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रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपने रिटेल आउटलेट्स पर फ्यूल की अधिक खरीद पर रोक लगा दी है। ब्लूमवर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक ग्राहकों को रिटेल आउटलेट्स से 11 डॉलर (लगभग 1000 रुपये) तक का पेट्रोल या डीजल खरीदने की ही इजाजत है।
मिडिल ईस्ट में चल रहे संकट की वजह से दुनिया के कई देशों के फ्यूल सप्लाई पर असर पड़ा है। भारत में भी फ्यूल का संकट देखने को मिल रहा है। अब इस माहौल के बीच मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने अपने रिटेल आउटलेट्स पर फ्यूल की अधिक खरीद पर रोक लगा दी है। हालांकि, कंपनी ने कोई औपचारिक निर्देश जारी नहीं किया है।
सिर्फ 1000 रुपये की खरीदारी
ब्लूमबर्ग की एक खबर में बताया गया है कि ग्राहकों को रिटेल आउटलेट्स से $11 (लगभग 1000 रुपये) तक का पेट्रोल या डीजल खरीदने की ही इजाजत है। इस मामले से जुड़े लोगों के मुताबिक मुकेश अंबानी की रिलायंस ने अपने पार्टनर BP Plc के साथ मिलकर चलाए जा रहे फ्यूल स्टेशनों पर, हर बार आने पर एक व्यक्ति को सिर्फ 1,000 रुपये तक की ही खरीद करने की इजाजत दे रही है। बता दें कि इस जॉइंट वेंचर के पूरे देश में 2,000 से अधिक फ्यूल पंप हैं।
फ्यूल पंप ऑपरेटर्स का फैसला?
एक सूत्र ने बताया कि Jio-BP पंप के ऑपरेटरों ने घबराहट में खरीदारी को रोकने और मांग में अचानक आई तेजी के कारण फ्यूल की सीमा तय करना शुरू कर दिया है। रिलायंस के एक प्रवक्ता ने कहा कि ऐसा कोई निर्देश नहीं है जो ग्राहकों द्वारा खरीदे जा सकने वाले फ्यूल की मात्रा को सीमित करता हो लेकिन उन्होंने यह भी माना कि ऐसी घटनाएं किसी स्थानीय स्थिति का परिणाम हो सकती हैं। जियो-बीपी पहला ऑपरेटर है जिसने सिर्फ कीमतें बढ़ाने के बजाय सप्लाई की लिमिट तय कर रही है। यह भारत के एनर्जी मार्केट में फैल रही अनिश्चितता के बढ़ने का संकेत है।
बता दें कि मार्च के महीने में निजी क्षेत्र की कंपनी नायरा एनर्जी ने लागत बढ़ने के कारण पेट्रोल की कीमतों में पांच रुपये और डीजल में तीन रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की थी। नायरा के पंपों पर अब पेट्रोल 100.71 रुपये और डीजल 91.31 रुपये प्रति लीटर है।
दुनिया का तीसरा बड़ा उपभोक्ता
दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता देश भारत, होर्मुज जलडमरूमध्य के हफ्तों तक लगभग बंद रहने के कारण परेशानी झेल रहा है। यह जलडमरूमध्य कच्चे तेल, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस की ग्लोबल शिपमेंट के लिए एक अहम मार्ग है। जंग की वजह से ईरान ने इसकी सप्लाई को रोक रखा था। हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच एक सीजफायर जरूर हुआ है लेकिन टैंकरों की आवाजाही बाधित है।
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