Source :- LIVE HINDUSTAN
पश्चिम एशिया में जारी जंग के बीच ईरान ने अपने अमेरिका के सहयोगी पड़ोसियों को चेतावनी दी है। तेहरान की तरफ से कहा गया कि अगर यह देश हमले से बचना चाहते हैं, तो अपने यहां पर मौजूद अमेरिकियों और अमेरिकी ठिकानों को बाहर निकाल फेंके।
इजरायल और अमेरिका ईरान पर किए गए हमले के बाद शुरू हुआ युद्ध पूरे पश्चिम एशिया को अपने आगोश में लेता हुआ दिख रहा है। हमले का बदला लेने के लिए ईरान ने इस क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और सहयोगियों को जमकर निशाना बनाया है। एयर डिफेंस सिस्टम की वजह से नुकसान कम हुआ है, लेकिन इसके बाद भी सबसे सुरक्षित समझे जाने वाले खाड़ी देश आज असुरक्षा में घिरे हुए हैं। अब ईरान की तरफ से इन खाड़ी देशों को चेतावनी दी गई है कि अगर उन्हें ईरानी मिसाइलों, ड्रोन्स के हमले से बचना है तो उन्हें अपने देश से अमेरिकी नागरिकों को और अमेरिकी सैन्य ठिकानों को हटाना होगा।
तेहरान टाइम्स के हवाले से एक ईरानी सांसद ने कहा, “अगर संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कुवैत, ओमान, कतर, बहरीन, तुर्की और अन्य देशों के नेता ईरानी मिसाइलों के खतरे से बचना चाहते हैं, तो उन्हें अपने क्षेत्र से अमेरिकियों को निकाल देना चाहिए और सभी अमेरिकी सैन्य ठिकानों को पूरी तरह हटाना चाहिए।” ईरान की तरफ से यह चेतावनी ऐसे समय में आई है, जब अमेरिका और इजरायल नए-नए तरीके से ईरान के ऊपर हमला कर रहे हैं। बुधवार को अमेरिकी पनडुब्बी ने हिंद महासागर में मौजूद ईरानी युद्धपोत को पानी में डुबो दिया, इसमें बड़ी संख्या में ईरानी नौसैनिक मारे गए।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि बुधवार को अमेरिका ने श्रीलंका के पास एक ईरानी युद्धपोत पर हमला किया, जिसमें 80 से ज्यादा लोग मारे गए। उन्होंने इस घटना को “समुद्र में किया गया अत्याचार” बताया। उन्होंने कहा कि ईरान का युद्धपोत डेना, जो लगभग 130 क्रू मेंबर के साथ भारतीय नौसेना का मेहमान था, अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में बिना किसी चेतावनी के हमला कर दिया गया।
ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका को इस अत्याचार का बदला चुकाना होगा, जल्दी ही ऐसा दिन आएगा, जब अमेरिका को अपने इस काम के लिए पछतावा होगा। इस घटना के कुछ समय बाद ही ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने दावा किया कि उन्होंने खाड़ी क्षेत्र में एक अमेरिकी तेल टैंकर को निशाना बनाया है, इस हमले के बाद जहाज में आग लग गई। हालांकि, अमेरिका की तरफ से इस पर कोई भी बयान सामने नहीं आया है।
आपको बता दें, अमेरिका और इजरायल के ईरान पर किए गए हमले के बाद शुरू हुई यह जंग अब और भी ज्यादा खूनी रूप लेती जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति की तरफ से कहा गया है कि यह युद्ध लंबा चल सकता है, हालांकि विशेषज्ञों की मानें, तो एक लंबा युद्ध अमेरिका के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है। क्योंकि ईरान लगातार मिसाइलों का उपयोग कर रहा है, अगर लंबे समय तक वह ऐसा कर पाने की क्षमता रखता है. तो फिर इजरायल और खाड़ी देशों के लिए अपने आप को बचा पाना मुश्किल होगा। ईरानी शदीह ड्रोन्स ने पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी मचाई हुई है।
इस युद्ध में ईरान में भी भारी नुकसान होने की खबरें सामने आ रही है। सुप्रीम लीडर खामेनेई के मारे जाने के बाद भी इस्लाकिम गणराज्य की सरकार ने घुटने टेकने से इनकार कर दिया था। इसके बाद अमेरिका और इजरायल ने मिलकर और तेज हमले किए। ईरान के फाउंडेशन ऑफ मार्टियर्स एंड वेटरन्स अफेयर्स के मुताबिक इस युद्ध में अब तक कम से कम 1230 लोगों की मौत हो चुकी है।
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