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राज्यसभा में राघव चड्ढा।
नई दिल्ली: राज्यसभा में गुरुवार को एक महत्वपूर्ण चर्चा के दौरान आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने भारत सरकार को सलाह दी है कि वह अमेरिका के साथ टैरिफ को लेकर बातचीत में स्टारलिंक को ‘बार्गेनिंग चिप’ की तरह इस्तेमाल करे। उन्होंने साथ ही स्टारलिंक को लेकर कुछ चिंताजनक घटनाओं का भी हवाला दिया। बता दें कि भारत सरकार फिलहाल स्टारलिंक की भारत में एंट्री को लेकर सतर्क है और वह किसी भी तरह की मंजूरी देने से पहले सुरक्षा से जुड़े हर पहलू को जांच-परख रही है।
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स्टारलिंक पर राघव चड्ढा ने क्या कहा?
अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ से निपटने के लिए राघव चड्ढा ने सरकार को सुझाव दिया कि एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक को दी जाने वाली मंजूरी रोकी जानी चाहिए और उसका इस्तेमाल अमेरिका से फिर से टैरिफ को लेकर बातचीत में ‘बर्गेनिंग चिप’ के तौर पर करना चाहिए। उन्होंने साथ ही कुछ चिंताजनक घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि कुछ महीने पहले अंडमान में 6000 किलो सिंथेटिक ड्रग्स की जब्ती के दौरान यह पाया गया कि म्यांमार के ड्रग तस्करों ने नेविगेशन के लिए स्टारलिंक सैटेलाइट इंटरनेट का इस्तेमाल किया था।
जेलेंस्की के बयान का भी दिया हवाला
चड्ढा ने साथ ही कहा कि यूक्रेन युद्ध के दौरान एलन मस्क ने खुद सोशल मीडिया पर कहा था कि ‘स्टारलिंक यूक्रेनियन आर्मी की रीढ़ है, अगर मैं इसे बंद कर दूं तो पूरी फ्रंटलाइन धराशायी हो जाएगी।’ उन्होंने कहा कि भारत को भी इससे सतर्क रहना चाहिए क्योंकि देश की संप्रभुता और सुरक्षा सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि वह हर उस मुद्दे को सदन में उठाते रहेंगे, जो भारतीय हितों और भारत की आर्थिक संप्रभुता को प्रभावित करता है। उन्होंने साफ किया कि उनकी बातें किसी कंपनी के खिलाफ नहीं, बल्कि भारत की सुरक्षा, संप्रभुता और डेटा नीति की मजबूती के लिए है।
स्टारलिंक को लेकर क्या है भारत सरकार का रुख?
भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि स्टारलिंक को भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरू करने से पहले कड़े सुरक्षा मानकों और नियामक शर्तों का पालन करना होगा। सरकार ने स्टारलिंक से भारत में एक कंट्रोल सेंटर स्थापित करने की शर्त रखी है, ताकि आपात स्थिति में संचार सेवाओं पर सरकार का नियंत्रण रहे और कानून व्यवस्था बनाए रखी जा सके। साथ ही सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि स्टारलिंक को भारत में ही अपना डेटा स्टोर करना होगा और सरकार के पास जरूरत पड़ने पर सैटेलाइट इंटरनेट डेटा की जांच करने का अधिकार होगा।
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