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माक्रों बोले, राजनीतिक और आर्थिक संकट का सामना कर रहा यूरोप

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भारत और दुनिया की अहम खबरें एक साथ, एक ही जगह पढ़ने के लिए आप सही पेज पर हैं.इस लाइव ब्लॉग को हम लगातार अपडेट कर रहे हैं, ताकि ताजा खबरें आप तक पहुंचा सकें.- सोशल मीडिया कंपनियों को तीन घंटे के अंदर हटाना होगा “गैरकानूनी कंटेंट”- शांति का संदेश लेकर चले बौद्ध भिक्षुओं ने पूरी की 3,700 किमी लंबी पदयात्रा- यूरोप में 2026 में तेजी से बढ़ेंगे खाने-पीने की चीजों के दाम: सर्वे- विवाद के बाद बदला जाएगा फिल्म “घूसखोर पंडत” का नाम- हर दिन चाय-कॉफी पीने वालों में कम होगा डिमेंशिया का खतरा: स्टडी- 2025 भ्रष्टाचार सूचकांक: डेनमार्क टॉप पर, भारत की रैंकिंग सुधरी- लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ कांग्रेस का अविश्वास प्रस्ताव- अमेरिका-बांग्लादेश का व्यापार समझौता, टैरिफ घटकर 19 फीसदी हुआ- राहुल गांधी ने पेंगुइन इंडिया पर लगाया झूठ बोलने का आरोपमाक्रों की चेतावनी, राजनीतिक और आर्थिक संकट के मुहाने पर खड़ा है यूरोपफ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल माक्रों ने चेतावनी दी है कि यूरोप एक गंभीर राजनीतिक और आर्थिक संकट का सामना कर रहा है.गुरुवार, 12 फरवरी को होने वाली यूरोपीय संघ (ईयू) के नेताओं की बैठक से पहले कई अखबारों से बात करते हुए, माक्रों ने कहा कि अमेरिका और चीन से मिल रही कड़ी प्रतिस्पर्धा के सामने यूरोप के पीछे छूट जाने का खतरा है.माक्रों ने कहा, “व्यापार के मोर्चे पर हमारे सामने चीनी सुनामी है और अमेरिकी पक्ष की ओर से पल-पल की अस्थिरता है.ये दोनों संकट मिलकर एक गहरा झटका हैं” उन्होंने यूरोपीय नेताओं से अपील की कि वे “ग्रीनलैंड मोमेंट”, जो कि बाहरी खतरों के प्रति एक चेतावनी है, को समझें और आर्थिक सुधारों को लागू करें ताकि अमेरिका और चीन पर निर्भरता कम की जा सके.यह भी पढ़ें: ट्रंप के प्रस्ताव पर अमेरिका, यूक्रेन और ई3 के बीच बैठकेंगुरुवार के शिखर सम्मेलन में फ्रांस के “मेड इन यूरोप” प्रस्ताव पर चर्चा होगी.इस रणनीति के तहत स्थानीय रूप से उत्पादित सामानों में एक निश्चित मात्रा में यूरोपीय सामग्री का होना अनिवार्य होगा.हालांकि, इस योजना ने ईयू देशों को बांट दिया है.जर्मनी, इटली और नॉर्डिक देशों के कार निर्माताओं और सरकारों का कहना है कि इतने सख्त नियम निवेशकों को डरा सकते हैं और निवेश को दूर कर सकते हैं.बांग्लादेश चुनाव: आधे से ज्यादा मतदान केंद्रों पर हिंसा का खतराबांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद पहली बार आम चुनाव होने जा रहे हैं.17 करोड़ की आबादी वाले इस देश में 12 फरवरी को मतदान होना है.इसके लिए देशभर में 42 हजार मतदान केंद्र बनाए गए हैं.बांग्लादेश के पुलिस प्रमुख बहरुल आलम के मुताबिक, अशांति, हिंसा या मतपत्रों में हेराफेरी की आशंका के चलते “24,000 से अधिक मतदान केंद्रों को उच्च जोखिम वाले या मध्यम जोखिम वाले” केंद्रों के रूप में चिह्नित किया गया है.बांग्लादेश में अब मीडिया भी कट्टरपंथी ताकतों के निशाने परउन्होंने बताया कि स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए मतदान केंद्रों पर 1.57 लाख से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया जाएगा.सेना और अन्य सुरक्षा बलों के करीब एक लाख जवान भी इस काम में पुलिस की मदद करेंगे.आलम ने बताया कि जोखिम वाले केंद्रों पर पुलिस पहली बार बॉडी कैम पहनकर पेट्रोलिंग करेगी.इसका मकसद निगरानी और पारदर्शिता को बढ़ाना है.शेख हसीना ने चेताया, उनकी पार्टी के बिना हुआ चुनाव दरार बढ़ाएगाबांग्लादेश में चुनावी प्रक्रिया की शुरुआत 11 दिसंबर को हुई थी और 9 फरवरी को चुनाव प्रचार खत्म हो गया.पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, इस दौरान राजनीतिक झड़पों में पांच लोगों की मौत हुई और 600 से ज्यादा लोग घायल हुए.आलम ने साल 2024 की अशांति के दौरान पुलिस से लूटी गईं करीब 1,300 बंदूकों को लेकर भी चिंता जताई है.अमेरिकी यात्रा पर जाएंगे बेन्यामिन नेतन्याहू, ईरान पर ट्रंप के साथ होगी बातइस्राएली प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू मंगलवार, 10 फरवरी को अमेरिका के लिए रवाना हो रहे हैं, जहां वे राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के साथ ईरान परमाणु समझौते पर महत्वपूर्ण चर्चा करेंगे.इस्राइल ने ईरान के सामने सख्त शर्तें रखी हैं.इनमें सभी यूरेनियम संवर्धन को रोकना, अपने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम में कटौती करना और हमास व हिजबुल्लाह जैसे उग्रवादी समूहों का समर्थन बंद करना शामिल है.हालांकि, ईरान ने इन मांगों को खारिज कर दिया है.तेहरान का कहना है कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम पर केवल कुछ सीमाएं स्वीकार करेगा और वह भी तब जब देश पर लगे आर्थिक प्रतिबंध हटाए जाएं.यह भी पढ़ें: कितनी खतरनाक हैं ईरान की खुफिया एजेंसियां जर्मनी मेंनेतन्याहू की वॉशिंगटन यात्रा पर टिप्पणी करते हुए ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने अमेरिका को इस्राएल के विनाशकारी प्रभाव के प्रति आगाह किया है.उन्होंने कहा कि अमेरिका को दबाव से स्वतंत्र होकर फैसला लेना चाहिए.प्रवक्ता ने इस्राएल पर आरोप लगाया कि वह क्षेत्र में शांति की ओर ले जाने वाली किसी भी कूटनीतिक प्रक्रिया का विरोध कर रहा है.अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत पिछले शुक्रवार को ओमान में शुरू हुई थी.यह बातचीत पिछले महीने ईरान में इस्लामी शासन के खिलाफ हुए बड़े विरोध प्रदर्शनों के ठीक बाद हो रही है, जिसमें सुरक्षा बलों द्वारा हजारों प्रदर्शनकारियों को मारा गया और कई को हिरासत में लिया गया.वहीं, अमेरिका ने संभावित हमलों के लिए क्षेत्र में अपनी सेना के प्रमुख हथियारों को स्टैंडबाय पर तैनात कर दिया है, जिसकी धमकी डॉनल्ड ट्रंप ने बार बार दी है.शांति का संदेश लेकर चले बौद्ध भिक्षुओं ने पूरी की 3,700 किमी लंबी पदयात्राअमेरिका में शांति का संदेश लेकर चले बौद्ध भिक्षुओं की लंबी पदयात्रा मंगलवार, 10 फरवरी को वॉशिंगटन डीसी पहुंचकर समाप्त हो गई.बीते साल अक्टूबर में 19 बौद्ध भिक्षुओं ने टेक्सस से इस 3,700 किलोमीटर लंबी यात्रा की शुरुआत की थी.उन्होंने 108 दिनों में यह यात्रा पूरी की. 108 को बौद्ध, हिंदू और जैन धर्म में एक पवित्र अंक माना जाता है.इस यात्रा का उद्देश्य “पूरे अमेरिका और दुनिया में शांति, प्यार और दया के बारे में जागरूकता” फैलाना है.बौद्ध भिक्षुओं ने अमेरिका के भीषण ठंडे मौसम का सामना करते हुए यह यात्रा पूरी की.कई बौद्ध भिक्षुओं ने तो अपनी ज्यादातर यात्रा नंगे पैर या मोजे पहनकर पूरी की ताकि वे जमीन को महसूस करते रहें.इस यात्रा को देखने के लिए लोगों की भीड़ भी जुटी रही.इस पूरी यात्रा में बौद्ध भिक्षुओं के साथ अलोका नाम का एक कुत्ता भी रहा, जिसे पीस डॉग भी कहा जा रहा है.यह एक भारतीय कुत्ता है, जो साल 2022 में एक पदयात्रा के दौरान बौद्ध भिक्षुओं के संपर्क में आया था.अलोका का नाम संस्कृत से लिया गया है, जिसका अर्थ है ज्ञानोदय.भिक्षुओं का कहना है कि अलोका शांति और करुणा का जीवंत प्रतीक है.सोशल मीडिया कंपनियों को तीन घंटे के अंदर हटाना होगा “गैरकानूनी कंटेंट”भारत सरकार ने मंगलवार, 10 फरवरी को कहा कि अब सोशल मीडिया कंपनियों को नोटिस मिलने के तीन घंटे के अंदर “गैरकानूनी कंटेंट” को अपने प्लेटफॉर्म से हटाना होगा.न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, भारत के आईटी नियमों में बदलाव की वजह से ऐसा होगा और नए नियम 20 फरवरी से लागू हो जाएंगे.फिलहाल, कंटेंट हटाने के लिए सोशल मीडिया कंपनियों को 36 घंटे की समयसीमा दी जाती है.यह समयसीमा घटकर तीन घंटे होने से मेटा, यूट्यूब और एक्स जैसी कंपनियों को इसके पालन में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है.एक्स जैसी कंपनियां पहले ही कंटेंट हटाने के आदेश देने की प्रक्रिया को अदालत में चुनौती दे चुकी हैं.भारत के आईटी नियम सरकार को ऐसे कंटेंट को हटाने का आदेश देने की शक्ति प्रदान करते हैं, जिन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था और यौन अपराधों से संबंधित विभिन्न कानूनों के तहत अवैध माना जाता है.विभिन्न पारदर्शिता रिपोर्टों के अनुसार, भारत सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में कंटेंट हटाने के लिए हजारों की संख्या में आदेश जारी किए हैं.विंटर ओलंपिक में यूक्रेनी रेसर के हेलमेट पर क्यों छिड़ा विवादअंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) ने यूक्रेन के स्केलेटन रेसर व्लादिस्लाव हेरास्केविच को वह हेलमेट पहनने से रोक दिया, जिस पर रूस के साथ युद्ध में मारे गए यूक्रेनी एथलीटों की तस्वीरें छपी थीं.आईओसी के प्रवक्ता मार्क एडम्स ने मंगलवार, 10 फरवरी को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि समिति अपने दोस्तों को याद करने की एथलीटों की इच्छा को पूरी तरह समझती है, लेकिन यह हेलमेट नियमों का उल्लंघन करता है.हालांकि, हेरास्केविच को इसके बदले काली पट्टी बांधने की इजाजत दी गई है.हेलमेट पर किसकी तस्वीरें थीं? इस हेलमेट पर 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद मारे गए एथलीटों की तस्वीरें थीं, जिनमें फिगर स्केटर दिमित्रो शारपर, बॉक्सर पावलो इशचेंको और हॉकी खिलाड़ी ओलेक्सी लोगिनोव शामिल हैं.पदक के दावेदार माने जाने वाले हेरास्केविच ने कहा कि उन्हें समझ नहीं आता कि यह हेलमेट किसी को कैसे चोट पहुंचा सकता है.आईओसी के फैसले से पहले, यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने सोशल मीडिया पर हेरास्केविच का समर्थन किया था.उन्होंने लिखा, “यह सच्चाई असुविधाजनक या अनुचित नहीं हो सकती और न ही इसे खेल आयोजन में राजनीतिक प्रदर्शन कहा जा सकता है.यह पूरी दुनिया को याद दिलाने के लिए है कि आधुनिक रूस क्या है”इन विंटर ओलंपिक खेलों में रूसी एथलीटों को अपने देश के झंडे के तले भाग लेने की अनुमति नहीं है, लेकिन 13 रूसी खिलाड़ी व्यक्तिगत तटस्थ एथलीट के रूप में हिस्सा ले रहे हैं.भारत में 2050 तक दोगुनी हो सकती है कोयले की मांग: रिपोर्टभारत के सरकारी थिंक टैंक नीति आयोग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश में 2050 तक कोयले की मांग दोगुनी हो सकती है.मौजूदा नीतिगत स्थिति में 2050 तक देश में कोयले की मांग बढ़कर 260 करोड़ मीट्रिक टन से अधिक हो जाएगी.इसके बाद इसमें गिरावट आएगी और 2070 में यह करीब 180 करोड़ मीट्रिक टन पर पहुंच जाएगी.साल 2025 में भारत में कोयले की मांग करीब 125 करोड़ मीट्रिक टन रही.रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत “नेट जीरो” के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में भी काम कर रहा है और उससे जुड़ी नीतियों के लागू होने की स्थिति में यह बढ़ोतरी थोड़ी कम होगी.उस स्थिति में साल 2050 में कोयले की मांग करीब 180 करोड़ मीट्रिक टन होगी और 2070 में यह घटकर 161 करोड़ मीट्रिक टन पर पहुंच जाएगी.उस स्थिति में कोयले का इस्तेमाल स्टील और सीमेंट जैसे क्षेत्रों में होगा.पावर हब बनने की कीमत सांसों में राख भरकर चुका रहे कोरबावासीरिपोर्ट में कहा गया है कि निकट भविष्य में कोयले की जरूरत बनी रहेगी और कोयले से दूरी बनाने के लिए भारत को बड़े स्तर पर बैटरी स्टोरेज, परमाणु ऊर्जा में बढ़ोतरी, ग्रिड के विस्तार और कम कीमतों पर नवीकरणीय तकनीकों की जरूरत होगी.रिपोर्ट में उम्मीद जताई गई है कि भविष्य में कोयला आधारित ऊर्जा सयंत्रों का इस्तेमाल बिजली की उच्च मांग या आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए ही किया जाएगा.यूरोप में 2026 में तेजी से बढ़ेंगे खाने-पीने की चीजों के दाम: सर्वेयूरोप के ज्यादातर लोगों को उम्मीद है कि 2026 में किराने के सामान की कीमतें और तेजी से बढ़ेंगी.यूरोस्टेट के आंकड़ों के अनुसार, यूरोपीय संघ में खाद्य महंगाई दर (3. 3 फीसदी) सामान्य महंगाई दर (2.5 फीसदी) से ज्यादा रहने का अनुमान है.हालांकि, यूरोपीय केंद्रीय बैंक का मानना है कि 2026 के अंत तक कीमतें थोड़ी स्थिर हो सकती हैं, लेकिन आम जनता को राहत मिलती नहीं दिख रही है.आईएनजी कंज्यूमर रिसर्च के एक सर्वे में पाया गया कि बढ़ती खाद्य कीमतें उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी चिंता बनी हुई हैं.सर्वे में शामिल कुल 58 फीसदी लोगों ने माना कि अगले 12 महीनों में उनके देश में राशन का सामान और महंगा हो जाएगा.केवल 14 फीसदी लोगों को लगता है कि ऐसा नहीं होगा.यह भी पढ़ें: लगातार क्यों बढ़ रही है चांदी की कीमतयह सर्वे छह यूरोपीय देशों- जर्मनी, स्पेन, नीदरलैंड, बेल्जियम, पोलैंड और रोमानिया में किया गया था.स्पेन को छोड़कर बाकी सभी देशों में महंगाई को लेकर चिंता बहुत ज्यादा है.रोमानिया: यहां सबसे ज्यादा 73 फीसदी लोगों को लगता है कि कीमतें तेजी से बढ़ेंगी बेल्जियम: 66 फीसदी लोग चिंतित हैं नीदरलैंड: 64 फीसदी लोगों को महंगाई बढ़ने का डर है जर्मनी: यहां 57 फीसदी (आधे से ज्यादा) लोगों को राशन महंगा होने की उम्मीद है पोलैंड: यहां यह आंकड़ा 49 फीसदी हैअर्थशास्त्रियों का कहना है कि भले ही आंकड़ों में महंगाई का दबाव कम होता दिख रहा हो, लेकिन आम घरों पर पिछली महंगाई का असर अब भी बरकरार है और लोग अपनी खरीदने की क्षमता (परचेजिंग पॉवर) को लेकर बहुत ज्यादा उम्मीद नहीं कर रहे हैं.हर दिन चाय-कॉफी पीने वालों में कम होगा डिमेंशिया का खतरा: स्टडीएक नए शोध से पता चला है कि रोजाना कॉफी या चाय पीने से दिमाग को उम्र बढ़ने के साथ होने वाली बीमारियों से बचाया जा सकता है.स्टडी के मुताबिक, सीमित मात्रा में कैफीन का सेवन, यानी दिन में दो से तीन कप कॉफी या एक से दो कप चाय, डिमेंशिया के खतरे को कम कर सकता है, मानसिक गिरावट को धीमा कर सकता है और सोचने-समझने की क्षमता को बनाए रखने में मदद करता है.यह भी पढ़ें: पर्यावरण को ज्यादा क्या भाता है: चाय या कॉफी?हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के प्रोफेसर और इस अध्ययन के वरिष्ठ लेखक डैनियल वांग ने कहा, “डिमेंशिया से बचाव के तरीके खोजते समय, हमने पाया कि कॉफी जैसी आम चीज एक कारगर उपाय हो सकती है” मेडिकल जर्नल जामा में प्रकाशित नतीजों में पाया गया कि सीमित मात्रा में कैफीन लेने वालों में डिमेंशिया का खतरा 18 फीसदी तक कम था.यह लाभ उन लोगों में सबसे ज्यादा देखा गया जो हल्की मात्रा में इसका सेवन करते थे.यह भी पढें:चाय पीने वाले चीन को लगा कॉफी का चस्का यह निष्कर्ष एक बहुत बड़े अध्ययन पर आधारित है, जिसमें 1.30 लाख से ज्यादा लोगों के खान-पान, डिमेंशिया और मानसिक स्थिति की जांच की गई.शोधकर्ताओं ने इन लोगों पर 43 साल तक नजर रखी ताकि यह समझा जा सके कि कैफीन वाली कॉफी, चाय और डीकैफ कॉफी का लंबे समय में दिमाग की सेहत पर क्या असर पड़ता है.विवाद के बाद बदला जाएगा फिल्म “घूसखोर पंडत” का नामओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स ने दिल्ली हाईकोर्ट से कहा है कि मनोज बाजपेयीकी फिल्म “घूसखोर पंडत” के निर्माता, फिल्म का नाम बदलने के लिए राजी हो गए हैं.नेटफ्लिक्स के मुताबिक, नाम को लेकर उठाई गई चिंताओं को देखते हुए निर्माताओं ने फिल्म का नाम बदलने का फैसला लिया है और नया नाम ऐसा रखा जाएगा जो इसकी कहानी और उद्देश्य को सही ढंग से पेश कर सके.इस फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी.याचिकाकर्ता का आरोप था कि फिल्म का शीर्षक मानहानिकारक और सांप्रदायिक रूप से आपत्तिजनक था.सुनवाई के दौरान, नेटफ्लिक्स ने फिल्म का नाम बदलने की बात कही, जिस पर याचिकाकर्ता ने संतुष्टि जताई.इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया.यह याचिका महेंद्र चतुर्वेदी की ओर से दायर की गई थी, जो खुद को आचार्य बताते हैं.उन्होंने फिल्म के शीर्षक में “पंडत” शब्द के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई थी.उनका आरोप था कि इसे भ्रष्टाचार और घूसखोरी से जोड़ने से ब्राह्मण समुदाय की प्रतिष्ठा और गरिमा को नुकसान पहुंचेगा.नेटफ्लिक्स के बयान के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि यह फिल्म अब एक नए नाम के साथ रिलीज होगी.जर्मनी: यौन उत्पीड़न की शिकार केवल 3 फीसदी महिलाएं ही पुलिस के पास जाती हैंजर्मनी में छिपी हुई हिंसा पर किए गए एक अध्ययन से बेहद चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं.रिपोर्ट बताती है कि महिलाओं के खिलाफ होने वाले यौन हमलों का एक बहुत छोटा हिस्सा ही पुलिस तक पहुंच पाता है.यह तथाकथित “डार्क फील्ड” स्टडी उन सवालों का जवाब देती है जो सालाना प्रकाशित होने वाले अपराध के आंकड़ों में शामिल नहीं होते, क्योंकि सरकारी आंकड़ों में सिर्फ वही अपराध गिने जाते हैं जिनकी रिपोर्ट पुलिस को की जाती है.यह भी पढ़ें: भारत में महिलाओं पर गिरी एआई और डीपफेक हिंसा की गाजइस स्टडी का मकसद अपराध की वास्तविक सीमा का पता लगाना है, क्योंकि शर्म या पुलिस पर अविश्वास जैसे कारणों से सभी अपराध रिपोर्ट नहीं किए जाते.डाटा से पता चलता है कि हालांकि महिलाएं यौन उत्पीड़न का शिकार पुरुषों की तुलना में कहीं ज्यादा होती हैं, लेकिन वे इन अपराधों की रिपोर्ट पुरुषों के मुकाबले कम करती हैं.यह भी पढ़ें: क्या राजनीतिक दलों पर भी लागू हो सकता है पॉश एक्टअध्ययन के अनुसार, बलात्कार और बिना सहमति के यौन कृत्यों सहित इन अपराधों के लिए महिला पीड़ितों की रिपोर्टिंग दर सिर्फ 3 फीसदी है.इसका मतलब है कि 97 फीसदी मामले कभी पुलिस के रिकॉर्ड में आते ही नहीं हैं.वहीं, पुरुष पीड़ितों द्वारा ऐसे हमलों की रिपोर्ट करने की दर 14.5 फीसदी बताई गई है. संभल हिंसा: पुलिस के खिलाफ एफआईआर के आदेश पर इलाहबाद हाईकोर्ट की रोकइलाहबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार, 10 फरवरी को संभल के सीजेएम कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें संभल के पूर्व सर्किल ऑफिसर एएसपी अनुज चौधरी और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे.यह मामला नवंबर, 2024 में हुई संभल हिंसा के दौरान एक युवक को गोली लगने से जुड़ा हुआ है.कानूनी खबरों की वेबसाइट लाइव लॉ के मुताबिक, युवक के पिता ने कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि पुलिस अधिकारियों ने हिंसा के दौरान उनके बेटे की हत्या करने की नीयत से गोली चलाई.सीजेएम विभांशु सुधीर ने पिछले महीने इस मामले में पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था.हालांकि, इसके हफ्ते भर बाद ही उनका ट्रांसफर सुल्तानपुर कर दिया गया.एएसपी अनुज चौधरी और संभल कोतवाली के पूर्व प्रभारी अनुज तोमर ने सीजेएम कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी.हाईकोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी और शिकायतकर्ता को पुलिस की याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए दो हफ्ते का समय दिया है.इसके बाद अदालत आगे का फैसला लेगी.संभल मामले से जुड़ी ये रिपोर्टें भी पढ़ें-संभल की जामा मस्जिद के बारे पुरातत्व विभाग के दावे और उससे उठते सवालकाशी, मथुरा, संभल और अजमेर की दरगाह, कहां रुकेगा ये सिलसिला?”नरेन्दर सरेंडर”: भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ विपक्षी सांसदों का प्रदर्शनविपक्षी सांसदों ने मंगलवार, 10 फरवरी को संसद के मकर द्वार पर भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के फ्रेमवर्क के खिलाफ प्रदर्शन किया.विपक्षी सांसद एक बड़ा पोस्टर लिए हुए थे, जिस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की तस्वीर थी.इस पोस्टर पर लिखा था, “नरेन्दर सरेंडर”, “देश देख रहा है” पोस्टर में पीएम मोदी को ट्रंप के सामने घुटनों के बल पर बैठे हुए दिखाया गया.विपक्षी सांसदों की मांग है कि बजट सत्र के दौरान व्यापार समझौते के ढांचे पर चर्चा की जाए.कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने अपने स्थगन प्रस्ताव में रूसी तेल की खरीद रोकने और अमेरिकी कृषि उत्पादों के आयात पर टैक्स छूट देने की संभावना पर चिंता जताई.उन्होंने कहा कि सरकार को इस मामले में तुरंत बयान जारी करना चाहिए और संसद में इस पर चर्चा की इजाजत देनी चाहिए.अमेरिका और भारत ने 6 फरवरी को एक साझा फ्रेमवर्क जारी किया है जिसके तहत शुल्क घटेंगे, ऊर्जा संबंधों को नया रूप दिया जाएगा और आर्थिक सहयोग को गहरा किया जाएगा.ट्रंप प्रशासन के मुताबिक, भारत ने रूसी तेल का “प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आयात बंद करने” और अमेरिकी खाद्य व कृषि उत्पादों की एक बड़ी रेंज पर टैरिफ खत्म या कम करने का वादा किया है.2025 भ्रष्टाचार सूचकांक: डेनमार्क टॉप पर, भारत की रैंकिंग सुधरीट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल द्वारा मंगलवार, 10 फरवरी को जारी किए गए “2025 भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक” के मुताबिक, दुनिया के स्थापित लोकतंत्र और पश्चिमी देश, जो कभी ईमानदारी की मिसाल माने जाते थे, अब भ्रष्टाचार की ओर फिसल रहे हैं.इस 31वें संस्करण में 180 से अधिक देशों को भ्रष्टाचार के स्तर के आधार पर रैंक किया गया है.रिपोर्ट में अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और स्वीडन जैसे लंबे समय तक अच्छा प्रदर्शन करने वाले देशों की रैंकिंग में गिरावट देखी गई है.2025 के सूचकांक में पाया गया कि 80 से ऊपर स्कोर करने वाले देशों की संख्या एक दशक पहले 12 थी, जो अब घटकर सिर्फ पांच रह गई है.वहीं भारत ने पिछले साल की तुलना में अपनी रैंकिंग में सुधार किया है और इस बार 91वें नंबर पर है.लगातार आठवें साल डेनमार्क (89 स्कोर) ने पहला स्थान हासिल किया है.इसके बाद फिनलैंड (88) और सिंगापुर (84) का नंबर आता है.यह सूचकांक जीरो (अत्यधिक भ्रष्ट) से 100 (बहुत ईमानदार) के पैमाने पर देशों को मापता है.अमेरिका का स्कोर गिरकर 64 पर आ गया है, जो उसका अब तक का सबसे निचला स्तर है.सबसे कम भ्रष्टाचार वाले शीर्ष देश (रैंक): डेनमार्क: रैंक-1 फिनलैंड: रैंक-2 सिंगापुर: रैंक-3 न्यूजीलैंड और नॉर्वे: रैंक – 4 (संयुक्त रूप से) स्वीडन और स्विट्जरलैंड: रैंक-6 (संयुक्त रूप से) लक्जमबर्ग और नीदरलैंड: रैंक-8 (संयुक्त रूप से) जर्मनी और आइसलैंड: रैंक-10 (संयुक्त रूप से)अमेरिका और अर्मेनिया के बीच परमाणु समझौता, “123 एग्रीमेंट” पर लगी मुहरअमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस और अर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पाशनियान ने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग करने पर सहमति जताई है.दोनों नेताओं ने सोमवार, 9 फरवरी को येरेवन में “123 एग्रीमेंट” पर बातचीत पूरी की.यह समझौता अमेरिका को अन्य देशों के साथ परमाणु तकनीक और उपकरण साझा करने या लाइसेंस देने की अनुमति देता है.जेडी वैंस के अनुसार, यह सौदा मुख्य रूप से स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स से संबंधित है.इस समझौते के तहत अमेरिका अर्मेनिया को शुरू में 5 अरब डॉलर का निर्यात करेगा.इसके अलावा, ईंधन और रखरखाव के लिए 4 अरब डॉलर के दीर्घकालिक अनुबंध भी शामिल होंगे.यह भी पढ़ें: अर्मेनिया में दुर्दशा झेलते भारत के कामगारयह दौरा अगस्त 2025 में व्हाइट हाउस में अर्मेनिया और अजरबैजान के नेताओं द्वारा एक समझौते पर हस्ताक्षर करने के ठीक छह महीने बाद हुआ है.उस समझौते को लगभग 40 साल के युद्ध के बाद शांति की दिशा में पहला कदम माना गया था.वैंस ने पाशनियान को एक महान मित्र और इस क्षेत्र में शांति और विकास का सच्चा सहयोगी बताया.वहीं, पाशनियान ने वैंस और अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप का धन्यवाद करते हुए कहा कि दशकों के संघर्ष के बाद अर्मेनिया और पड़ोसी देश अजरबैजान शांति हासिल करने के बहुत करीब हैं.

SOURCE : LIVE HINDUSTAN