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https://www.livehindustan.com/lh-img/smart/img/2026/03/09/1200x900/Spider_Man_Movie_Kissa_1773073905394_1773073910140.jpgSpider Man Movie: हॉलीवुड फिल्मों में तकनीक का इतना शानदार इस्तेमाल किया जाता है कि गड़बड़ होने का चांस ही नहीं रहता। फिर मार्केट में इस फिल्म का यह वर्जन कैसे मौजूद है जिसमें कई गलतियां साफ नजर आती हैं।
आपने साल 2002 वाली ‘स्पाइडर-मैन’ तो कई बार देखी होगी, लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि फिल्म के एक वर्जन में बूम माइक और क्रू मेंबर्स के हाथ तक दिखाई दे जाते हैं? दरअसल यह फिल्म का वह हिस्सा है जिसे दर्शकों को कभी नहीं दिखाया जाना था। तकनीकी भाषा में इसे ‘ओपन मैट’ कहा जाता है। यह कोई ऑफिशियल रिलीज नहीं है, बल्कि फिल्म का वह अनऑफिशियल वर्जन है जो शूटिंग के दौरान की उन गलतियों को भी दिखा देता है जिन्हें पोस्ट-प्रोडक्शन और सिनेमाघरों में छिपा दिया जाता है। यह असली फिल्म का ही हिस्सा है जो बाद में कई बार आसानी से उपलब्ध हो जाता है।
कैसे छिप जाती हैं शूटिंग की ये गलतियां?
अब सवाल यह है कि ये गलतियां स्क्रीन पर आती कैसे हैं? स्पाइडर-मैन को ’35mm स्टॉक’ पर शूट किया गया था। जब फिल्में शूट होती हैं, तो कैमरा रील के पूरे हिस्से पर इमेज कैप्चर करता है। लेकिन जब यही रील सिनेमाघरों के प्रोजेक्टर पर चलाई जाती है, तो प्रोजेक्टर के सामने एक फिजिकल मेटल प्लेट रखी जाती है। यह प्लेट रील के ऊपरी और निचले हिस्से को काट देती है। इसी वजह से हमें वो ‘सिनेमैटिक फील’ मिलता है और ऊपर-नीचे मौजूद बूम माइक या क्रू जैसी गलतियां छिप जाती हैं जो एक तरह से BTS का हिस्सा होती हैं।
असली खेल तब शुरू होता है जब फिल्म..
सिनेमाघरों में तो यह वर्जन परफेक्ट दिखता है, लेकिन असली खेल तब शुरू होता है जब फिल्म के स्टॉक फुटेज किसी तरह फैंस के हाथ लग जाते हैं। फिल्म के दीवाने इन फुटेज की मदद से खुद ही ‘ओपन मैट’ वर्जन तैयार कर लेते हैं। फैंस ऐसा इसलिए करते हैं क्योंकि थियेटर्स में जो ओरिजिनल कलर्स और डिटेल्स दिखती हैं, वे अक्सर डिजिटल रिलीज में वैसी नहीं रह जातीं। कई बार जब आप डिजिटली वही फिल्म देखते हैं, तो कलर्स थोड़े फीके नजर आते हैं। इसलिए फिल्म के असली रंगों और विजुअल्स को अनुभव करने के लिए फैंस इन अनऑफिशियल वर्जन को मेहनत करके बनाते हैं।
अन्य कई फिल्मों के भी मौजूद हैं ऐसे वर्जन
स्पाइडर-मैन इकलौती ऐसी फिल्म नहीं है, बल्कि दुनिया की कई आइकॉनिक फिल्मों के साथ ऐसा हो चुका है जिनके ओपन मैट वर्जन इंटरनेट पर उपलब्ध हैं। आज के दौर में फिल्म लवर्स खुद ही ऐसी एडिटिंग और तकनीकी बारीकियों पर काम करते हैं। हालांकि ये वर्जन आधिकारिक तौर पर थियेटर्स में नहीं दिखाए जाते, लेकिन ये हमें यह समझने में मदद करते हैं कि एक फिल्म को पर्दे पर जादुई दिखाने के लिए बैकग्राउंड में कितनी चीजों को बड़ी सफाई से फ्रेम से बाहर रखा जाता है। बता दें कि साल 2002 में आई यह फिल्म स्पाइडर मैन सीरीज की सबसे शानदार फिल्मों में गिनी जाती है।
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