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मध्यपूर्व में संघर्ष के तेज़ होने के साथ ही ईरान के पक्ष में खड़े अरबी भाषा के कई सोशल मीडिया पेज अचानक काफ़ी चर्चित हो गए हैं.
इनमें ‘ईरान इन अरेबिक ‘ और ‘ ईरान न्यूज़ ‘ जैसे नामों से चलने वाले अकाउंट भी शामिल हैं.
फ़ेसबुक और एक्स (पहले ट्विटर) पर इन अकाउंट्स की पहुंच बहुत तेज़ी से बढ़ी है. ये पेज मौजूदा हालात का फ़ायदा उठाते हुए ईरान समर्थक और पश्चिम विरोधी बातें फैलाते और क्षेत्र में बढ़े तनाव को भुनाते नज़र आते हैं.
हालांकि ये पेज ईरान समर्थक उस व्यापक ऑनलाइन तंत्र का केवल एक अंश हैं, जिसे पूरी तरह समझना आसान नहीं है.
लेकिन इनमें से कुछ सबसे सक्रिय अकाउंट्स को करीब से देखने पर यह समझने में मदद मिलती है कि यह पूरा तंत्र कैसे काम करता है, इसके पीछे कौन हो सकता है और लोग इस पर कैसी प्रतिक्रिया दे रहे हैं.
इन सभी पेजों को मिलाकर देखें तो एक ऐसा डिजिटल माहौल सामने आता है जो बिखरा हुआ होने के बावजूद काफ़ी सक्रिय है.
इन पेज़ों पर ख़बरें, राजनीतिक संदेश और मनोरंजन- तीनों का मिला-जुला रूप दिखता है.
इनकी भौगोलिक स्थिति अलग-अलग है, इनके स्रोत भी अलग हैं और इनका लहजा भी एक जैसा नहीं है.
इससे लगता है कि इन पर किसी एक केंद्रीय संस्था का सीधा नियंत्रण नहीं है. फिर भी, इनके संदेश और उन्हें आगे बढ़ाने का तरीका अक्सर एक दूसरे से मेल खाता हुआ दिखता है.
बंटा हुआ और बढ़ता नेटवर्क
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इन अकाउंट्स का कोई एक तय भौगोलिक केंद्र भी नज़र नहीं आता. एक्स पर उपलब्ध लोकेशन डेटा के मुताबिक, ये अकाउंट जर्मनी, बुल्गारिया और पश्चिम एशिया के अन्य हिस्सों समेत अलग-अलग देशों में रजिस्टर्ड बताए गए हैं.
इनमें कम से कम एक अकाउंट ईरान में आधारित भी बताया गया है.
मसलन, एक पेज ने अपना पता चीन का बताया है, जबकि उसके संपर्क विवरण में लोकेशन दमिश्क (सीरिया) दिखाई गई है.
वहीं कुछ अन्य पेजों ने बहुत ही अस्पष्ट या आपस में मेल न खाने वाली लोकेशन जानकारी दी है.
इन पेजों का इतिहास भी एक जैसा नहीं है. कुछ अकाउंट 2009 से मौजूद हैं, जबकि कुछ को हाल ही में पहचान मिली है.
कम से कम एक अकाउंट को फरवरी 2026 में वेरिफ़ाई किया गया था, जो मौजूदा युद्ध शुरू होने के समय से मेल खाता है.
यह टाइमिंग और पोस्ट करने की रफ़्तार में अचानक आई तेज़ी इस ओर इशारा करती है कि कुछ अकाउंट्स को मौजूदा संघर्ष के जवाब में या तो सक्रिय किया गया है या फिर नए मक़सद के लिए दोबारा इस्तेमाल किया जा रहा है.
फ़ेसबुक पर यह पैटर्न और भी साफ़ दिखाई देता है, जहां ऐसे पेजों की संख्या काफ़ी ज़्यादा लगती है.
इनमें से ज़्यादातर पेज मॉडर्न स्टैंडर्ड अरबी भाषा का इस्तेमाल करते हैं और एक तरह से ख़ुद को पूरे अरब जगत का प्रतिनिधि मंच दिखाते हैं.
हालांकि एक दिलचस्प अपवाद भी है फ़ेसबुक का एक पेज जो मिस्र की स्थानीय बोली, हास्य और मीम कल्चर पर काफ़ी ज़्यादा निर्भर करता है.
इससे संकेत मिलता है कि उसका टार्गेट ज़्यादा स्थानीय दर्शक हो सकते हैं.
इन पेजों की पोस्ट आम तौर पर ईरान की सैन्य गतिविधियों पर केंद्रित रहती हैं, ख़ासकर क्षेत्र के अलग अलग हिस्सों में किए गए हमलों पर. इनमें अक्सर ईरानी अधिकारियों और इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) से जुड़े लोगों के बयानों का हवाला दिया जाता है.
इन अपडेट्स के साथ साथ, कुछ पेज बीच-बीच में धार्मिक संदेश भी डालते हैं, जिनमें शिया नारों और प्रतीकों का इस्तेमाल होता है.
हालांकि यह धार्मिक पहलू हमेशा उनकी सामग्री का मुख्य हिस्सा नहीं होता.
संदेश, टोन और कंटेंट की रणनीति
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एक्स पर देखे गए सबसे बड़े अकाउंट्स में से एक @iraninarabic_ir है, जिसके करीब 15 लाख फ़ॉलोअर्स हैं.
एक और अकाउंट @iranin_arabic, जिसके लगभग 5 लाख फ़ॉलोअर्स हैं, अपेक्षाकृत ज़्यादा प्रतिक्रियात्मक लहजा अपनाता है.
यह अक़्सर आलोचकों को जवाब देता है और ईरान के पक्ष वाली बातों को आगे बढ़ाता है.
इस अकाउंट ने कुछ ऐसी सामग्री भी साझा की है, जिसकी पुष्टि नहीं हो सकी.
यह बयान किसी भी भरोसेमंद स्रोत में नहीं मिलता.
एनिमेशन और कहानी कहने के इस अंदाज़ से यह संकेत मिलता है कि इसका मक़सद युवा दर्शकों को आकर्षित करना हो सकता है.
इस वीडियो में चल रहे संघर्ष के अलग-अलग पहलुओं को दिखाया गया है.
इसमें खाड़ी देशों पर हुए हमलों को सिर्फ़ जवाबी कार्रवाई के तौर पर पेश किया गया है और यह दावा किया गया है कि इनका निशाना केवल अमेरिकी हित थे.
वीडियो में एक दृश्य ऐसा भी है, जिसमें खाड़ी क्षेत्र के किसी देश का नेता अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फ़ोन करके युद्ध रोकने की अपील करता दिखाया गया है.
ऐसा युद्ध जिसमें खाड़ी देशों की कोई सीधी भूमिका नहीं है.
इसके अलावा वीडियो में रूसी और चीनी नेताओं को आपस में बात करते और अमेरिका के ख़िलाफ़ साज़िश रचते हुए भी दिखाया गया है.
एक दृश्य में पुतिन यह कहते नज़र आते हैं कि ‘अमेरिकी साम्राज्य का पतन हो चुका है.’
वीडियो में इसराइल-हिज़्बुल्लाह संघर्ष को भी जगह दी गई है, जहां संगठन के नेताओं को ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रति निष्ठा जताते हुए दिखाया गया है.
फ़ेसबुक कंटेंट
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फ़ेसबुक पर ‘ईरान इन अरेबिक ‘ नाम से चलने वाले दो पेजों के मिलकर 45 लाख से ज़्यादा फ़ॉलोअर्स हैं. इनमें से बड़ा पेज, जिसके करीब 32 लाख फ़ॉलोअर्स हैं, वेरिफ़ाइड नहीं है और अपनी लोकेशन चीन बताता है. इस पेज का फ़ेसबुक यूज़रनेम ‘ चाइना.अरेबिक है.
यह पेज अक्सर एआई से बनाई गई तस्वीरों और वीडियो का इस्तेमाल करता है, जिन पर कई बार अंग्रेज़ी में कैप्शन भी होते हैं.
इसकी सामग्री में युद्ध से जुड़े अपडेट्स के साथ साथ व्यापक जियो पॉलिटिकल संदेश भी शामिल रहते हैं.
इसके साथ सवाल लिखा था- “क्या चीन ताइवान के ज़रिए अमेरिकी असर पर हमला करने की तैयारी कर रहा है?”
इससे एक दिन पहले, पेज ने ईरान के वरिष्ठ नेता अली लारिजानी के नाम से एक बयान पोस्ट किया था.
अली लारिजानी की 17 मार्च को एक इसरायली हमले में मौत हो गई थी.
उस बयान में संघर्ष को दो धड़ों के बीच की लड़ाई के रूप में पेश किया गया था. एक तरफ़ ईरान और उसके सहयोगी, और दूसरी तरफ़ अमेरिका और इसराइल.
इसके उलट, दूसरा पेज बिल्कुल अलग रणनीति अपनाता है.
यह पेज 2016 में बनाया गया था और ऐसा लगता है कि शुरुआत में इसका फोकस ग़ैर राजनीतिक कंटेंट पर था.
अब यह पेज मिस्र की बोली और हास्य का इस्तेमाल करते हुए अपनी पोस्ट तैयार करता है, जिनमें मनोरंजन और राजनीतिक संदेशों को आपस में मिला दिया गया है.
इसकी शुरुआती गतिविधियों में बर्लिन से जुड़े कुछ कार्यक्रमों का ज़िक्र मिलता है.
हालांकि फिलहाल इसकी लोकेशन साफ़ नहीं है. यह पेज ज़्यादातर इसराइल विरोधी सामग्री पोस्ट करता है और इसराइल पर किए गए ईरान के हमलों के दैनिक अपडेट देता है.
यूज़र्स की प्रतिक्रिया
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एक्स और फ़ेसबुक पर इन पेजों को लेकर यूज़र्स की प्रतिक्रियाओं में साफ़ अंतर दिखाई देता है.
और इसकी वजह यह है कि एक्स पर इन पेजों पर टिप्पणी करने वाले यूज़र ज़्यादातर खाड़ी देशों के होते हैं, जबकि फ़ेसबुक पर दर्शकों का बड़ा हिस्सा उत्तरी अफ़्रीका से है.
उदाहरण के तौर पर, पहले एक्स की एक पोस्ट, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता की ‘शहादत’ पर शोक जताया गया था पर कई यूज़र्स ने उल्टा खुशी जताई.
कमेंट करने वालों ने सीरिया और यमन में ‘लाखों मुसलमानों की हत्या’ में ईरान की भूमिका का ज़िक्र किया, ख़ासतौर पर बच्चों की.
हालांकि उसी पेज की एक और पोस्ट, जिसमें कथित तौर पर इसराइल पर ईरानी मिसाइल हमले के वीडियो दिखाए गए थे, उसे ज़्यादातर यूज़र्स का समर्थन मिला.
एक्स पर @iranin_arabic अकाउंट की एक पोस्ट- जिसमें अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बिकिनी पहने एक कम उम्र लड़की के साथ और ईरान के सुप्रीम लीडर को कुछ बच्चियों के साथ प्रार्थना करते दिखाया गया था- की कुछ यूज़र्स ने तीखी आलोचना की.
आलोचना करने वालों शिया धर्मगुरू के उन फ़तवों का उल्लेख किया जिनमें नाबालिगों के साथ यौन संबंध की इजाज़त दी गई थी. यहां यह ध्यान रखा जाना चाहिए कि ट्रंप की तस्वीर वेरीफ़ाइड नहीं थी जबकि ख़ामेनेई की तस्वीर थी.
आलोचना के बावजूद, एक्स पर कई टिप्पणियां ईरान के समर्थन में भी थीं.
फ़ेसबुक पर प्रतिक्रियाएं अपेक्षाकृत ज़्यादा ईरान समर्थक रहीं.
उदाहरण के लिए, ईरान इन अरेबिक पेज की एक पोस्ट, जिसमें सऊदी अरब में एक अमेरिकी राडार के नष्ट होने का दावा किया गया था, उसकी सैकड़ों यूज़र्स ने प्रशंसा की, और उनमें से कुछ ने खाड़ी देशों की आलोचना भी की.
नौ मार्च की एक अन्य पोस्ट में कहा गया था, “किसी भी मिस्री, फ़लिस्तीनी, लेबनानी, सीरियाई, कुर्द, इराक़ी, अरब, राष्ट्रवादी, वामपंथी, इस्लामवादी, या धर्मनिरपेक्ष… के हाथ में जो भी हथियार हो, अगर वह इसराइल के ख़िलाफ़ है, तो मैं उसका समर्थन करता हूं.”
इस पोस्ट को 60 हज़ार से ज़्यादा इंटरेक्शन, 3,200 से अधिक टिप्पणियां और 2,600 शेयर मिले.
ज़्यादातर टिप्पणीकारों ने ईरान का समर्थन जताया. कई लोगों ने अपनी राष्ट्रीयताएं सोमाली, सूडानी, मिस्री और अल्जीरियाई बताईं.
एक यूज़र, अहमद मुख़्तार, ने लिखा, “ईरान ने वह कर दिखाया है जो अरब सदियों से नहीं कर पाए. झुकने की बजाय मुक़ाबला करने वालों को सलाम, और ईरानी जनता की दृढ़ता को नमन.”
वहीं मोहम्मद आदेल हसनैन ने लिखा: “हम सब आपके साथ हैं… सिवाय खाड़ी के लोगों के.”
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SOURCE : BBC NEWS



