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शी जिनपिंग का दांव पड़ गया उलटा? PLA हुई खोखली, युद्ध में चीन पर क्यों मंडराया हार का खतरा

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Source :- LIVE HINDUSTAN

रिपोर्ट में कहा गया है कि हाल ही में चीन के दो शीर्ष जनरलों, झांग यूशिया और हे वेइडोंग, पर जांच और कार्रवाई ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। इसके चलते सर्वोच्च सैन्य निकाय सेंट्रल मिलिट्री कमीशन में नेतृत्व सीमित होकर केवल कुछ ही अधिकारियों तक रह गया है।

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सेना में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम छेड़ रखी है, जिसके चपेट में कई बड़े सैन्य अफसर आ चुके हैं लेकिन उनकी ये सैन्य भ्रष्टाचार विरोधी कार्रवाई ने वहां की सेना यानी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की कार्यक्षमता और उसकी युद्ध तैयारी पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक बड़े डिफेंस रिसर्च सेंटर के मुताबिक, चीन में चल रहे मिलिट्री करप्शन सफाए से उसकी आर्म्ड फोर्सेज़ के कमांड स्ट्रक्चर में गंभीर कमियां पैदा हो गई हैं और इससे PLA के कमांड ढांचे में बड़ी कमी आ गई है।

रॉयटर्स के मुताबिक लंदन स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज (IISS) ने अपनी वार्षिक “मिलिट्री बैलेंस” रिपोर्ट में कहा कि जब तक खाली पदों को भरा नहीं जाता, तब तक PLA का संचालन कमजोर नेतृत्व संरचना के साथ हो रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह स्थिति सेना की तत्काल युद्ध क्षमता को प्रभावित कर सकती है। IISS) ने इस हफ्ते कहा कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेतृत्व में यह सफाया, जिसमें सुप्रीम सेंट्रल मिलिट्री कमीशन, थिएटर कमांड्स, हथियारों की खरीद, डेवलपमेंट प्रोग्राम्स और डिफेंस एकेडेमिया शामिल हैं, अधूरा रहने की उम्मीद है।

सेंट्रल मिलिट्री कमीशन में नेतृत्व सीमित हुआ

IISS ने कहा, “ऑर्गेनाइज़ेशनल नजरिए से, जब तक खाली जगहें नहीं भरी जातीं, PLA अपने कमांड स्ट्रक्चर में गंभीर कमियों के साथ काम कर रहा है।” रिपोर्ट में कहा गया है कि हाल ही में चीन के दो शीर्ष जनरलों, झांग यूशिया और हे वेइडोंग, पर जांच और कार्रवाई ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। इसके चलते सर्वोच्च सैन्य निकाय सेंट्रल मिलिट्री कमीशन में नेतृत्व सीमित होकर केवल कुछ ही अधिकारियों तक रह गया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यदि नियुक्तियां पारदर्शिता के बजाय संपर्कों के आधार पर हुई हों, या हथियारों की गुणवत्ता और सैनिकों के मनोबल में कमी हो, तो इस तरह की कार्रवाई का अल्पकालिक नकारात्मक प्रभाव पड़ना लगभग तय है। हालांकि, दीर्घकाल में आधुनिकीकरण की प्रक्रिया जारी रहने की संभावना जताई गई है।

रक्षा खर्च के मामले में भी चीन एशिया में सबसे आगे

इसके साथ ही, रिपोर्ट ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य सक्रियता, खासकर ताइवान के आसपास 2025 में बढ़ी तैनाती, को भी रेखांकित किया है। रक्षा खर्च के मामले में भी चीन एशिया में सबसे आगे बना हुआ है, जहां उसका हिस्सा 2025 में लगभग 44% तक पहुंच गया है। हाल ही में PLA को संबोधित करते हुए शी जिनपिंग ने कहा कि बीता वर्ष “असाधारण” रहा है और सेना ने भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में बड़े बदलाव देखे हैं। फिलहाल, चीनी डिफेंस मिनिस्ट्री ने इस स्टडी पर तुरंत कोई जवाब नहीं दिया।

कमांड संरचना में कमी की वजह से कठिनाई

विशेषज्ञों का मानना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई से दीर्घकाल में सुधार संभव है, लेकिन फिलहाल इससे चीन की सैन्य क्षमता और कमांड संरचना पर दबाव बढ़ा है, जो किसी भी संभावित संघर्ष की स्थिति में चिंता का विषय बन सकता है। हालांकि इस बात से इनकार किया गया है कि अगर आज के दौर में यूएस से जंग होने की स्थिति में चीन की स्थिति कमजोर होगी लेकिन यह स्पष्ट कहा गया है कि रणनीतिक रूप से चीनी सेना को कमांड संरचना में कमी की वजह से कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN