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हील्स से ले कर ‘ब्रा के हुक’ तक! पुरुषों के लिए बनी थीं ये 7 चीजें, आज हैं लेडीज फैशन का हिस्सा

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Source :- LIVE HINDUSTAN

Fashion History: फैशन से जुड़े ऐसे कई आइटम हैं जिनकी शुरुआत तो पुरुषों के लिए हुई थी, लेकिन आज वही चीजें महिलाओं की डेली लाइफ का हिस्सा बन चुकी हैं। आज इन्हें देखते ही महिलाओं का फैशन याद आता है।

फैशन की दुनिया हमेशा बदलती रहती है। कभी कोई चीज ट्रेंड में आ जाती है तो कभी कोई दूसरी चीज लोगों की पसंद बन जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ ऐसी भी चीजें हैं जिनका ट्रेंड तो खत्म नहीं हुआ, लेकिन उन्हें इस्तेमाल करने वाले पूरी तरह बदल गए। जी हां, फैशन से जुड़े ऐसे कई आइटम हैं जिनकी शुरुआत तो पुरुषों के लिए हुई थी, लेकिन आज वही चीजें महिलाओं की डेली लाइफ का हिस्सा बन चुकी हैं। आज इन्हें देखते ही महिलाओं का फैशन याद आता है। चलिए कुछ ऐसी ही चीजों के बारे में जानते हैं, जो भले ही आज लेडीज फैशन का हिस्सा हैं, लेकिन कभी उनका इस्तेमाल जेंट्स किया करते थे।

ब्रा का हुक

आज ब्रा के पीछे लगे छोटे-छोटे हुक महिलाओं के लिए बहुत सामान्य चीज हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यह तकनीक पहले पुरुषों के कपड़ों के लिए बनाई गई थी। मशहूर लेखक मार्क ट्वेन, सस्पेंडर पहनना पसंद नहीं करते थे। उन्हें लगता था कि यह असुविधाजनक होते हैं। इसी वजह से उन्होंने एक ऐसा फास्टनर बनाया जिसे ‘हुक एंड आई’ कहा गया। शुरुआत में इसका इस्तेमाल पुरुषों की शर्ट, अंडरवियर और कॉर्सेट जैसे कपड़ों में हुआ। बाद में यही डिजाइन महिलाओं की ब्रा में इस्तेमाल होने लगा। आज यह ब्रा का सबसे जरूरी हिस्सा है, जबकि पुरुषों को शायद ही इसका इतिहास पता हो।

पुरुषों के लिए बनी थीं हाई हील्स

हाई हील्स को आज महिलाएं स्टाइल और कॉन्फिडेंस से जोड़कर देखती हैं। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि इनकी शुरुआत पहले जेंट्स के लिए हुई थी। 10वीं सदी में फारसी सैनिक घुड़सवारी के दौरान अपने पैरों को मजबूती से टिकाने के लिए हील वाले जूते पहनते थे। 17वीं सदी में यूरोप के अमीर पुरुषों ने इसे स्टाइल के तौर पर अपनाया। इसमें वो लंबे तो दिखते ही थे साथ ही कॉन्फिडेंट भी नजर आते थे। फ्रांस के राजा लुई चौदहवें ने तो 1673 में अपने दरबार के पुरुषों को हाई हील्स तक बांटी थीं ताकि उनका रुतबा दिखे। बाद में महिलाओं ने स्टाइलिश दिखने के लिए हाई हील पहनना करना शुरू किया। समय के साथ पुरुषों ने इसे पहनना छोड़ दिया और यह पूरी तरह महिलाओं का फैशन बन गया।

कभी हैंडबैग भी पुरुषों के फैशन का हिस्सा थे

आज हैंडबैग महिलाओं के फैशन का जरूरी हिस्सा है, लेकिन पुराने समय में इसका इस्तेमाल पुरुष ज्यादा करते थे। उस समय कपड़ों में जेब नहीं होती थी, इसलिए लोग छोटे पाउच या बैग कमर में बांधकर चलते थे। इनमें वे पैसे और जरूरी सामान रखते थे। मॉडर्न हैंडबैग 1900 के आसपास बने जब डिजाइनरों ने पुरुषों के हैंडबैग से प्रेरणा लेकर महिलाओं के लिए नए बैग बनाए। इनमें अलग-अलग कंपार्टमेंट और क्लैस्प लगाए गए ताकि यह ज्यादा उपयोगी बन सकें। धीरे-धीरे पुरुषों ने इनका इस्तेमाल कम कर दिया और हैंडबैग महिलाओं की पहचान बन गया।

जी हां, पहले पुरुषों के लिए है बने थे थोंग

आज थोंग को महिलाओं के अंडरगारमेंट के रूप में जाना जाता है, लेकिन इसका इतिहास हजारों साल पुराना है। माना जाता है कि सबसे शुरुआती थोंग अफ्रीका में लगभग 42,000 साल पहले इस्तेमाल किए गए थे। बाद में प्राचीन मिस्र, ग्रीस और जापान में भी पुरुष इन्हें पहनते थे। इनका मकसद शरीर के निजी हिस्सों को ढकना होता था। 1800 के दशक में यह फिर से सामने आया जब पुरुष एथलीट जॉकस्ट्रैप के रूप में इसका इस्तेमाल करने लगे ताकि खेल के दौरान सुरक्षा मिल सके। मॉडर्न थोंग 1939 में न्यूयॉर्क वर्ल्ड फेयर के दौरान चर्चा में आया जब मेयर ने डांसर्स को शरीर ढकने का आदेश दिया। तब डांसर्स ने थोंग पहनना शुरू किया। इसके बाद यह धीरे-धीरे महिलाओं के फैशन का हिस्सा बन गया।

स्टॉकिंग्स

आज स्टॉकिंग्स महिलाओं के फैशन का हिस्सा हैं, लेकिन 9वीं सदी में इसे जेंट्स पहनते थे। 16वीं से 20वीं सदी के बीच धीरे-धीरे यह ट्रेंड बदला। महिलाओं ने इन्हें पहनना शुरू किया और पुरुषों ने इन्हें छोड़ना शुरू कर दिया। 19वीं सदी तक यह पूरी तरह महिलाओं से जुड़ गया। आज स्टॉकिंग्स, पैंटीहोज और टाइट्स सभी होजरी कैटेगरी में आते हैं, लेकिन अब इन्हें लगभग पूरी तरह महिलाओं के कपड़ों के रूप में देखा जाता है।

पहले पुरुषों से जोड़ा जाता था पिंक रंग

आज पिंक रंग को लड़कियों से जोड़ा जाता है, लेकिन 1900 के शुरुआती समय में लड़के पिंक पहनते थे और लड़कियां नीला पहनती थीं। उस समय पिंक को मजबूत रंग माना जाता था। पहले सभी बच्चे सफेद कपड़े पहनते थे क्योंकि उन्हें साफ करना आसान होता था। बाद में रंगीन कपड़े आने लगे लेकिन कोई तय नियम नहीं था। विश्व युद्ध के बाद धीरे-धीरे बदलाव आया। 1960 के दशक में लोगों की सोच बदली और फिर 1980 के बाद कपड़ों की कंपनियों ने पिंक को लड़कियों के लिए प्रमोट करना शुरू कर दिया। इसके बाद यह धारणा पूरी तरह बदल गई।

डिस्पोजेबल मेंस्ट्रुअल पैड

पहले डिस्पोजेबल पैड नहीं होते थे। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान Kimberly-Clark कंपनी ने cellucotton नाम का मटेरियल बनाया जो घावों से खून सोखने के काम आता था। नर्सों ने देखा कि यह पीरियड्स के दौरान भी उपयोगी है। बाद में 1920 में कंपनी ने इसे कोटेक्स नाम से बेचना शुरू किया। यही पहला डिस्पोजेबल मेंस्ट्रुअल पैड बना।

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