Home  लाइफस्टाइल समाचार स्तन में दर्द: जानें मास्टाल्जिया कब है सामान्य और कब देता है...

स्तन में दर्द: जानें मास्टाल्जिया कब है सामान्य और कब देता है खतरे का संकेत

13
0

Source :- LIVE HINDUSTAN

हर ब्रेस्ट पेन खतरे की घंटी नहीं होता है और ना हर गांठ को नजरअंदाज करना सही होता है। ऐसे में अपने शरीर की भाषा को समझकर यह जानना कि कब आपको बस थोड़ा आराम चाहिए और कब डॉक्टर का परामर्श, आपकी सेहत और मानसिक शांति के लिए सबसे जरूरी कदम है।

स्तन में होने वाला दर्द या भारीपन अक्सर मन में कई तरह की शंकाएं और घबराहट पैदा कर देता है। कभी यह सिर्फ पीरियड्स से पहले होने वाली एक सामान्य बात लगती है, तो कभी किसी गंभीर रोग की तरफ शरीर का इशारा। लेकिन सच तो यह है कि ना तो हर दर्द खतरे की घंटी होता है और ना हर गांठ को नजरअंदाज करना सही होता है। ऐसे में अपने शरीर की भाषा को समझकर यह जानना कि कब आपको बस थोड़ा आराम चाहिए और कब डॉक्टर का परामर्श, आपकी सेहत और मानसिक शांति के लिए सबसे जरूरी कदम है।

मास्टाल्जिया

सीके बिड़ला हॉस्पिटल (गुरुग्राम) के एसोसिएट डायरेक्टर -द ब्रेस्ट सेंटर डॉ. रोहन खंडेलवाल कहते हैं कि ब्रेस्ट में दर्द, जिसे मेडिकल भाषा में मास्टाल्जिया कहा जाता है, हर उम्र की महिलाओं में एक आम समस्या है। अक्सर लोग इसे किसी गंभीर बीमारी से जोड़कर डर जाते हैं, जबकि ज्यादातर मामलों में ब्रेस्ट का दर्द अस्थायी और गैर-कैंसरयुक्त कारणों से होता है। यह समझना जरूरी है कि कौन-सा दर्द शरीर के सामान्य बदलावों की वजह से है और कब डॉक्टर को दिखाना चाहिए ताकि बेवजह की चिंता भी न हो और जरूरत पड़ने पर समय पर इलाज भी मिल सके।

साइक्लिकल मास्टाल्जिया

साइक्लिकल मास्टाल्जिया, ब्रेस्ट दर्द का सबसे आम प्रकार है। यह दर्द सीधे तौर पर पीरियड्स के दौरान होने वाले हार्मोनल बदलावों से जुड़ा होता है। आमतौर पर यह दर्द पीरियड्स आने से कुछ दिन पहले शुरू होता है और पीरियड्स शुरू होते ही अपने-आप कम हो जाता है। इसमें ब्रेस्ट में भारीपन, कोमलता या हल्का-सा लगातार दर्द महसूस हो सकता है। यह दर्द अक्सर दोनों ब्रेस्ट में होता है, खासकर ऊपर और बाहरी हिस्से में। इस तरह का दर्द सामान्य माना जाता है और यह किशोरियों, युवा महिलाओं और पेरिमेनोपॉज के दौर में ज्यादा देखा जाता है, क्योंकि इन चरणों में हार्मोनल बदलाव तेज होते हैं।

नॉन-साइक्लिकल ब्रेस्ट पेन

नॉन-साइक्लिकल ब्रेस्ट पेन (Non-Cyclical Breast Pain) का पीरियड्स से कोई तय संबंध नहीं होता। यह दर्द एक ही ब्रेस्ट में या ब्रेस्ट के किसी खास हिस्से में हो सकता है और यह चुभने वाला, जलन जैसा या लगातार बना रहने वाला हो सकता है। ज्यादातर मामलों में यह भी कैंसर रहित होता है, लेकिन इस पर थोड़ा ज्यादा ध्यान देना जरूरी होता है। इसके पीछे सिस्ट, फाइब्रोएडेनोमा, इंफेक्शन, सूजन या ब्रेस्ट पर लगी चोट जैसी वजहें हो सकती हैं। इसके अलावा, सही फिट न होने वाली ब्रा, ज्यादा तेज एक्सरसाइज या वजन में बदलाव भी ब्रेस्ट को सहारा देने वाले लिगामेंट्स पर दबाव डालकर दर्द पैदा कर सकते हैं।

हर दर्द ब्रेस्ट की वजह से नहीं होता

यह भी समझना जरूरी है कि हर बार महसूस होने वाला ब्रेस्ट पेन असल में ब्रेस्ट की वजह से नहीं होता है। कई बार मांसपेशियों का दर्द, पसलियों में सूजन, नसों का दर्द या चेस्ट वॉल से जुड़ी समस्याएं भी ब्रेस्ट दर्द जैसा एहसास करवा सकती हैं। इसके अलावा, तनाव और चिंता भी दर्द के प्रति संवेदनशीलता बढ़ा देती हैं, जिससे हल्का-सा दर्द भी ज्यादा महसूस होने लगता है।

किन स्थितियों में स्तन के दर्द को नजरअंदाज ना करें

कुछ स्थितियों में ब्रेस्ट पेन को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसके विपरीत डॉक्टर को जरूर दिखाना चाहिए। उदाहरण के लिए अगर दर्द किसी एक ही जगह सीमित हो, धीरे-धीरे बढ़ रहा हो या लंबे समय तक बना रहे। अगर दर्द के साथ नई गांठ महसूस हो, त्वचा में बदलाव आएं, निप्पल से डिस्चार्ज हो, लालिमा या गर्माहट हो तो जांच जरूरी है। ऐसा दर्द जो रोजमर्रा के काम या नींद को प्रभावित करने लगे फिर चाहे उसमें गांठ महसूस न हो, वह भी डॉक्टर से सलाह लेने की वजह है।

कैसे करवाएं ब्रेस्ट की जांच

ब्रेस्ट दर्द की जांच आमतौर पर एक अच्छे क्लिनिकल चेकअप और मेडिकल हिस्ट्री से शुरू होती है। उम्र और लक्षणों के आधार पर जांच तय की जाती है, जिसमें कम उम्र की महिलाओं के लिए अल्ट्रासाउंड को प्राथमिकता दी जाती है। कई बार इस दर्द से राहत पाने के लिए सिर्फ भरोसा दिलाना, लाइफस्टाइल में छोटे बदलाव, सही सपोर्ट वाली ब्रा पहनना या साधारण पेन मैनेजमेंट ही काफी होता है।

डॉक्टरी सलाह- ब्रेस्ट दर्द को लेकर सही जानकारी डर को समझदारी भरे एक्शन में बदल सकती है। हार्मोनल बदलावों के सामान्य पैटर्न को समझना, अपने शरीर के संकेतों पर ध्यान देना और जब पैटर्न बदले तो जांच करवाना ये सब बड़े खतरे को टालने के लिए बेहद जरूरी है। भले ही ब्रेस्ट दर्द अक्सर कैंसर का लक्षण न हो, लेकिन शरीर की बात सुनना हमें उन समस्याओं को समय रहते पहचानने में मदद करता है जिन पर ध्यान देना जरूरी होता है। मकसद डरना नहीं, बल्कि अपनी ब्रेस्ट हेल्थ को लेकर सतर्क और जागरूक रहना है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN