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ईरान अब होर्मुज से तेल टैंकरों को गुजरने देने के लिए शिपिंग कंपनियों से क्रिप्टोकरेंसी में टोल वसूलने की योजना बना रहा है। इससे पहले दावा किया गया था कि ईरान ने युद्ध के दौरान होर्मुज से निकलने वाले जहाजों के ऊपर भी टैक्स लगाया था।
Hormuz Strait: पश्चिम एशिया में जारी संकट अब धीरे-धीरे समाप्ति की तरफ जाता दिख रहा है। लेकिन इस युद्ध ने दुनिया के सामने होर्मुज के रूप में एक बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। दुनिया की 20 फीसदी ऊर्जा का परिवहन करने वाला होर्मुज स्ट्रेट अब जहाजों के लिए फ्री रहेगा या नहीं इस बात पर सवालिया निशान लगा हुआ है। तेहरान, इस युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई के लिए होर्मुज पर टैक्स लगाने की तैयारी कर रहा है। अमेरिका के साथ दस सूत्रीय सीजफायर समझौते में भी उसने इस शर्त का जिक्र किया है। यहां तक कि गुरुवार को ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने भी इस होर्मुज को लेकर नई प्रणाली अपनाने की बता कही थी। ईरान की तरफ से जारी किए गए इन बयानों ने शिपिंग सेक्टर की सांसे बढ़ा दी हैं। खाड़ी देशों की तरफ से भी ईरान के इस फैसले पर सवाल उठाए गए हैं।
28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका के ईरान पर किए गए हमले के पहले यह समुद्री रास्ता सुरक्षित और मुफ्त था। ईरान भी इसे एक प्राकृतिक रास्ता मानते हुए इस पर कोई टैक्स सिस्टम नहीं लगा रहा था। लेकिन अब पांच हफ्ते चले इस युद्ध ने पूरी कहानी बदल दी है। ईरान अब इस पर टैक्स लगाने के लिए उत्सुक नजर आ रहा है। यहां तक कि उसने अपने इस प्लान में होर्मुज के दूसरी तरफ वाले देश ओमान को भी शामिल करने की पेशकश की है। ईरान कि तरफ से कहा गया है कि ईरान और ओमान होर्मुज पर टैक्स लगातार इससे आने वाली धनराशि को आपस में बांटेंगे। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम ग़रीबाबदी ने पिछले सप्ताह कहा था कि तेहरान ओमान के साथ एक प्रोटोकॉल का मसौदा तैयार कर रहा है, जिसके तहत होर्मुज से गुजरने के लिए जहाजों को परमिट और लाइसेंस प्राप्त करना अनिवार्य होगा। उन्होंने कहा कि इस कदम का उद्देश्य होर्मुज से जहाजों के रास्ते को प्रतिबंधित करने के बजाय सुगम बनाना है। हालांकि, ओमान ने बाद में इस प्रस्ताव को खारिज करते हुए कहा कि ऐसी कोई योजना नहीं है।
स्वेज पर टैक्स, होर्मुज पर क्यों नहीं
ईरान, अमेरिका पर जबरदस्ती युद्ध थोपने का आरोप लगाकर भले ही होर्मुज पर टैक्स लगाने की कोशिश कर रहा हो, लेकिन दुनिया के तमाम देशों को उसका यह व्यवहार पसंद नहीं आ रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के मुताबिक, किसी भी स्ट्रेट के आसपास मौजूद देश, जहाजों से केवल उस क्षेत्र से गुजरने के लिए टैक्स की मांग नहीं कर सकते हैं। हालांकि, वे विशिष्ट सेवाओं जैसे कि पायलटिंग, टगिंग या बंदरगाह सेवाओं के लिए जहाजों पर सीमित शुल्क लगा सकते हैं, लेकिन किसी विशेष देश के जहाजों पर ये शुल्क अधिक नहीं लगाए जा सकते।
अब सवाल यह है कि आखिर स्वेज और पनामा नहर के ऊपर मिस्त्र और पनामा टैक्स लगा सकते हैं, तो फिर होर्मुज के ऊपर ईरान क्यों नहीं लगा सकता है? इसका सीधा सा जवाब है कि स्वेज और पनामा नहरें मानव निर्मित हैं, जबकि होर्मुज प्राकृतिक रूप से बना हुआ है। ऐसे में उसके ऊपर से किसी भी प्रकार का टैक्स नहीं लगाया जा सकता है। दुनिया में ऐसे कई उदाहरण हैं, जिन पर कोई टैक्स नहीं लगाया जाता है। इस युद्ध के पहले ईरान भी इसी पद्धति का पालन करते हुए होर्मुज पर कोई प्रतिबंध या टैक्स नहीं लगाता था। लेकिन युद्ध के बाद उसे अमेरिका और दुनिया पर दबाव बनाने की नस का पता चल गया है।
ईरान की टैक्स वाली मांग का खाड़ी देश भी कर रहे विरोध
होर्मुज पर अगर ईरान टैक्स लगाता है, तो इसका सबसे ज्यादा असर खाड़ी देशों पर पड़ सकता है। खाड़ी के तमाम देश इसका विरोध भी कर रहे है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त अरब अमीरात ने कहा कि जलमार्ग को “किसी भी देश द्वारा बंधक नहीं बनाया जा सकता” और किसी भी युद्ध समझौते में स्वतंत्र नौवहन अनिवार्य होना चाहिए।”
कतर के विदेश मंत्रालय ने कहा कि क्षेत्र के सभी देशों को होर्मुज का स्वतंत्र रूप से उपयोग करने का अधिकार है और भविष्य के वित्तीय तंत्रों के बारे में कोई भी चर्चा होर्मुज के पुनः खुलने के बाद ही होनी चाहिए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी मांग की है कि ईरान के साथ किसी भी शांति समझौते में होर्मुज से तेल का निर्बाध आवागमन अनिवार्य होना चाहिए। हालांकि, यह देखते हुए कि इजराइल और संयुक्त राज्य अमेरिका पहले ही कई हफ्तों से ईरान पर बमबारी कर रहे हैं, यह कहना मुश्किल है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय उसे होर्मुज स्ट्रेट से निर्बाध आवागमन की अनुमति देने के लिए क्या कर सकता है।
अभी तक टैक्स के मुद्दे पर ईरान ने क्या किया?
28 फरवरी को ईरान पर हुए हमले के बाद ईरानी सेना ने होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर हमला करना शुरू कर दिया था। इसकी वजह से जहाजों ने इस रास्ते से गुजरना बंद कर दिया। बाद में कुछ-कुछ जहाज ईरान से गुजरने की इजाजत लेकर यहां से निकलने लगे। कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ईरान ने इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से करीब 20 लाख डॉलर का टैक्स लिया है। हालांकि, अभी तक इन दावों की पुष्टि नहीं हुई है। दावा किया गया है कि ईरान अब होर्मुज से अपने तेल टैंकरों को गुजरने देने के लिए शिपिंग कंपनियों से क्रिप्टोकरेंसी में टोल वसूलने की योजना बना रहा है। फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह टोल कथित तौर पर तेल के प्रति बैरल 1 डॉलर है।
अमेरिका और इजरायल ने तेहरान पर हमला करके, जिस रिजीम चेंज की कोशिश की थी, वह फैसला पूरी दुनिया पर भारी पड़ता हुआ नजर आ रहा है। ईरान ने न सिर्फ इन दोनों देशों का जमकर सामना किया, बल्कि होर्मुज को बंद करके पूरी दुनिया को उलझन में डाल दिया है। युद्ध के पहले अपने नाटो सदस्य देशों को नाराज करके बैठे ट्रंप इस पूरे युद्ध के दौरान यूरोपीय देशों को कायर कहते नजर आए। लेकिन कोई भी देश उनकी मदद के लिए नहीं आया। अब अगर इस रास्ते को सैन्य अभियान के जरिए ईरान के चंगुल से छुड़ाने का प्रयास किया जाता है, तो वह जंग बहुत ही ज्यादा खूनी होगी।
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