Home राष्ट्रीय समाचार ‘मैं कई दिनों से सोई नहीं हूं’: एक महीने के युद्ध के...

‘मैं कई दिनों से सोई नहीं हूं’: एक महीने के युद्ध के बाद ईरान में बढ़ती हताशा

10
0

Source :- BBC INDIA

1 अप्रैल को सेंट्रल तेहरान में हुए एक हवाई हमले के बाद उठता धुआं

इमेज स्रोत, EPA

(चेतावनी: इस आर्टिकल में ऐसे विवरण हैं जो कुछ पाठकों को विचलित कर सकते हैं.)

उस पल तक युद्ध ऐसी चीज़ थी जो तेहरान के दूसरे हिस्सों में हो रही थी और इसने ‘सेतारेह’ और उनके साथियों की ज़िंदगी को छुआ नहीं था. फिर उन्होंने एक डरावनी आवाज़ सुनी और इसका कंपन उनके ऑफिस तक पहुँच गया.

उन्होंने अपने साथ काम करने वालों को आवाज़ दी, “मुझे लगता है कि यह एक बम है.”

वो अपनी डेस्क छोड़कर सीढ़ियों से बिल्डिंग की छत पर चढ़ गईं.

वह याद करती हैं, “हमने आसमान में धुआँ उठते देखा, लेकिन हमें नहीं पता था कि किस जगह को टारगेट किया गया था. उसके बाद, कंपनी में काम करने वाले सभी लोग घबरा गए. लोग चिल्ला रहे थे, चीख रहे थे और भाग रहे थे. एक से दो घंटे तक हालात ऐसे ही पूरी तरह से अफ़रा-तफ़री वाले रहे.”

उसी दिन उनके बॉस ने कारोबार बंद कर दिया और अपने स्टाफ़ को निकाल दिया.

बीबीसी हिंदी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

ईरान में सरकार की कड़ी सेंसरशिप के बावजूद बीबीसी ग्राउंड पर मौजूद भरोसेमंद सूत्रों के सहारे देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले कई ईरानियों से जानकारी हासिल करने में सफल रहा है.

हम सेतारेह का असली नाम नहीं बता सकते, न ही यह बता सकते हैं कि वह किस तरह का काम करती हैं. हम ऐसी कोई भी जानकारी नहीं दे सकते जिससे सरकार की ख़ुफिया पुलिस उन्हें पहचान ले.

ऑफ़िस के क़रीब बमबारी और सबकुछ बदल गया

ईरान के अलग-अलग इलाक़ों में अमेरिका और इसराइल के हमले लगातार जारी हैं. तेहरान पर हुए हमले की यह तस्वीर 3 मार्च की है

इमेज स्रोत, Getty Images

हम यह कह सकते हैं कि वह तेहरान की एक युवा महिला हैं, जिन्हें अपने काम पर जाना बहुत पसंद था. जहाँ वह अपने दोस्तों से मिल सकती थीं, अपनी ज़िंदगी की बातें शेयर कर सकती थीं और ज़ाहिर है, उन्हें हर हफ़्ते काम के बदले पैसे मिलने की गारंटी भी थी.

अब, हर रात होने वाली बमबारी की वजह से वो चैन से सो नहीं सकती हैं. वह जागती रहती हैं और अपने आज और कल के बारे में सोचकर परेशान होती रहती हैं.

वह कहती हैं, “मैं सच कह सकती हूँ कि मैं कई रातों (और दिनों) से लगातार सो नहीं पाई हूँ. मैं बहुत हेवी पेन किलर्स दवाएँ लेकर आराम करने की कोशिश करती हूँ, ताकि सो सकूँ. मेरी घबराहट इतनी ज़्यादा है कि इसका असर मेरे शरीर पर भी पड़ने लगा है.”

“जब मैं भविष्य के बारे में सोचती हूँ और उन हालात की कल्पना करती हूँ, तो मुझे सच में समझ नहीं आता कि मैं क्या करूँ.”

‘उन हालात’ से उनका मतलब है आर्थिक तंगी और भविष्य में शासन और उसके विरोधियों के बीच सड़कों पर होने वाली लड़ाई का डर. इस युद्ध की वजह से सेतारेह की नौकरी चली गई है और उनके पास पैसे भी ख़त्म होते जा रहे हैं.

लाखों अन्य ईरानी भी ऐसी ही स्थिति में हैं. युद्ध शुरू होने से पहले ही देश की अर्थव्यवस्था गहरे संकट में थी, और पिछले साल खाने-पीने की चीज़ों की कीमतें 60% तक बढ़ गई थीं.

सितारेह लोगों की बढ़ती हताशा के बारे में बताती हैं, क्योंकि उनके पास गुज़ारा करने के लिए संसाधन ख़त्म होते जा रहे हैं.

तेहरान का एक बाज़ार

इमेज स्रोत, EPA

उनका कहना है, “हम तो अब ज़रूरी भोजन भी नहीं ख़रीद पा रहे हैं. हमारी जेब में जितने पैसे हैं, वे बाज़ार की कीमतों के मुक़ाबले कुछ भी नहीं हैं. ईरान पर सालों से प्रतिबंध भी लगे हुए हैं, और इस्लामिक रिपब्लिक की वजह से पैदा हुई समस्याओं का मतलब है कि इस दौरान हम कोई बचत नहीं कर पाए.”

“कम से कम इतनी तो बिल्कुल नहीं कि अभी गुज़ारा कर सकें. सीधे शब्दों में कहूँ तो, जिन लोगों के बारे में मुझे लगता था कि मैं शायद उनसे उधार ले लूंगी, उनके पास भी अब कुछ नहीं बचा है.”

आर्थिक तंगी की वजह से ही साल 2025 के आख़िर और 2026 की शुरुआत में पूरे देश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे, और सेतारेह का मानना ​​है कि ऐसा फिर से होगा.

वह कहती हैं, “मुझे नहीं पता कि बेरोज़गारी की इस विशाल लहर को कैसे संभाला जाएगा. यहाँ कोई सपोर्ट सिस्टम नहीं है और सरकार इन सभी बेरोज़गार लोगों के लिए कुछ भी नहीं करेगी. मेरा मानना ​​है कि अगर यह युद्ध बिना किसी नतीजे के ख़त्म हो गया, तो असली युद्ध उसके बाद शुरू होगा.”

सेतारेह जिस नतीजे की उम्मीद कर रही हैं, वह है मौजूदा शासन का अंत.

‘गर्भवती माँ और बच्चे की मौत’

2 मार्च को तहरान में धमाके बाद की तस्वीर

इमेज स्रोत, Getty Images

हमें ज़मीनी स्तर पर मौजूद अपने सूत्रों से छह अलग-अलग शहरों से जानकारी मिली. ये बातचीत समाज के अलग-अलग तबकों के लोगों के साथ हुई थी. जैसे कि दुकानदार, टैक्सी ड्राइवर, सरकारी कर्मचारी और अन्य लोग.

सभी ने बढ़ते आर्थिक दबाव के बारे में बताया और उनमें से ज़्यादातर लोगों ने इस उम्मीद का ज़िक्र किया कि शायद युद्ध की वजह से सरकार गिर जाएगी.

‘टीना’ तेहरान के बाहर एक अस्पताल में नर्स हैं और दवाओं की कमी को लेकर चिंतित है.

वह कहती हैं, “अभी यह कमी बड़े पैमाने पर नहीं हुई है, लेकिन इसकी शुरुआत हो चुकी है.”

“सबसे अहम बात यह है कि इस युद्ध की आंच अस्पतालों तक नहीं पहुँचनी चाहिए. अगर यह संघर्ष जारी रहता है, बुनियादी ढाँचे को निशाना बनाया जाता है और दवाओं का आयात नहीं हो पाता है तो हमें बहुत गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ेगा.”

हाल के हफ़्तों में युद्ध के जो दृश्य टीना ने देखे हैं, वे उनके ज़हन में गहरे उतर गए हैं.

बमबारी के बाद अस्पताल में ऐसी लाशें लाई गईं “जिन्हें पहचानना भी मुश्किल था. किसी के हाथ नहीं थे, तो किसी के पैर नहीं. यह सब बेहद खौफ़नाक था.”

एक याद जो बार-बार उनके ज़हन में कौंधती है, वह युद्ध की शुरुआत में ही एक हवाई हमले की चपेट में आई एक गर्भवती युवती से जुड़ी है.

टीना बताती हैं, “उनका घर एक सैन्य ठिकाने के बेहद क़रीब था. उनके इलाक़े में हुई बमबारी की वजह से घर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था. जब उन्हें अस्पताल लाया गया, तब न तो माँ जीवित थी और न ही गर्भ में पल रहा शिशु.”

“दोनों की मौत हो गई थी. वह बच्चे को जन्म देने से बस दो महीने दूर थींं, लेकिन दुख की बात है कि न तो वह बचीं और न ही उनका बच्चा. यह एक बहुत ही भयानक स्थिति थी.”

‘ईरान-इराक़ युद्ध की तरह हालात’

इराक़ी सैनिक और टैंक

इमेज स्रोत, Getty Images

टीना के बचपन की कहानियों ने इस तस्वीर को और भी ज़्यादा दिल को छू लेने वाला बना दिया है. 1980 के दशक में ईरान-इराक़ युद्ध के दौरान उनकी माँ गर्भवती थीं, और उन्होंने टीना को बताया था कि जब इराक़ी मिसाइलें उनके शहर पर गिरती थीं, तो उन्हें भागकर शेल्टर में छिपना पड़ता था.

अनुमान लगाया जाता है कि इस संघर्ष में लगभग दस लाख लोग मारे गए थे. इनमें ईरानी और इराक़ी, सैनिक और आम नागरिक शामिल थे. मरने वालों में सबसे ज़्यादा ईरानी ही थे.

युद्ध के इस इतिहास ने टीना को नर्स के तौर पर काम करने के लिए प्रेरित किया.

वह कहती हैं, “उन कहानियों को सुनकर मैं हमेशा रुककर सोचने लगती थी. मैं ख़ुद को उन हालात में रखकर देखती थी और ख़ुद को उनकी जगह पर महसूस करती थी. अब मैं ख़ुद को ठीक वैसी ही स्थिति में पाती हूँ, जिसका सामना कभी मेरी माँ ने किया था. मुझे यकीन नहीं हो रहा कि इतिहास इतनी जल्दी ख़ुद को कैसे दोहराता है.”

ईरान में विरोध का कोई भी सार्वजनिक प्रदर्शन बेहद खतरनाक है. सरकार ने सड़कों पर गश्त करने के लिए अपनी आंतरिक सुरक्षा बलों और वफादार समर्थकों को तैनात किया है.

वहाँ गिरफ्तारियाँ, यातनाएँ और फाँसी की सज़ाएँ होती हैं. ईरानियों को इस बात में कोई संदेह नहीं है कि अगर वे अपनी आवाज़ उठाते हैं, तो उन्हें किस तरह के ख़तरे का सामना करना पड़ सकता है.

बेहतर कल की उम्मीद

31 मार्च को तेहरान की सड़क पर एक सुरक्षाकर्मी

इमेज स्रोत, AFP

जनवरी में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान, सरकार ने अपने ही हज़ारों नागरिकों को मार डाला था.

पहले एक राजनीतिक क़ैदी रह चुके ‘बेहनाम’ का मानना ​​है कि सरकार आसानी से फिर से ऐसा कर सकती है.

वह अपने फ्लैट में एंटीबायोटिक्स और पेन किलर्स दवाओं का स्टॉक रखते हैं, ताकि अगर सड़कों पर फिर से हिंसा भड़कती है तो वे काम आ सकें.

पिछले प्रदर्शनों के दौरान गोली लगने के बाद से वह अभी भी छिपे हुए हैं. अपने धड़ का एक एक्स-रे दिखाते हुए, बेहनाम उन धातु के टुकड़ों को दिखाते हैं जो अभी भी उनके शरीर में फँसे हुए हैं.

वह कहते हैं, “उन्होंने एक गली में हम पर घात लगाकर हमला किया था. वह गली चौराहे की ओर जाती है. उन्होंने गोलियाँ चलाईं और आँसू गैस के गोले छोड़े.”

“एक बार जब आप यह देख लेते हैं कि आपकी जान कितनी आसानी से ख़तरे में पड़ सकती है. एक छोटी सी घटना या किस्मत का कोई फेर मौत या ज़िंदगी का फैसला कर सकती है तो उसके बाद, आपकी ज़िंदगी की कीमत आपकी नज़र में पहले जैसी नहीं रह जाती. यह अनुभव आपको अपनी कम परवाह करना सिखा देता है.”

बचपन में, वह अपने माता-पिता से शासन की हिंसा के बारे में कहानियाँ सुनते थे. उनके जीवन में डर ही सबसे बड़ी चीज़ थी.

इनमें ऐसी कहानियाँ थीं कि रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने परिवार के सदस्यों के नाखून तक उखाड़ दिए थे. उन्होंने अपने एक रिश्तेदार के अपमान और दर्द के बारे में भी सुना था, जिन्हें यातना देते समय उनके अंडकोषों से भारी वज़न बाँध दिया गया था.

वह कहते हैं, “हम सब ऐसे माहौल में बड़े हुए जहाँ हमारे परिवार में कोई न कोई प्रतिभाशाली व्यक्ति होता था. कोई चचेरा भाई, कोई चाचा, या कोई चाची. उनका भविष्य सिर्फ़ इसलिए बर्बाद हो गया क्योंकि परिवार का कोई दूसरा सदस्य किसी प्रतिबंधित राजनीतिक गतिविधि में शामिल था.”

वह आगे कहते हैं, “मैं तब तक ठीक नहीं हो पाऊँगा जब तक हम आज़ाद नहीं हो जाते. एक आज़ाद दुनिया में रहते हुए, उस तकलीफ़ को पीछे मुड़कर नहीं देख पाते जो हमने बिना आज़ादी की दुनिया में झेली, और अंत में उस पर हँस न लें. मुझे पूरा यकीन है कि वह दिन ज़रूर आएगा.”

ईरान युद्ध शुरू हुए एक महीना बीत चुका है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर बमबारी करके उसे “पाषाण युग में वापस पहुँचा देने” की धमकी दे रहे हैं और ईरानी शासन का दमन भी बढ़ता जा रहा है.

ऐसे में हँसी-खुशी का वह समय अभी बहुत दूर नज़र आता है.

(एलिस डोयार्ड की अतिरिक्त रिपोर्टिंग)

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

SOURCE : BBC NEWS