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मिडिल ईस्ट में बड़ा संकट: युद्ध से पर्यटन उद्योग को झटका; 27 फीसदी तक गिरावट संभव

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Source :- LIVE HINDUSTAN

अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष अब मिडिल ईस्ट के पर्यटन क्षेत्र पर स्पष्ट रूप से प्रभाव डाल रहा है। अनुमान है कि इस वर्ष क्षेत्र में आने वाले अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या में 11 से 27 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है।

अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष अब मिडिल ईस्ट के पर्यटन क्षेत्र पर स्पष्ट रूप से प्रभाव डाल रहा है। अनुमान है कि इस वर्ष क्षेत्र में आने वाले अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या में 11 से 27 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है। टूरिज्म इकोनॉमिक्स ने मंगलवार को जारी अपने आकलन के अनुसार बताया कि अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष के कारण मध्य पूर्व में 23 से 38 मिलियन तक कम विदेशी पर्यटक आ सकते हैं। इससे क्षेत्र को पर्यटन व्यय में 34 से 56 अरब डॉलर तक का नुकसान होने की आशंका है।

गौरतलब है कि दिसंबर में जारी पूर्वानुमान में इस वर्ष 13 प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद जताई गई थी, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों ने पूरी स्थिति बदल दी है। रिपोर्ट के अनुसार, हवाई क्षेत्रों के बंद होने, हजारों उड़ानों के रद्द होने, बढ़ती सुरक्षा चिंताओं और विभिन्न देशों द्वारा जारी यात्रा सलाह (ट्रैवल एडवाइजरी) के कारण यह गिरावट देखी जा रही है। विशेष रूप से खाड़ी देशों पर इसका सबसे अधिक प्रभाव पड़ा है, क्योंकि ये वैश्विक हवाई ट्रांजिट हब के रूप में कार्य करते हैं।

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) सबसे अधिक प्रभावित देशों में शामिल है। दुबई और अबू धाबी जैसे प्रमुख एयर हब में हजारों उड़ानें रद्द हो चुकी हैं और होटल बुकिंग में 80 प्रतिशत तक कैंसिलेशन दर्ज किया गया है। पिछले वर्ष दुबई ने 19.59 मिलियन पर्यटकों का रिकॉर्ड बनाया था, लेकिन मौजूदा संकट के कारण स्टॉपओवर और ट्रांजिट पर्यटन लगभग पूरी तरह ठप हो गया है। एमिरेट्स और एतिहाद जैसी एयरलाइंस से प्रतिदिन यात्रा करने वाले 90 हजार से अधिक ट्रांजिट यात्रियों पर असर पड़ा है।

कतर की राजधानी दोहा स्थित हमाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट भी एक प्रमुख ट्रांजिट हब है। ईरान संकट के चलते कतर एयरवेज की कई उड़ानें रद्द हुई हैं, जिससे हजारों यात्री फंस गए हैं। होटल ऑक्यूपेंसी में तेज गिरावट देखी जा रही है और क्षेत्रीय पर्यटन केंद्र के रूप में कतर की छवि प्रभावित हुई है। बिजनेस और लग्जरी पर्यटन पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका है।

सऊदी अरब में स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। रियाद में अमेरिकी दूतावास पर हमले की घटना के बाद सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ गई हैं। रमजान के दौरान उमराह और हज से जुड़े यात्रियों पर भी असर पड़ा है। विजन 2030 के तहत पर्यटन को बढ़ावा देने की योजनाएं फिलहाल संकट में हैं और होटल सेक्टर में 80 प्रतिशत तक बुकिंग रद्द होने की खबरें हैं, हालांकि अभी तक पुष्टि नहीं हुई है।

वहीं, इजरायल जो सीधे युद्ध क्षेत्र में है, वहां पर्यटन में 70 से 80 प्रतिशत तक गिरावट का अनुमान है। यरुशलम सहित धार्मिक स्थलों पर आने वाले तीर्थयात्रियों की संख्या लगभग शून्य हो गई है। क्रूज और ग्रुप टूर बड़े पैमाने पर रद्द किए गए हैं। दूसरी ओर अन्य जीसीसी देश जैसे बहरीन, ओमान और कुवैत भी ईरान से जुड़े तनाव के कारण प्रभावित हुए हैं। एयरपोर्ट संचालन में बाधा और सुरक्षा को लेकर नकारात्मक धारणा के चलते पर्यटन तथा बिजनेस यात्रा में कमी आई है।

ईरान में पर्यटन पहले से ही सीमित था, जो अब लगभग पूरी तरह बंद हो चुका है। लेबनान पहले से ही संघर्ष से जूझ रहा था और वर्तमान हालात ने स्थिति को और बदतर बना दिया है। जॉर्डन और मिस्र पर भी अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ा है, हालांकि यहां गिरावट खाड़ी देशों की तुलना में कम है।

कुल मिलाकर कहा जाए तो क्षेत्रीय स्तर पर 11 से 27 प्रतिशत तक की गिरावट का अनुमान है, जिससे 23 से 38 मिलियन कम अंतरराष्ट्रीय पर्यटक आ सकते हैं। पर्यटन व्यय में 34 से 56 अरब डॉलर तक की कमी होने की आशंका है। विशेषज्ञों का कहना है कि दुबई, दोहा और अबू धाबी जैसे प्रमुख हवाई हब के बाधित होने से वैश्विक यात्रा नेटवर्क पर व्यापक प्रभाव पड़ा है, जिसका सीधा खामियाजा मध्य पूर्व के पर्यटन उद्योग को भुगतना पड़ रहा है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN