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युद्ध का खर्च होर्मुज स्ट्रेट से निकालेगा ईरान? सभी जहाजों पर टैक्स लगाने की तैयारी

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Source :- LIVE HINDUSTAN

अमेरिका और इजरायल के साथ जंग में उलझे ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से पैसा कमाने की एक नई तकनीक खोज निकाली है। एक ईरानी सांसद के मुताबिक तेहरान अब इस स्ट्रेट से निकलने वाले जहाजों पर टैक्स लगाने की तैयारी कर रहा है।

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध ने वैश्विक राजनीति के लिए नया संकट पैदा कर दिया है। युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान की तरफ से लगातार होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर हमले कर रहा है। अभी तक केवल उन ही देशों के जहाजों को यहां से निकलने की इजाजत मिली है, जो इस युद्ध में या तो निष्पक्ष हैं या फिर ईरान के करीबी हैं। अब सामने आई एक रिपोर्ट के मुताबिक ईरान इस स्ट्रेट से निकलने वाले जहाजों के ऊपर टैक्स लगाने की योजना बना रहा है। गुरुवार को एक ईरानी सांसद ने इस पर ज्यादा जानकारी देते हुए कहा कि संसद में एक ऐसा प्रस्ताव लाया गया है। यह कदम उस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर तेहरान की बढ़ती पकड़ से आर्थिक लाभ कमाने की कोशिश माना जा रहा है, जिसके जरिए दुनिया के लगभग पाँचवें हिस्से का तेल और तरलीकृत गैस गुजरती है।

ईरानी स्टूडेंट्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, ईरानी सांसद ने कहा कि तेहरान संसद एक ऐसे विधेयक पर विचार कर रही है, जिसके तहत होर्मुज से निकलने वाले शिपिंग, ऊर्जा और खाद्य आपूर्ति करने वाले जहाज को यहां से निकलने पर टोल टैक्स देना होगा। इससे पहले भी ईरान के सर्वोच्च नेता के सलाहकार ने कहा ता कि युद्ध के खत्म होने के बाद ईरान होर्मुज के लिए एक नई व्यवस्था लागू कर सकता है। इसके तहत तेहरान उन देशों के ऊपर प्रतिबंध लगा सकेगा, जिसने उसके ऊपर प्रतिबंध लगाए हुए हैं।

आपको बता दें, अमेरिका के दबाव में यूरोप और दुनियाभर के देश ईरान से तेल या गैस नहीं खरीदते हैं। ऐसी स्थिति में ईरान का ज्यादातर तेल चीन जाता है या फिर ब्लैक मार्केट के जरिए पाकिस्तान पहुंचता है।

खाड़ी देशों से घिरे इस होर्मुज स्ट्रेट से होकर दुनिया का 20 फीसदी कच्चा तेल और गैस सप्लाई होता है। ऐसे में अगर ईरान टैक्स कि व्यवस्था शुरू करता है, तो वह उसके लिए एक नया आर्थिक सोर्स होगा। युद्ध शुरू होने के बाद से लेकर अभी तक ईरान ने यहां से निकलने वाले करीब 20 जहाजों को निशाना बनाया है। कई टैंकर ड्रोन और मिसाइलों से निशाना बनाए गए, आग लग गई या उन्हें अपनी यात्रा बीच में छोड़नी पड़ी। इन घटनाओं में कंटेनर जहाज और बल्क कैरियर भी शामिल हैं, जिन पर ड्रोन या मिसाइल से हमला हुआ, जिससे चालक दल को जहाज छोड़ना पड़ा और जहाजों में आग लग गई। इसके अलावा उसने अमेरिका, इजरायल और यूरोप के तमाम जहाजों को यहां से निकलने की इजाजत नहीं दी है।

होर्मुज के बंद होने का मामला कितना बड़ा है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कुछ दिनों पहले तक यूरोपीय देशों के साथ यूक्रेन के मुद्दे पर बहस करने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति चीन समेत तमाम देशों से यहां आकर मदद करने के लिए कह रहे हैं। इस पर नाटो के सदस्य देशों ने भी इनकार कर दिया है। ऐसे में ट्रंप लगातार नाटो देशों को परोक्ष रूप से धमकी देते हुए नजर आ रहे हैं। चीन और भारत के जहाजों के यहां से सुरक्षित निकलने को भी पश्चिमी मीडिया में जलन की नजरों से देखा जा रहा है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN