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112 डॉलर के पार हुआ ब्रेंट क्रूड, 30 दिन में 56% उछाल; भारत पर बड़ा असर

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Source :- LIVE HINDUSTAN

Crude Oil Price: ब्रेंट क्रूड की कीमतें 112 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। महज 30 दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 56% का उछाल आया है। मार्च की शुरुआत में भारत के कच्चे तेल के आयात में तेज गिरावट आई है।

ग्लोबल एनर्जी मार्केट में भारी उथल-पुथल के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमतें 112 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। अमेरिका-ईरान-इजरायल युद्ध शुरू होने के बाद से तेल में 50% से ज्यादा तेजी आ चुकी है, जिसने दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं को चिंता में डाल दिया है। महज 30 दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 56% का उछाल आया है। युद्ध से पहले जहां कीमतें लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल थीं, वहीं अब यह 112 डॉलर के स्तर को पार कर चुकी हैं। यह तेजी साफ संकेत देती है कि वैश्विक सप्लाई पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है।

सप्लाई चेन पर बड़ा संकट

इस तेजी की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव है। खासतौर पर हुर्मुज स्ट्रेट के आसपास हालात बिगड़ने से दुनिया की तेल सप्लाई पर खतरा मंडरा रहा है। यह स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है। इसके बाधित होने का असर सीधे कीमतों पर पड़ा है।

LNG पर भी खतरा, कतर की सप्लाई प्रभावित

संकट सिर्फ तेल तक सीमित नहीं है, बल्कि एलएनजी (LNG) बाजार भी इसकी चपेट में आ गया है। कतर में ऊर्जा ढांचे पर हमलों के कारण उसकी निर्यात क्षमता का करीब 17% प्रभावित हुआ है। भारत के लिए यह स्थिति और गंभीर है, क्योंकि देश अपनी गैस जरूरतों का लगभग 47% कतर से आयात करता है।

भारत के आयात में गिरावट, सप्लाई कमजोर

एएनआई की रिपोर्ट्स के मुताबिक, मार्च की शुरुआत में भारत के कच्चे तेल के आयात में तेज गिरावट आई है। जहां फरवरी में साप्ताहिक आयात 25 मिलियन बैरल था, वहीं 6 मार्च को समाप्त सप्ताह में यह गिरकर सिर्फ 1.9 मिलियन बैरल रह गया। सऊदी अरब, इराक और यूएई जैसे प्रमुख सप्लायर्स से सप्लाई में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

भारत जैसे देशों पर सबसे ज्यादा असर

सप्लाई में रुकावट और कीमतों में तेजी का सबसे बड़ा असर उन देशों पर पड़ता है, जो आयात पर निर्भर हैं। भारत भी इनमें शामिल है। तेल महंगा होने से परिवहन, बिजली और उत्पादन लागत बढ़ती है, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है और आम लोगों की जेब पर सीधा असर पड़ता है।

क्रूड को क्यों कहा जाता है ‘ब्लैक गोल्ड’?

कच्चा तेल सिर्फ पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आधुनिक जीवन की रीढ़ है। रिफाइनिंग के बाद इससे पेट्रोल, डीजल और जेट फ्यूल जैसे ईंधन बनते हैं, जो परिवहन और ऊर्जा के लिए जरूरी हैं। इसके अलावा प्लास्टिक, सिंथेटिक कपड़े, दवाइयां, पैकेजिंग मटेरियल और सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाला बिटुमेन भी इसी से बनता है।

घरेलू उपयोग में LPG, केरोसिन और मशीनों के लिए लुब्रिकेंट्स भी पेट्रोलियम उत्पाद ही हैं। यहां तक कि कृषि में इस्तेमाल होने वाले उर्वरक और कीटनाशक भी इसी से तैयार होते हैं। यानी सुबह से रात तक हमारी जिंदगी का बड़ा हिस्सा किसी न किसी रूप में कच्चे तेल पर निर्भर है।

आगे क्या होगा?

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मध्य पूर्व में तनाव कम नहीं हुआ, तो तेल की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं। इसका असर सिर्फ पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि महंगाई, शेयर बाजार और पूरी

SOURCE : LIVE HINDUSTAN