Source :- LIVE HINDUSTAN
सरकार आने वाले दिनों में माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSMEs) के लिए एक राहत पैकेज ला सकती है। वित्त मंत्रालय कुछ खास उपायों पर काम कर रहा है, जिसमें MSME निर्यातकों के लिए 2.5 लाख करोड़ रुपये की क्रेडिट गारंटी योजना और दो से छह महीने तक के लिए लोन पर रोक यानी मोरेटोरियम शामिल है।
ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच जंग की वजह से भारत समेत दुनियाभर में फाइनेंशियल प्रेशर बढ़ा है। इस प्रेशर को कम करने के लिए केंद्र सरकार बड़ी तैयारी में है। दरअसल, सरकार आने वाले दिनों में माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSMEs) के लिए एक राहत पैकेज ला सकती है।
सूत्रों ने मनीकंट्रोल को बताया कि वित्त मंत्रालय कुछ खास उपायों पर काम कर रहा है, जिसमें MSME निर्यातकों के लिए 2.5 लाख करोड़ रुपये की क्रेडिट गारंटी योजना और दो से छह महीने तक के लिए लोन पर रोक यानी मोरेटोरियम शामिल है। MSME राहत पैकेज की अंतिम रूपरेखा की घोषणा जल्द ही होने की उम्मीद है।
क्यों है यह तैयारी?
ईंधन की बढ़ती कीमतें, सप्लाई में रुकावट और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी चुनौतियां अब छोटे व्यवसायों पर भारी पड़ने लगी हैं। इस वजह से केंद्र सरकार ने लिक्विडिटी सपोर्ट और कामकाज में आसानी को प्राथमिकता देना शुरू कर दिया है। विश्लेषकों के मुताबिक समय पर मिलने वाला क्रेडिट सपोर्ट से स्थिरता मिल जाएगी।
सूत्र बताते हैं कि फ्यूल की आपूर्ति और लिक्विडिटी मुख्य प्रेशर वाले बिंदुओं के रूप में सामने आए हैं। फेडरेशन ऑफ इंडियन माइक्रो एंड स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज के अध्यक्ष राकेश छाबड़ा ने मनीकंट्रोल को बताया- रोजाना 70 प्रतिशत LNG अलॉटमेंट प्राप्त करने के बजाय, MSME उद्योगों ने मांग की है कि वही मात्रा महीने में निश्चित दिनों के लिए आपूर्ति की जाए ताकि उस अवधि के दौरान बॉयलर पूरी क्षमता से लगातार चल सकें।
बता दें कि पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 27 मार्च, 2026 को कहा कि उसने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) का आवंटन 20 प्रतिशत और बढ़ा दिया है, जिससे कुल कॉमर्शियल LPG आवंटन संकट-पूर्व स्तरों के 70 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
वित्त मंत्री की विदेश यात्रा रद्द
इस बीच, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संयुक्त राज्य अमेरिका की अपनी प्रस्तावित यात्रा रद्द कर दी है। निर्मला सीतारमण को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक की वसंतकालीन बैठकों में शामिल होना था। ये बैठकें 13 से 18 अप्रैल तक वाशिंगटन, DC में होनी थीं। ऐसा माना जा रहा है कि MSMEs के राहत पैकेज पर मंथन के लिए वित्त मंत्री ने यह फैसला लिया है।
वित्त मंत्री ने दिए थे संकेत
हाल ही में वित्त मंत्री ने इस तरह के संकेत भी दिए थे। वित्त मंत्री ने कहा था कि राजकोषीय सूझबूझ ने सरकार को पूंजीगत व्यय बढ़ाने और पश्चिम एशिया संकट से प्रभावित क्षेत्रों को समर्थन देने के लिए पर्याप्त वित्तीय गुंजाइश दी है। सीतारमण ने चुनौतीपूर्ण समय में अच्छी सार्वजनिक वित्त नीति के महत्व का जिक्र करते हुए कहा कि इससे आर्थिक नरमी के दौर में उससे निपटने, विशेष रूप से विपरीत परिस्थितियों में भी टिके रहने की क्षमता में सुधार होता है।
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