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अमेरिका ने बताया है कि ईरान के साथ 10 दिनों के संघर्ष में लगभग 140 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं। पेंटागन के प्रवक्ता ने बताया ह कि आठ अमेरिकी सैन्यकर्मी इस समय गंभीर रूप से घायल हैं।
US Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ी जंग के बीच दुनिया का सबसे प्रमुख जलमार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज युद्ध का अखाड़ा बन गया है। अमेरिकी सेना ने बुधवार को कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट के पास 16 ईरानी जहाजों को तबाह कर दिया गया है। दावा किया गया है कि यह पोत समुद्री मार्ग में बारूदी सुरंगे बिछा रही थीं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने एक बयान में कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे लेकर ईरान को पहले ही चेतावनी दी थी, जिसके बाद यह एक्शन लिया गया है।
वहीं डोनाल्ड ट्रंप ने इस बीच दावा किया कि अमेरिका ने 10 इनैक्टिव जहाजों को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया है। ट्रंप ने आरोप लगाए कि ईरान ने पानी के रास्ते में माइन बिछाना शुरू कर दिया है, जो तेल की आपूर्ति के लिए एक अहम रास्ता है। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में लिखा, “अगर ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में माइन बिछाई है, तो हम चाहते हैं कि उन्हें तुरंत हटा दिया जाए!” उन्होंने कहा कि अगर तेहरान ऐसा नहीं करता है तो उसे गंभीर नतीजों का सामना करना पड़ेगा।
वहीं ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका ईरानी जहाजों को मारने के लिए उसी तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है, जिसकी मदद से ड्रग तस्करों को मारा गया था। इससे पहले पेंटागन ने भी इसी तरह के संकेत दिए थे। मंगलवार को पेंटागन ने कहा था कि वह ईरान के जहाजों और बंकरों पर हमला कर रहा है। अमेरिकी सेना ने इस हमले का एक खोफनाक वीडियो भी शेयर किया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना अखाड़ा
गौरतलब है कि 10 मार्च तक होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग में वाणिज्यिक यातायात लगभग पूरी तरह से ठप हो गया है। हालांकि औपचारिक रूप से इसे बंद करने की कोई घोषणा नहीं की गई है, लेकिन अत्यधिक जोखिमों के कारण बीमा कंपनियों द्वारा बीमा रद्द करने के कारण इस मार्ग पर यातायात प्रभावी रूप से बंद हो गया है। मार्सक, सीएमए सीजीएम और हैपग-लॉयड जैसी प्रमुख परिवहन कंपनियों ने इस मार्ग से आवाजाही को स्थगित कर दिया है और जहाजों को ‘केप ऑफ गुड होप’ के रास्ते भेज रहे हैं। युद्ध शुरू होने के बाद से ही ड्रोन और मिसाइल हमलों में कम से कम आठ नाविक मारे गये हैं और कई टैंकर क्षतिग्रस्त हुए हैं।
तेल की कीमतें आसमान में
प्रमुख जलमार्ग पर नाकाबंदी के कारण कच्चे तेल की कीमतें 9 मार्च को 120 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल तक बढ़ गईं। हालांकि यह फिलहाल घटकर लगभग 88-90 डॉलर पर आ गईं। बता दें कि वैश्विक तेल खपत का लगभग 20 प्रतिशत (पांचवां हिस्सा) इस जल क्षेत्र से होकर गुजरता है। अमेरिकी ऊर्जा प्रशासन के अनुसार, इस जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कच्चे तेल का लगभग 84-89 प्रतिशत और एलएनजी का 83 प्रतिशत हिस्सा एशिया के लिए होता है। वहीं भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया में उर्जा आपूर्ति के लिए यह जलमार्ग काफी महत्वपूर्ण है।
जयशंकर ने की अराघची से बातचीत
इस बीच पश्चिम एशिया संकट, विशेष रूप से ऊर्जा आपूर्ति पर बढ़ते असर को लेकर भारत के विदेश देश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार को अपने ईरानी समकक्ष सैयद अब्बास अराघची से फोन पर बातचीत की है। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर संयुक्त सैन्य हमले शुरू करने के बाद से जयशंकर ने तीसरी बार अराघची से बात की। जयशंकर ने अराघची को ईरान और क्षेत्र में हो रहे घटनाक्रम पर भारत की गहरी चिंता से अवगत कराया।
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