Home विश्व समाचार मिडिल ईस्ट में अमेरिका की मिलिट्री पावर बढ़ते ही रूस का बड़ा...

मिडिल ईस्ट में अमेरिका की मिलिट्री पावर बढ़ते ही रूस का बड़ा बयान, ईरान को दी ‘सख्त’ सलाह

10
0

Source :- LIVE HINDUSTAN

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका कभी भी ईरान पर हमला कर सकता है। इस बढ़ते तनाव के बीच रूस ने बड़ा बयान दिया है। गुरुवार को रूस ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है।

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका कभी भी ईरान पर हमला कर सकता है। इस बढ़ते तनाव के बीच रूस ने बड़ा बयान दिया है। गुरुवार को रूस ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। इससे पहले मॉस्को और तेहरान ने संयुक्त नौसैनिक अभ्यास किया था। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि ये अभ्यास पहले से ही नियोजित थे और इन पर पहले से सहमति बन चुकी थी।

उन्होंने आगे कहा कि रूस ईरान के साथ अपने संबंधों को विकसित करना जारी रखेगा और ऐसा करते हुए हम अपने ईरानी मित्रों तथा क्षेत्र के सभी पक्षों से संयम और विवेक बरतने का आह्वान करते हैं। पेस्कोव ने जोर दिया कि मॉस्को विभिन्न मुद्दों के समाधान में राजनीतिक और राजनयिक साधनों को पूर्ण प्राथमिकता देने की वकालत कर रहा है। उन्होंने कहा कि हम वर्तमान में इस क्षेत्र में तनाव में अभूतपूर्व वृद्धि देख रहे हैं, लेकिन हमें अभी भी उम्मीद है कि राजनीतिक और राजनयिक साधनों तथा बातचीत के माध्यम से समाधान की तलाश जारी रहेगी।

ट्रंप की मांगों को खारीज कर रहा ईरान

ईरान परमाणु वार्ताओं में यदि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मांगों को ईरान लगातार खारिज करता रहा, तो अमेरिका उसके खिलाफ जल्द ही सैन्य अभियान शुरू कर सकता है। सीएनएन की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से यह दावा किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने अभी तक इस संबंध में कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है। वाइट हाउस को जानकारी दी गई है कि पश्चिमी एशिया में हाल के दिनों में वायु और नौसैनिक संसाधनों की भारी तैनाती के बाद अमेरिकी सेना सप्ताहांत तक संभावित हमले के लिए तैयार हो सकती है। एक सूत्र ने बताया कि ट्रंप निजी तौर पर सैन्य कार्रवाई के पक्ष और विपक्ष दोनों के तर्क दे चुके हैं तथा सर्वोत्तम विकल्प पर सलाहकारों और सहयोगियों से राय ले रहे हैं।

पश्चिमी एशिया में अमेरिका की व्यापक सैन्य तैनाती इस ओर इशारा करती है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ बमबारी अभियान शुरू करने की तैयारी में हो सकता है। क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिकों की संख्या और संसाधन ऐसे बड़े पैमाने के अभियान के लिए पर्याप्त बताए जा रहे हैं, जो कई सप्ताह तक चल सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 24 घंटों में ही अमेरिका ने 50 अतिरिक्त एफ-35, एफ-22 और एफ-16 लड़ाकू विमान क्षेत्र में तैनात किए हैं। इसके अलावा एक और विमानवाहक पोत के क्षेत्र की ओर रवाना होने तथा पहले से सैकड़ों स्ट्राइक, समर्थन और कमांड विमानों की मौजूदगी को देखते हुए यह तैनाती असामान्य मानी जा रही है।

90 फीसदी तक सैन्य कार्रवाई की संभावना

पूर्व पेंटागन अधिकारी और अटलांटिक परिषद के सदस्य एलेक्स प्लिट्सस ने इस सैन्य जमावड़े को हाल के दशकों में अभूतपूर्व बताया है। उन्होंने कहा कि भूमि-आधारित आक्रमण, विमान, कमान एवं नियंत्रण संसाधन तथा समुद्र-आधारित प्लेटफॉर्म का ऐसा संयोजन लंबे समय से नहीं देखा गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि हाल के दिनों में 150 से अधिक सैन्य परिवहन उड़ानों के जरिए हथियार और गोला-बारूद क्षेत्र में पहुंचाया गया है। वहीं, एक्सियोस ने राष्ट्रपति ट्रंप के एक अज्ञात सलाहकार के हवाले से बताया कि आने वाले हफ्तों में ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की संभावना 90 प्रतिशत तक है।

‘द वॉर जोन’ ने ओपन-सोर्स उड़ान ट्रैकिंग डेटा के आधार पर बताया कि यू-2 ड्रैगन लेडी टोही विमान, एफ-16 फाइटिंग फाल्कन, एफ-22 रैप्टर लड़ाकू विमान और ई-3 सेंट्री एयरबोर्न अर्ली वार्निंग विमान अटलांटिक पार कर चुके हैं या हाल ही में यूरोप पहुंचे हैं। इसके अनुसार, अमेरिकी सेंट्रल कमान के क्षेत्र में इस समय 12 अमेरिकी युद्धपोत सक्रिय हैं और पश्चिमी एशिया में विभिन्न ठिकानों पर 30,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड के क्षेत्र में पहुंचने के बाद यह मध्य पूर्व में तैनात दूसरा अमेरिकी विमानवाहक पोत होगा, जिससे अमेरिकी नौसैनिक वायु शक्ति में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। मौजूदा तैनाती के साथ ट्रंप बिना जमीनी सेना उतारे बड़े पैमाने पर वायु और नौसैनिक अभियान का आदेश दे सकते हैं।

ईरान के लिए समझौता करना बुद्धिमानी

शक्ति प्रदर्शन के बावजूद वाइट हाउस का कहना है कि राष्ट्रपति की प्राथमिकता अब भी कूटनीति है। वाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि कूटनीति हमेशा उनकी पहली पसंद है और ईरान के लिए समझौता करना बुद्धिमानी होगी। उप राष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस सप्ताह कहा कि ईरान ट्रंप की वार्ता संबंधी कई ऐसी बातों को स्वीकार करने को तैयार नहीं है, जिनसे समझौता नहीं किया जा सकता। अमेरिका के लिए ईरान का परमाणु कार्यक्रम, खासकर उच्च संवर्धित यूरेनियम का भंडार, मुख्य चिंता बना हुआ है। इजरायल ईरान के बढ़ते बैलिस्टिक मिसाइल जखीरे पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहा है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN