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ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात पर नए सिरे से हमले शुरू किए हैं. यूएई की सरकार ने कहा है कि ईरान टारगेटेड हमले कर रहा है.
यह जहाज़ों में ईंधन भरने का एक अहम केंद्र है और क्षेत्र की सबसे बड़ी तेल भंडारण सुविधाओं में से एक है.
ईरान पर अमेरिका और इसराइल के हमले के बाद खाड़ी देशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की चिंता बढ़ गई है. हालांकि उनका कहना है कि यूएई सरकार सुरक्षा के सारे उपाय कर रही है.
क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण कई भारतीय सतर्कता बरत रहे हैं. खाड़ी देशों में सबसे ज्यादा भारतीय यूएई में ही रहते हैं.
सिविल एविएशन मंत्रालय के मुताबिक, ”28 फरवरी से 11 मार्च, 2026 की अवधि के दौरान, खाड़ी देशों से कुल 1,50,457 हवाई यात्रियों ने भारत की यात्रा की है.” संयुक्त अरब अमीरात से तकरीबन 52 हज़ार भारतीय सुरक्षित अपने देश लौट आए हैं.
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक यूएई में भारतीय प्रवासी समुदाय सबसे बड़ा समुदाय है, जो देश की कुल आबादी का लगभग 35 प्रतिशत हिस्सा बनाता है.
वर्ष 2024 के आंकड़ों के अनुसार, यूएई में रहने वाले भारतीय नागरिकों की संख्या लगभग 43 लाख आंकी गई है. इनमें से करीब 15 प्रतिशत भारतीय अबू धाबी अमीरात में रहते हैं, जबकि बाकी लोग दुबई सहित छह उत्तरी अमीरातों में बसे हुए हैं.
राज्यों के आधार पर देखें तो केरल के लोगों की संख्या सबसे अधिक है. इसके बाद तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना का स्थान आता है.
वहीं उत्तर प्रदेश, बिहार और पंजाब जैसे राज्यों से आए लोग भी यूएई में भारतीय समुदाय का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं.
‘ड्रोन हमले से पहले चेतावनी मिल जाती है’
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ईरान ने इस युद्ध में खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाया है. यूएई में भी अमेरिका का सैन्य अड्डा था.
ईरान की आईआरजीसी के मुताबिक अल डफरा एयरबेस को निशाना बनाया गया है. यह अबू धाबी के नज़दीक है. वहां से तकरीबन 30 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है.
अबू धाबी से लगातार उड़ानें भारत आ रही हैं. नई दिल्ली लौटे शमशेर अली ने न्यूज़ एजेंसी एएनआई से बातचीत में बताया कि वह पिछले दो साल से अबू धाबी में रह रहे थे.
उन्होंने कहा, “मौजूदा स्थिति में जब भी ईरान की तरफ से ड्रोन हमला होता है, पहले से चेतावनी दे दी जाती है कि लोग घरों के अंदर रहें और बाहर न निकलें. वहां की सरकार स्थिति से निपट रही है.”
भारतीय दूतावास ने एक प्रेस नोट में बताया है कि जिन लोगों का वीज़ा यूएई में समाप्त हो गया है, उन्हें 31 मार्च तक देश में रहने की अनुमति दी गई है.
वहीं जो लोग युद्ध की वजह से लौट नहीं पाए हैं. उनको भी एक महीने के लिए यह सुविधा दी गई है.
बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त अरब अमीरात के अधिकारियों का कहना है कि ईरान के हमलों की शुरुआत के बाद से यूएई की वायु रक्षा प्रणाली ने 285 बैलिस्टिक मिसाइलों, 15 क्रूज़ मिसाइलों और 1,567 ड्रोन को रोकने की कोशिश की है.
अधिकारियों के अनुसार इनमें से 90 प्रतिशत से अधिक को हवा में ही रोककर नष्ट कर दिया गया है.
हालांकि कुछ मलबा दुबई के कई हिस्सों में गिरा है, जिनमें प्रमुख आवासीय इलाक़े और शहर के हवाई अड्डे के आस-पास के क्षेत्र भी शामिल हैं.
सोशल मीडिया पर ऐसी तस्वीरें भी साझा की गई हैं जिनमें मिसाइल या ड्रोन के टुकड़े एक ऊंची लग्ज़री रिहायशी इमारत, एक होटल और हवाई अड्डे के पास गिरते दिखाई दे रहे हैं.
देश के अधिकारियों के मुताबिक़ इन घटनाओं में अब तक छह लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 141 लोग घायल हुए हैं.
महंगाई का असर
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हालांकि दुबई में सामान्य स्थिति बताई जा रही है, लेकिन रोज़मर्रा की चीज़ों के दाम बढ़ने की बात भी सामने आ रही है.
दुबई में काम करने वाले एक भारतीय नागरिक ने बताया, “ईरान-इसराइल युद्ध से पहले टमाटर और प्याज़ दो दिरहम में मिल जाते थे, लेकिन अब उनकी कीमत छह दिरहम तक पहुंच गई है. इसके अलावा कई अन्य वस्तुओं के दाम भी बढ़े हैं.”
हालांकि कई भारतीयों का कहना है कि वे फिलहाल वापस नहीं आ रहे हैं. उनका कहना है कि उड़ानों की कमी और बढ़े हुए किराए के कारण यात्रा मुश्किल हो गई है.
संयुक्त अरब अमीरात में भारतीय प्रवासी निर्माण, स्वास्थ्य सेवा, हॉस्पिटैलिटी, वित्त और प्रौद्योगिकी जैसे कई क्षेत्रों में काम करते हैं और देश की अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभाते हैं.
भारत सरकार की नज़र
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भारत सरकार के अनुसार वह खाड़ी क्षेत्र में स्थित भारतीय राजनयिक मिशन हालात पर कड़ी नज़र रखे हुए हैं और स्थानीय अधिकारियों तथा भारतीय समुदाय के संगठनों के साथ लगातार संपर्क में हैं.
अबू धाबी स्थित भारतीय दूतावास और दुबई स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास समय-समय पर भारतीय समुदाय के साथ अपडेट साझा कर रहे हैं. प्रभावित यात्रियों को आवश्यक सलाह भी दी जा रही है.
दूतावास के मुताबिक यात्रा व्यवस्था या दस्तावेज़ों से जुड़ी किसी भी सहायता के लिए हेल्पलाइन और सहायता चैनल सक्रिय किए गए हैं.
संयुक्त अरब अमीरात से 13 मार्च को दिल्ली लौटी राशि ने न्यूज़ एजेंसी एएनआई से कहा, “दुबई में स्थिति इतनी ख़राब नहीं है. ड्रोन वगैरह उड़ रहे हैं, लेकिन उन्हें इंटरसेप्ट कर लिया जाता है.”
भारत सरकार ने एडवाइज़री जारी कर भारतीय नागरिकों से कहा है कि वे संवेदनशील जगहों की तस्वीरें या वीडियो न लें और उन्हें सोशल मीडिया पर साझा करने से बचें.
इसके बाद से दुबई में रह रहे लोग अतिरिक्त सतर्कता बरत रहे हैं.
कई भारतीय नागरिकों से बातचीत में पता चला है कि सोशल मीडिया तस्वीर और वीडियो शेयर करने पर कई लोगों को हिरासत में लिया गया है.
बीबीसी न्यूज़ ने संयुक्त अरब अमीरात में रह रहे कई लोगों से संपर्क किया, लेकिन वे आधिकारिक तौर पर बात करने से हिचक रहे हैं.
शारजाह में करीब 25 साल से परिवार के साथ रह रही एक भारतीय महिला ने बताया, “यहां शारजाह में युद्ध का डर नहीं है. माहौल लगभग शांत है, लेकिन सुनने में आया है कि दुबई में ड्रोन वगैरह गिरे हैं.”
उन्होंने कहा, “हमें यहां की जानकारी ज़्यादातर भारतीय मीडिया से ही मिल रही है. लेकिन एहतियात बरत रहे हैं, बाहर जाना लगभग बंद है.”
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
SOURCE : BBC NEWS



