्क्स कंपनी द्वारा विकसित यह ड्रोन ईरान के शाहेद-136 का रिवर्स-इंजीनियर्ड संस्करण है। इसकी रेंज 500-800 किमी है और यह लक्ष्य पर टकराकर विस्फोट करता है। स्टारशील्ड और वायासैट जैसे सैटेलाइट कम्युनिकेशन से रीयल-टाइम अपडेट मिलते हैं। मार्च 2026 की शुरुआत में ऑपरेशन एपिक फ्यूरी में इसका पहला युद्ध उपयोग हुआ।

ईरान की शाहेद ड्रोन श्रृंखला कम लागत वाली असममित युद्धनीति का आधार है। एक शाहेद-136 की कीमत मात्र 20000 से 50000 डॉलर है, जबकि इसे रोकने वाली पैट्रियट मिसाइल की कीमत 4 मिलियन डॉलर प्रति यूनिट है। ईरान ने मध्य पूर्व में 1000 से अधिक ड्रोन दागे, जिससे क्षेत्रीय बुनियादी ढांचे में भारी नुकसान हुआ।

रीपर से लुकास की ओर बदलाव के कारण

  • 30 मिलियन डॉलर के रीपर को सस्ती मिसाइल से मारना अमेरिका के लिए आर्थिक नुकसानदायक है, जबकि LUCAS की कीमत मात्र 35000 डॉलर है।
  • रीपर बड़े, धीमे और स्टेल्थ-रहित हैं, जबकि LUCAS छोटे और झुंड में हमला करते हैं, जो रक्षा प्रणालियों को ओवरलोड कर देते हैं।
  • रीपर कम खतरे वाले माहौल के लिए बने थे, लेकिन ईरान जैसे उच्च-तीव्रता वाले संघर्ष में एक्सपेंडेबल ड्रोन ज्यादा प्रभावी हैं।
  • रीपर बनाने में महीनों लगते हैं, जबकि LUCAS मॉड्यूलर हैं और बड़े पैमाने पर तेजी से उत्पादित किए जा सकते हैं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN