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सच्चाई से डर गया अमेरिका? ईरान युद्ध की सैटेलाइट तस्वीरें जारी करने पर लगाई रोक

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Source :- LIVE HINDUSTAN

ईरान में बढ़ते संघर्ष के बीच ट्रंप सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार ने ईरान के कुछ महत्वपूर्ण हिस्सों की सैटेलाइट तस्वीरें जारी करने पर रोक लगा दी है। इस खबर पर अभी तक ट्रंप प्रशासन की तरफ से कोई रिएक्शन नहीं आया है।

पश्चिम एशिया में जारी जंग संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए नाक का सवाल बनती जा रही है। इस भीषण जंग के बीच ट्रंप प्रशासन ने कथित तौर पर सैटेलाइट तस्वीरें जारी करने वाले प्रतिष्ठानों पर रोक लगाने की कोशिश की है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सरकार ने उपग्रह चित्र प्रदाताओं से कुछ विशेष क्षेत्रों के चित्र जारी न करने का आग्रह किया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, प्लानेट लैब्स पीबीसी ने अमेरिकी सेना के महत्व वाले कुछ क्षेत्रों से डेटा तक पहुंच को प्रतिबंधित करना शुरू कर दिया है। कंपनी की तरफ से जारी बयान में कहा गया, “यह युद्ध की परिस्थितियां हैं। हम सभी हितधारकों की जरूरतों को संतुलित करने का प्रयास कर रहे हैं। हम स्थिति पर नजर रखना जारी रखेंगे और अपने ग्राहकों को डेटा की उपलब्धता पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने के लिए यथासंभव प्रयास करेंगे।” इस रिपोर्ट को लेकर पेंटागन या ट्रंप प्रशासन की तरफ से कोई बयान सामने नहीं आया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प प्रशासन के इस आदेश के बाद, कंपनी अब अपनी सैटेलाइट तस्वीरों के लिए “नियंत्रित पहुँच” मॉडल अपना रही है। इसके तहत, यह साइट्स उन क्षेत्रों से आने वाली नई तस्वीरों को देर से प्रकाशित कर रही हैं। इसके अलावा कई तस्वीरों को केवल सरकार या विशेष परिस्थिति में ही जारी किया जा रहा है।

वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार के आदेश के बाद सैटेलाइट तस्वीरें सार्वजनिक करने वाली कई कंपनियों ने इस पर रोक लगा दी है। हालांकि, प्लैटनेट लैब्स ने कहा कि यह निर्णय कंपनी द्वारा आंतरिक रूप से लिया गया था, न कि किसी सरकारी निर्देश के कारण। वहीं, वैंटोर ने कहा कि वह “संवेदनशील खुफिया जानकारी के दुरुपयोग को रोकने” के लिए तस्वीरों के प्रकाशन को प्रतिबंधित करेगा। कंपनी के प्रवक्ता टोमी मैक्सटेड ने बताया अभी जिन क्षेत्रों में अमेरिका और नाटो की सेनाएं काम कर रही हैं, उन क्षेत्रों की पुरानी तस्वीरों को खरीदने बेचने पर भी प्रतिबंध लगाया जा सकता है।

क्या है अमेरिका की परेशानी?

कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते प्रभाव के बाद युद्ध और सैटेलाइट तस्वीरों में भी इनका प्रयोग बड़े स्तर पर किया जा रहा है। हाल ही में ईरानी अखबार तेहरान टाइम्स ने एक पोस्ट के जरिए कतर में ईरानी ड्रोन हमले में अमेरिकी रडार प्रणाली को हुए नुकसान को दिखाया था। हालांकि, बाद में पता चला कि छवि को कृत्रिम बुद्धिमत्ता द्वारा बदला गया था। असली छवि बहरीन के एक स्थल की थी।

संयुक्त राज्य अमेरिका लगातार इन सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए युद्ध क्षेत्र में प्रभाव को बढ़ाता रहा है। युद्ध की स्थिति में निष्पक्ष रूप से सार्वजनिक होने वाली यह सैटेलाइट तस्वीरें नैरेटिव बनाने के लिए महत्वपूर्ण होती हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी जब पाकिस्तान दुनिया के सामने अपने पराक्रम की झूठी मिसालें दे रहा था, उस वक्त सैटेलाइट तस्वीरों ने ही उसकी पोल खोली थी। सार्वजनिक रूप से जारी तस्वीरों ने ही दुनिया के सामने पाकिस्तान में भारतीय मिसाइलों द्वारा मचाए गए तांडव की कहानी बताई थी। दूसरे तरफ पाकिस्तान द्वारा भारतीय ठिकानों को निशाना बनाने का जो झूठ बेचा जा रहा था, उसकी पोल भी सैटेलाइट तस्वीरों ने ही खोली थी।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN