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सरकार ने IDBI बैंक को लेकर बदला मन, जानें क्यों दोबारा शुरू करनी पड़ रही प्राइवेटाइजेशन की पूरी प्रक्रिया?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

IDBI Bank News: सरकार ने IDBI बैंक के प्राइवेटाइजेशन की पूरी प्रक्रिया को फिर से शुरू करने का मन बना लिया है। करीब पांच सालों से IDBI बैंक में हिस्सेदारी बेचने की कोशिश में जुटी सरकार अब पूरी प्रक्रिया की बारीकी से समीक्षा करेगी।

सरकार ने IDBI बैंक के प्राइवेटाइजेशन की पूरी प्रक्रिया को फिर से शुरू करने का मन बना लिया है। दरअसल, पिछले हफ्ते मिले वित्तीय बोलियों के आंकड़े सरकार द्वारा तय किए गए रिजर्व प्राइस से काफी कम थे, जिसके चलते यह प्रक्रिया रोक दी गई थी। ईटी ने सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि अब इस मामले को विनिवेश से जुड़ी एक अहम मंत्री समूह की बैठक में रखा जाएगा, जहां इस पर अंतिम मुहर लगाई जाएगी। शुरुआती चर्चाओं में यही राय बनती दिख रही है कि प्रक्रिया को दोबारा शुरू कर आगे बढ़ना चाहिए।

पांच साल से हिस्सेदारी बेचने की कोशिश में जुटी सरकार

करीब पांच सालों से IDBI बैंक में हिस्सेदारी बेचने की कोशिश में जुटी सरकार अब पूरी प्रक्रिया की बारीकी से समीक्षा करेगी। खासतौर पर उस तंत्र की जांच होगी, जिसके तहत IDBI बैंक के लिए रिजर्व प्राइस तय किया गया था। जानकारों का कहना है कि सीमित सार्वजनिक हिस्सेदारी वाले बैंकों के लिए स्टॉक प्राइस के आधार पर रिजर्व प्राइस तय करना सही नहीं है, क्योंकि इससे बाजार में हेरफेर का खतरा बना रहता है।

बैंक के शेयर की कीमत में करीब 19% की गिरावट

फिलहाल सरकार के पास IDBI बैंक में 45.48% हिस्सेदारी है, जबकि LIC के पास 49.24% हिस्सा है। बाकी बचा करीब 5% हिस्सा आम जनता के पास है। वित्तीय बोलियां रद्द होने के बाद से बैंक के शेयर की कीमत में करीब 19% की गिरावट आई है। मंगलवार को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर यह 74.28 रुपये पर बंद हुआ, जो इसके 52 हफ्तों के निचले स्तर 72 रुपये के करीब है। बता दें कि प्रेम वत्सा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल और अमीरात के एमिरेट्स एनबीडी ने ही इस प्रक्रिया में वित्तीय बोलियां दाखिल की थीं।

पुराने बोलीदाताओं को मिलेगी छूट?

एक अधिकारी ने बताया कि भले ही यह प्रक्रिया नए सिरे से शुरू हो रही है, लेकिन अगर पुराने बोलीदाता दोबारा बोली लगाना चाहते हैं, तो उन्हें एजेंसियों और रेगुलेटर से दोबारा मंजूरी लेने की जरूरत नहीं होगी। इससे प्रक्रिया में और देरी नहीं होगी। हालांकि, अगर कोई नया बोलीदाता आता है, तो उसके दस्तावेजों की नियमों के मुताबिक फिर से जांच की जाएगी। अधिकारी ने यह भी साफ किया कि IDBI बैंक को किसी दूसरे सरकारी बैंक में मिलाने की कोई योजना नहीं है।

RBI की मंजूरी और आगे की राह

इस बार भी वही प्रक्रिया अपनाई जाएगी, जो पिछली बार थी। सफल बोलीदाता को RBI के ‘फिट एंड प्रॉपर’ मापदंडों पर खरा उतरना होगा, जिसके बाद ही उसे अंतिम मंजूरी मिलेगी। इसके अलावा, प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) सहित कई दूसरे नियामकों और सांविधिक संस्थानों से भी मंजूरी लेनी होगी। साथ ही, IDBI बैंक के छोटे निवेशकों (माइनॉरिटी शेयरहोल्डर्स) को अपने शेयर बेचने का ऑफर देना (ओपन ऑफर) भी सफल बोलीदाता के लिए जरूरी होगा।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN