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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज तुरंत खोल दो, ईरान के खिलाफ 22 देश हो गए एकजुट; क्या अब टल जाएगा संकट

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Source :- LIVE HINDUSTAN

इन 22 देशों ने साफ तौर पर कहा कि वे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने के लिए प्रयासों में योगदान देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने उन देशों की प्रतिबद्धता का स्वागत किया है जो पहले से ही तैयारी की योजना बना रहे हैं। 

ईरान की ओर से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने की 22 देशों ने मिलकर कड़ी निंदा की है। इनमें ज्यादातर यूरोपीय देश शामिल हैं, साथ ही संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और बहरीन जैसे खाड़ी देश भी हैं। बयान में कहा गया कि ईरान ने निहत्थे कमर्शियल जहाजों पर हमले किए, नागरिक बुनियादी ढांचे जैसे तेल व गैस को निशाना बनाया और ईरानी बलों की ओर से जलडमरूमध्य की वास्तविक बंदी कर दी गई है। इन देशों ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताते हुए ईरान से तत्काल अपनी धमकियां, माइंस बिछाना, ड्रोन और मिसाइल हमले व अन्य कार्रवाइयां बंद करने की मांग की है, जो जहाजों को रोक रही हैं। हॉर्मुज स्ट्रेट दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस व्यापार का अहम मार्ग है। इसकी बंदी से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर गहरा असर पड़ रहा है।

इस बीच, अमेरिका ने ईरान के साथ युद्ध शुरू होने से अब तक 8 हजार से अधिक मिलिट्री टारगेट्स पर हमले किए हैं, जिसमें 130 ईरानी जहाज शामिल हैं। यूएस सेंट्रल कमांड के एडमिरल ब्रैड कूपर ने एक्स पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में कहा, ‘अभी तक हमने ईरान में 8,000 से अधिक सैन्य लक्ष्यों पर हमले किए हैं, जिसमें 130 ईरानी जहाज शामिल हैं, जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद तीन सप्ताह की अवधि में किसी नौसेना के सबसे बड़े विनाश का मामला है।’ उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की लड़ाकू क्षमता लगातार कम हो रही है क्योंकि अमेरिकी हमले तेज हो रहे हैं।

वहीं, 22 देशों ने साफ तौर पर कहा कि वे होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने के लिए प्रयासों में योगदान देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने उन देशों की प्रतिबद्धता का स्वागत किया है जो पहले से ही तैयारी की योजना बना रहे हैं। बयान में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की गई है कि वे मिलकर इस संकट का समाधान निकालें ताकि वैश्विक ऊर्जा बाजार स्थिर रहें। इन देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का हवाला देते हुए ईरान से स्वतंत्र नौवहन के सिद्धांत का पालन करने को कहा है। यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तनाव चरम पर है और कई जहाज खाड़ी क्षेत्र में फंसे हुए हैं।

कौन-कौन देश आए साथ

यह संयुक्त बयान ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड्स, जापान, कनाडा, दक्षिण कोरिया, न्यूजीलैंड, डेनमार्क, लातविया, स्लोवेनिया, एस्टोनिया, नॉर्वे, स्वीडन, फिनलैंड, चेकिया, रोमानिया, बहरीन और लिथुआनिया जैसे देशों की ओर से जारी किया गया है। शुरुआत में कुछ प्रमुख देशों की ओर से शुरू किए गए इस बयान में बाद में अन्य राष्ट्र शामिल हो गए, जिससे यह संख्या 22 तक पहुंच गई। इन देशों ने ईरान की कार्रवाइयों को अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए खतरा बताया है। उन्होंने ऊर्जा बाजार को स्थिर करने के लिए अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) की रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार जारी करने की सराहना की और आगे के कदम उठाने का वादा किया।

विशेषज्ञों का मानना है कि हॉर्मुज स्ट्रेट की यह स्थिति वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती है। तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिससे कई देशों में ईंधन महंगा हो गया है। ईरान ने दावा किया है कि जलडमरूमध्य केवल दुश्मन जहाजों के लिए बंद है, लेकिन वाणिज्यिक जहाजरानी लगभग ठप हो चुकी है। इन 22 देशों का यह कदम अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एकजुट करने की दिशा में बेहद अहम है, हालांकि अभी सैन्य हस्तक्षेप की कोई स्पष्ट योजना नहीं बताई गई है। स्थिति पर नजर रखी जा रही है और आगे के प्रयासों से उम्मीद है कि जल्द ही सुरक्षित नौवहन बहाल हो सकेगा।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN