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शॉर्ट टर्म ऑप्शन ट्रेडिंग पर सेबी सतर्क, निवेशकों के लिए जानना जरूरी

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Source :- LIVE HINDUSTAN

स्टॉक मार्केट में ट्रेडिंग करते हैं तो ये खबर आपके लिए अहम है। सेबी चेयरमैन ने कहा कि बाजार नियामक को डेरिवेटिव (फ्यूचर एंड ऑप्शन) मार्केट के फ्यूचर सेग्मेंट को लेकर कोई चिंता नहीं है लेकिन कुछ मामलों को लेकर चिंता है।

स्टॉक मार्केट में ट्रेडिंग करते हैं तो ये खबर आपके लिए अहम है। दरअसल, फ्यूचर एंड ऑप्शन ट्रेडिंग को लेकर सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने एक अहम बयान दिया है। उन्होंने कहा कि बाजार नियामक को डेरिवेटिव (फ्यूचर एंड ऑप्शन) मार्केट के फ्यूचर सेग्मेंट को लेकर कोई चिंता नहीं है लेकिन कम समय के सौदे वाले यानी शॉर्ट टर्म ऑप्शन ट्रेडिंग में सट्टेबाजी की गतिविधियों को लेकर वह सतर्क है। पांडेय ने कहा कि नियामक के हाल में किये गये गये हस्तक्षेप विशेष रूप से शार्ट टर्म वाले ऑप्शन ट्रेड में अत्यधिक गतविधियों पर अंकुश लगाने पर केंद्रित रहे हैं। इसके साथ ही मूल्य निर्धारण और नकदी में फ्यूचर एंड ऑप्शन की अहम भूमिका को भी संरक्षित किया जा रहा है।

क्या कहा सेबी के चेयरमैन ने?

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) प्रमुख ने डेरिवेटिव सेग्मेंट से संबंधित एक सवाल के जवाब में कहा कि इस मुद्दे को सामान्य रूप से एफएंडओ (फ्यूचर एंड ऑप्शन) से संबंधित मुद्दा नहीं कहा जाना चाहिए। उन्होंने कहा- आपको इसे फ्यूचर एंड ऑप्शन नहीं कहना चाहिए क्योंकि फ्यूचर को लेकर हमें कभी कोई समस्या नहीं रही है। अल्पावधि विकल्पों को लेकर जरूर समस्या है। पांडेय ने कहा कि सेबी ने छोटी अवधि वाले ऑप्शन ट्रेड में अत्यधिक गतिविधियों को लक्षित करते हुए पहले ही कई नियामकीय उपाय लागू किए हैं। ये उपाय अक्टूबर 2024 और मई 2025 में लागू किए गए थे, जिनका चरणबद्ध कार्यान्वयन जुलाई, अक्टूबर और दिसंबर में हुआ। नियामक अब बाजार आंकड़ों के आधार पर इन हस्तक्षेपों के प्रभाव का आकलन कर रहा है।

प्रभाव का कर रहे आकलन

उन्होंने कहा- हम आंकड़ों के आधार पर इसके प्रभाव का आकलन कर रहे हैं। अगर हमें लगता है कि अभी भी कदम उठाने की जरूरत है तो हम उस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए विभिन्न तरीकों पर विचार करेंगे और परामर्श का एक और दौर आयोजित करेंगे। सेबी प्रमुख ने कहा कि फ्यूचर मार्केट और व्यापक डेरिवेटिव सेग्मेंट प्राइस निर्धारण और लिक्विडिटी में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा- यह बेहतर है कि हम उन समस्याग्रस्त क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करें जिनकी पहचान स्वयं सेबी ने की है और आंकड़े भी जारी किये गये हैं। हमने वैधानिक चेतावनी जारी की है, उपाय लागू किए हैं और उनके प्रभाव का विश्लेषण करना जारी रखेंगे।

शॉट टर्म के ऑप्शन का मतलब

बता दें कि शॉट टर्म के ऑप्शन कारोबार ऐसे डेरिवेटिव हैं जो या तो उसी दिन या कुछ दिन के भीतर समाप्त हो जाते हैं। ये सस्ते होते हैं और कम राशि (प्रीमियम) से ही बड़ा पोजिशन प्रदान करते हैं। इससे कारोबारी बहुत ही शॉर्ट टर्म के लिए बाजार उतार-चढ़ाव पर दांव लगा सकते हैं या उनसे बचाव कर सकते हैं। हालांकि, ये अस्थिर होते हैं और बहुत तेजी से अपना मूल्य खो देते हैं, जिससे ये खुदरा निवेशकों के लिए ज्यादा जोखिम भरे हो जाते हैं। सेबी की एक रिपोर्ट के अनुसार 90 प्रतिशत से अधिक कारोबारी डेरिवेटिव ट्रेड में पैसा गंवा देते हैं।

पिछले साल भी उठे थे सवाल

इससे पहले जुलाई में सेबी ने अति-अल्पावधि डेरिवेटिव ट्रेडिंग के बढ़ते प्रभाव पर भी चिंता व्यक्त की थी और चेतावनी दी थी कि इस तरह का रुख भारत के पूंजी बाजारों की सेहत को कमजोर कर सकते हैं। निम्न आय वर्ग के लोगों को डेरिवेटिव कारोबार से बाहर रखने के सुझावों पर प्रतिक्रिया देते हुए सेबी प्रमुख ने कहा कि नियामक को अलग-अलग पक्षों से कई सिफारिशें प्राप्त होती हैं। पांडेय ने प्रस्ताव पर तत्काल कोई कदम उठाने का संकेत दिए बिना कहा कि हर कोई सुझाव दे सकता है। हमें ईमेल और सोशल मीडिया के माध्यम से कई सुझाव मिलते हैं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN