Source :- LIVE HINDUSTAN
कंपनी ने हाल ही में एक बड़ा रणनीतिक कदम भी उठाया है। कंपनी ने टैक्स और रेगुलेटरी मामलों में सलाह के लिए डेलॉइट टौचे तोहमात्सू इंडिया एलएलपी को अपना स्ट्रैटेजिक एडवाइजर और ट्रांजैक्शन प्रोग्राम मैनेजर नियुक्त किया है।
Elitecon International Share: छोटे मार्केट कैप वाली कंपनी एलीटकॉन इंटरनेशनल के शेयर में गुरुवार, 5 मार्च को तेज हलचल देखने को मिली। लगातार 9 कारोबारी सत्रों तक गिरावट झेलने के बाद कंपनी के शेयर में जोरदार रिकवरी आई और यह 5% के अपर सर्किट के साथ ₹55.15 पर लॉक हो गया। इससे पहले शेयर लगातार फिसलता रहा था और इन नौ दिनों में इसमें 30% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई थी।
शेयरों के हाल
हालांकि, शेयर में आई यह तेजी फिलहाल लंबी गिरावट के बाद राहत की तरह देखी जा रही है। मौजूदा समय में एलीटकॉन इंटरनेशनल के शेयर अपने 52 हफ्ते के उच्चतम स्तर ₹422.65 से करीब 87% नीचे ट्रेड कर रहा है। कंपनी का यह हाई लेवल 25 अगस्त 2025 को देखा गया था। वहीं 52 हफ्ते का निचला स्तर ₹23.65 मार्च 2025 में दर्ज किया गया था।
अगर हाल के प्रदर्शन पर नजर डालें तो इस शेयर में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। पिछले एक महीने में यह करीब 16% टूट चुका है, जबकि तीन महीनों में इसमें लगभग 36% की गिरावट आई है। वहीं छह महीने के दौरान इस शेयर ने निवेशकों की बड़ी पूंजी डुबोते हुए करीब 78% तक का नुकसान कराया है।
लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह शेयर अभी भी मल्टीबैगर साबित हुआ है। पिछले एक साल में एलीटकॉन इंटरनेशनल के शेयर ने करीब 133% का रिटर्न दिया है। वहीं, तीन साल में यह शेयर करीब 4015% तक उछल चुका है। अगर पांच साल का आंकड़ा देखें तो इस स्मॉल-कैप स्टॉक ने करीब 5420% की जबरदस्त छलांग लगाकर कई निवेशकों को मालामाल किया है।
कंपनी की योजना
इस बीच कंपनी ने हाल ही में एक बड़ा रणनीतिक कदम भी उठाया है। कंपनी ने टैक्स और रेगुलेटरी मामलों में सलाह के लिए डेलॉइट टौचे तोहमात्सू इंडिया एलएलपी को अपना स्ट्रैटेजिक एडवाइजर और ट्रांजैक्शन प्रोग्राम मैनेजर नियुक्त किया है। इसका मकसद कंपनी के ग्रुप एंटिटीज के संभावित मर्जर की प्रक्रिया का मूल्यांकन, स्ट्रक्चरिंग और क्रियान्वयन करना है।
कंपनी फिलहाल सनब्रिज एग्रो प्राइवेट लिमिटेड, लैंड्समिल एग्रो प्राइवेट लिमिटेड और गोल्डन क्रायो प्राइवेट लिमिटेड को अपने साथ मर्ज करने की संभावना पर विचार कर रही है। अगर नियामकीय मंजूरी मिलती है तो इस मर्जर के जरिए कंपनी अपने अलग-अलग बिजनेस वर्टिकल को एक प्लेटफॉर्म पर लाना चाहती है। कंपनी का मानना है कि इससे ऑपरेशन का स्केल बढ़ेगा, लागत में सुधार होगा और लंबे समय में कमाई की क्षमता भी मजबूत होगी।
इसके अलावा कंपनी ने अपने बिजनेस को आगे बढ़ाने के लिए कैपेक्स यानी पूंजीगत निवेश बढ़ाने की भी योजना जताई है। कंपनी के मुताबिक यह पूरा कदम उसके लंबे समय के विस्तार, विविधीकरण और टिकाऊ बिजनेस ग्रोथ की रणनीति का हिस्सा है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले समय में कंपनी की यह रणनीति शेयर के प्रदर्शन को कितना सहारा दे पाती है।
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