Home विश्व समाचार यूक्रेन ने रूसी तेल ठिकानों पर दागे ड्रोन, ईरान युद्ध के बीच...

यूक्रेन ने रूसी तेल ठिकानों पर दागे ड्रोन, ईरान युद्ध के बीच पुतिन का मुनाफा कमाने का प्लान फेल

9
0

Source :- LIVE HINDUSTAN

रूस को अब तेल उत्पादन घटाने की नौबत आ सकती है, क्योंकि निर्यात क्षमता कम होने से भंडारण क्षमता भर गई है। यूक्रेनी सुरक्षा सेवा ने दावा किया कि इन हमलों का मकसद रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था को कमजोर करना है।

यूक्रेन ने रूस के तेल निर्यात ठिकानों पर ड्रोन हमले तेज कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, मार्च के अंत और अप्रैल की शुरुआत में यूक्रेनी ड्रोन ने बाल्टिक सागर के प्रमुख तेल निर्यात बंदरगाहों पर निशाना साधा। इन हमलों से रूस की लगभग 20 से 40 प्रतिशत तेल निर्यात क्षमता प्रभावित हुई है, जो करीब 10 लाख बैरल प्रतिदिन के बराबर है। ईरान युद्ध के कारण वैश्विक तेल कीमतों में उछाल आने से रूस को बड़ा मुनाफा होने की उम्मीद थी, लेकिन यूक्रेन के इन हमलों ने उसकी आय को गंभीर रूप से ठेस पहुंचाई है।

रूसी अधिकारियों ने स्वीकार किया कि निर्यात बंदरगाहों पर आग लगी और तेल भंडारण टैंक क्षतिग्रस्त हो गए हैं। ये हमले यूक्रेन-रूस युद्ध के 4 वर्ष से अधिक समय में यूक्रेन की सबसे आक्रामक रणनीति का हिस्सा हैं। उस्त-लुगा बंदरगाह पर अकेले 9 दिनों में पांच बार हमले हुए, जबकि प्रिमोर्स्क और किरिशी रिफाइनरी भी निशाने पर आए। इन हमलों से रूसी तेल पाइपलाइनों में तेल जाम हो गया है और रिफाइनरियों को वैकल्पिक मार्ग ढूंढने पड़े हैं।

क्या रूस को घटाना पड़ेगा तेल उत्पादन

रूस को अब तेल उत्पादन घटाने की नौबत आ सकती है, क्योंकि निर्यात क्षमता कम होने से भंडारण क्षमता भर गई है। यूक्रेनी सुरक्षा सेवा ने दावा किया कि इन हमलों का मकसद रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था को कमजोर करना है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ईरान संकट से तेल राजस्व बढ़ने की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन यूक्रेनी ड्रोन हमलों ने उनकी योजना को ध्वस्त कर दिया। रूस की अर्थव्यवस्था पहले ही युद्ध खर्च से दबाव में थी। अब तेल निर्यात में कमी से राजस्व में और गिरावट आएगी, जो युद्ध प्रयासों को प्रभावित कर सकती है।

यूक्रेन की ओर से ये हमले पिछले साल गर्मियों से शुरू हुए अभियान का विस्तार हैं, जिसमें रूसी तेल फैसिलिटी को निशाना बनाया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल कीमतें बढ़ने से यूरोप और अन्य देशों पर भी असर पड़ रहा है। इस घटनाक्रम से युद्ध की दिशा बदल रही है। यूक्रेन आर्थिक लक्ष्यों पर हमले बढ़ाकर रूस को दबाव में रखना चाहता है, जबकि रूस अपनी रक्षा व्यवस्था मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ये हमले जारी रहे तो रूस को तेल उत्पादन में कटौती करनी पड़ सकती है, जिससे उसकी युद्ध क्षमता प्रभावित होगी।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN