Source :- LIVE HINDUSTAN
इन शर्तों से साफ है कि ईरान दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक Strait of Hormuz पर अधिक नियंत्रण चाहता है। यह वही मार्ग है जहां से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है, इसलिए यहां किसी भी बदलाव का असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।
पिछले 26 दिनों से जारी ईरान जंग के बीच बीच युद्धविराम (सीजफायर) की चर्चा जोरों पर है लेकिन इसकी राह कठिन होती जा रही है। पाकिस्तान और तुर्की की मध्यस्थता में हो रही इस डील की संभावनाओं पर अब बड़ा सवाल खड़ा हो गया है क्योंकि एक तरफ जहां अमेरिका ने अपनी 15 सूत्रीय शर्तें ईरान के सामने रखी हैं, तो वहीं अब ईरान ने भी बातचीत की किसी भी पहल के लिए इसी तरह की कई कड़ी शर्तें रख दी हैं, जिनसे हालात और जटिल होते दिख रहे हैं।
ईरान की प्रमुख शर्तें क्या हैं?
वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने डोनाल्ड ट्रंप के प्रस्तावित वार्ता संकेतों के जवाब में कई बड़ी मांगें रखी हैं। इसके तहत खाड़ी क्षेत्र में मौजूद सभी अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बंद करना शामिल है। इसके अलावा ईरान पर लगे सभी आर्थिक प्रतिबंध (Sanctions) हटाने, युद्ध के दौरान हुए नुकसान की आर्थिक भरपाई करने, हिज्बुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई रोकने, होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर ईरान को शुल्क वसूलने का अधिकार देने की मांग की गई है। ईरान ने अमेरिका के सामने यह भी शर्त रखी है कि वो यह वादा करे कि भविष्य में ईरान पर कोई सैन्य हमला नहीं करेगा। इसके अलावा यह आश्वासन भी मांगा है कि अमेरिका ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर कोई भी प्रतिबंध नहीं लगाएगा।
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य बना सबसे बड़ा मुद्दा
इन शर्तों से साफ है कि ईरान दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक Strait of Hormuz पर अधिक नियंत्रण चाहता है। यह वही मार्ग है जहां से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है, इसलिए यहां किसी भी बदलाव का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। हालांकि, दोनों पक्षों की तरफ से सार्वजनिक और सख्त बयानबाजी जारी है, लेकिन अंदरखाने कुछ नरमी के संकेत भी सामने आए हैं।
रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ईरान 5 साल तक बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम रोकने पर विचार कर रहा है। इसके अलावा यूरेनियम संवर्धन (enrichment) स्तर कम करने की संभावना, International Atomic Energy Agency (IAEA) को निरीक्षण की अनुमति, क्षेत्रीय संगठनों जैसे हमास, हिजबुल्लाह और अन्य समूहों को समर्थन कम करने पर चर्चा जारी है।
अमेरिका पर तंज: ‘आप खुद से ही बातचीत कर रहे’
इन सबके बीच, ईरानी सैन्य प्रवक्ता इब्राहिम ज़ोलफकारी ने अमेरिका पर कटाक्ष करते हुए कहा है, “अमेरिका खुद से ही बातचीत कर रहा है… हमारे जैसे लोग आप जैसे लोगों के साथ समझौता नहीं कर सकते।” उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि जब तक अमेरिका ईरान की भूमिका को स्वीकार नहीं करता, तब तक अमेरिकी निवेश प्रभावित रहेंगे और ऊर्जा कीमतें सामान्य नहीं होंगी।
क्यों जटिल हो गया है मामला?
इस पूरे घटनाक्रम में दो विरोधाभासी तस्वीरें सामने आ रही हैं। पहली यह कि सार्वजनिक रूप से सख्त और आक्रामक रुख देखने को मिल रहा है, दूसरी यह कि निजी तौर पर संभावित समझौते के संकेत बी मिल रहे हैं। यही कारण है कि विशेषज्ञ इसे “हाई-स्टेक्स गेम” मान रहे हैं, जहां दोनों पक्ष एक-दूसरे की सीमाएं परख रहे हैं। बहरहाल, ईरान की कड़ी शर्तों ने यह साफ कर दिया है कि सीज़फायर की राह आसान नहीं है क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच यह टकराव अब केवल सैन्य संघर्ष नहीं, बल्कि रणनीतिक, आर्थिक और वैश्विक शक्ति संतुलन की लड़ाई बन चुका है।
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