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यूपी-बिहार की शादियों में दूल्हे के साथ घोड़ी पर क्यों बैठाया जाता है सहबाला? जानें रोचक परंपरा

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Source :- LIVE HINDUSTAN

यूपी, बिहार में दूल्हा जब घोड़ी पर चढ़कर बारात के साथ जाता है तो साथ में एक छोटा लड़का भी बैठाया जाता है। इस बच्चे के सहबाला कहते हैं। क्या आपको पता है कि यह सहबाला बैठाने की परंपरा क्यों है?

यूपी, बिहार, राजस्थान, एमपी सहित देश के कई क्षेत्रों में दूल्हे के साथ सहबाला बैठाने की परंपरा है। आपने कभी सोचा कि दूल्हे के साथ उसके जैसे कपड़ों में एक छोटा लड़का क्यों बैठाया जाता है? चलिए पहले सहबाला का मतलब समझते हैं। सहबाला शब्द दो शब्दों के मेल से बना है- सह मतलब साथ और बाला यानी बालक। इसका शाब्दिक अर्थ है साथ चलने वाला लड़का। दूल्हे के साथ सज-धज कर बैठने वाला यह छोटा बच्चा अमूमन दूल्हे का छोटा भाई, भतीजा या भांजा होता है। इसे कई क्षेत्रों में बिनेक, सहबोला या शहबाला भी कहा जाता है।

ऐतिहासिक और सुरक्षात्मक मान्यता

हिंदू मान्यता के अनुसार विवाह एक यज्ञ संस्कार है। इस दौरान दूल्हे की रक्षा के लिए एक निर्दोष, कुंवारे बालक को साथ बैठाया जाता है। माना जाता है कि बच्चे की उपस्थिति शुभ होती है और नकारात्मक शक्तियों को दूर रखती है। लोक मान्यताओं के अनुसार, सहबाला दूल्हे का बॉडीगार्ड माना जाता था। ऐसी धारणा थी कि अगर दूल्हे पर कोई हमला या अनहोनी हो तो सहबाला उसकी ढाल बनेगा।

बुरी नजर से बचाव

भारतीय समाज में बुरी नजर को काफी माना जाता है। शादी में दूल्हा सबसे आकर्षक और केंद्र में होता है इसलिए उसके साथ एक मासूम बच्चे को बिठाया जाता है ताकि लोगों की पहली नजर उस बच्चे पर पड़े और दूल्हा बुरी नजर से बचा रहे।

मनोवैज्ञानिक और वैज्ञानिक पक्ष

आज के समय में इसको मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से जोड़कर भी देखा जाता है। शादी के दिन दूल्हे में घबराहट और ऐंग्जाइटी होती है। एक छोटा बच्चा साथ होने से माहौल हल्का बना रहता है। बच्चे की मासूमियत और उसकी छोटी-मोटी जरूरतें दूल्हे का ध्यान बंटाए रखती हैं, जिससे उसका स्ट्रेस कम रहता है। साथ ही दूल्हे को सपोर्ट लगता है।

जिम्मेदारी का अहसास

दूल्हे के साथ बच्चे को बिठाना इस बात का प्रतीक है कि वह अब एक गृहस्थ जीवन में प्रवेश कर रहा है जहां उसे भविष्य में बच्चों और परिवार की जिम्मेदारी उठानी हैं।

वंश की निरंतरता

सहबाला परंपरा का एक बड़ा पहलू वंश वृद्धि से जुड़ा है। दूल्हे के साथ एक बच्चे का होना यह दिखाता है कि परिवार की परंपराएं एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में हस्तांतरित हो रही हैं। यह नए जीवन की शुरुआत और फर्टिलिटी का एक शुभ प्रतीक माना जाता है। आज भले ही सहबाला सिर्फ रस्म बनकर रह गया हो, लेकिन इसकी जड़ें हमारे पूर्वजों की उस दूरदर्शिता में हैं जो सुरक्षा, मनोविज्ञान और पारिवारिक जुड़ाव को सबसे ऊपर मानते थे।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN