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खाड़ी देशों के बीच उड़ानों और समुद्री व्यापार का मार्ग बाधित होने से ना केवल ऊर्जा बल्कि खाद्य सुरक्षा पर भी संकट मंडराने लगा है। ओमान, यूएई और सऊदी अरब जैसे देश अपनी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने में जुटे हैं।
अमेरिका इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध की वजह से ना सिर्फ पश्चिम एशिया, बल्कि पूरी दुनिया में हाहाकार मच गया है। ईरान ने अमेरिकी और इजरायली हमलों में अपने सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई को खोने के बाद बदला लेने की कसम खाई है और वह खाड़ी देशों पर लगातार मिसाइलें और ड्रोन बरसा रहा है। इस बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मूज जंग का अखाड़ा बन चुका है जहां से ईरान तेल की आवाजाही रोकने पर अड़ गया है। संकट बढ़ने के बाद अब अमेरिका पर भी दबाव बढ़ने लगा है। हालांकि अब ईरान ने युद्ध खत्म करने के लिए की बात कही है। इसके साथ ही ईरानी राष्ट्रपति ने अमेरिका के सामने 3 शर्तें भी रख दी हैं।
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने बुधवार को 28 फरवरी से जारी इस भीषण जंग को रोकने के लिए ईरान की तीन शर्तें बताई हैं। उन्होंने कहा है कि अमेरिका को ईरान के अधिकारों को मान्यता देनी ही होगी और यह गारंटी देनी होगी कि देश पर भविष्य में हमले नहीं होंगे।
ईरान की 3 शर्तें
बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किए गए एक बयान में, पेजेशकियन ने कहा कि जंग का हल सिर्फ इन शर्तों के जरिए ही निकलेगा। पेजेशकियन ने लिखा, “इस जंग को, जिसे यहूदियों और अमेरिका ने शुरू किया है, को खत्म करने का एक मात्र तरीका है, ईरान के कानूनी अधिकारों को मान्यता देना, युद्ध का हर्जाना देना और भविष्य में हमले के खिलाफ पक्की अंतर्राष्ट्रीय गारंटी देना।”
ट्रंप ने किया है बड़ा दावा
दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध जीतने का दावा किया है। उन्होंने कहा है कि ईरान में अब सैन्य लक्ष्यों के नाम पर व्यावहारिक रूप से कुछ भी नहीं बचा है। ट्रंप ने ‘एक्सियोस’ को दिए एक फोन इंटरव्यू में कहा, “युद्ध बहुत शानदार चल रहा है। हम अपने निर्धारित समय से काफी आगे हैं।” उन्होंने बताया कि हमलों ने उम्मीद से कहीं अधिक नुकसान पहुंचाया है। उनके मुताबिक शुरुआती छह घंटों में ही उन्होंने उससे अधिक तबाही मचाई है जितना संभव माना जा रहा था। ट्रंप ने अपने बयान में कहा, “यह बदला है। वे पिछले 47 वर्षों से जो मौत और विनाश फैला रहे थे, यह उसकी कीमत है। वे इतनी आसानी से नहीं बच पाएंगे।” उन्होंने यह भी कहा, “जब भी मैं चाहूंगा कि यह खत्म हो जाए, यह खत्म हो जाएगा।”
2000 से ज्यादा की मौत
इस बीच इस युद्ध में मरने वालों की संख्या अब 2,100 के करीब पहुंच गई है। ईरान की एक मानवाधिकार संस्था ने 1,262 नागरिकों और 190 सैन्य कर्मियों की मृत्यु की पुष्टि की है। इसके अलावा लेबनान में 570 से अधिक, इराक/कुर्द के 22, इजरायल के 14, कुवैत के 12, यूएई के 6, सऊदी अरब के तीन, बहरीन के दो और ओमान में एक नागरिक की मौत हो चुकी है।
वहीं समुद्री सुरक्षा को लेकर हालात गंभीर होते जा रहे हैं। बुधवार सुबह ही समुद्री रास्ते ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ में तीन अलग-अलग मालवाहक जहाजों को निशाना बनाया गया। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने थाईलैंड के झंडे वाले जहाज ‘मयूरी नारी’ और लाइबेरियाई ध्वज वाले ‘एक्सप्रेस रोम’ पर हमले की जिम्मेदारी ली है। ईरान का दावा है कि इन जहाजों ने चेतावनी की अनदेखी कर अवैध रूप से जलडमरूमध्य पार करने की कोशिश की थी। आईआरजीसी के नौसेना प्रमुख अलीरेज़ा तंगसिरी ने स्पष्ट किया कि जो जहाज चेतावनियों को नजरअंदाज करेंगे, उन्हें गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ेगा।
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