Source :- LIVE HINDUSTAN
रोजाना की लाइफ में धीरे-धीरे कुछ बदलाव करके आप हेल्थ के मामले में काफी कुछ अचीव कर सकते हैं। इंस्टाग्राम पर एक महिला ने 21 दिन तक जापानी ईटिंग हैबिट्स को अपनाया और उन्होंने सबसे पहले बेली फैट में बदलाव पाया। जानिए, किन सिंपल रूल्स को अपनाया-
‘कहते हैं अगर किसी चीज को दिल से चाहो तो पूरी कायनात उसे तुमसे मिलाने की कोशिश में लग जाती है’ वैसे तो ये महज एक फिल्म का डायलॉग है, लेकिन अगर असल जिंदगी से जोड़कर देखें तो हकीकत भी है। अगर आप एक बेहतरीन लाइफस्टाइल चाहते हैं तो बदलाव जरूरी है। जैसे ही आप अपने रोजाना के रूटीन में बदलाव कर लेते हैं वैसे ही आप कुछ छोटे बदलावों को महसूस करने लगते हैं। इंस्टाग्राम पर एक महिला ने 21 दिनों तक जापानी ईटिंग हैबिट्स को फॉलो किया और सबसे पहले उन्होंने बैली फैट में बदलाव को महसूस किया। अच्छी बात यह थी कि उन्होंने खुद को भूखा नहीं रखा और किसी भी तरह की सख्त डाइटिंग को फॉलो नहीं किया। बस कुछ आसान से रूल्स को अपनाया।
1) 80 परसेंट का नियम (हारा हाची बू)
आमूमन लोग खाना तब तक खाते हैं जब तक उनका पेट पूरी तरह से भर न जाए। लेकिन जापानी खाने की आदतों को अपनाने के लिए सबसे पहला रूल इस आदत को त्यागना होगा और जैसे ही आपका पेट 80 परसेंट तक भर जाए वैसे ही खाना बंद कर दें। ऐसा करने पर महिला की ज्यादा खाने की आदत कम हो गई।
2) कम मात्रा, ज्यादा वैरायटी
महिला ने एक बार में हैवी खाने के बजाय संतुलित मात्रा में छोटे-छोटे मील्स पर ध्यान देना शुरू किया। इसके अलावा खाने में सब्जियां, प्रोटीन और साबुत अनाज शामिल करें।
3) प्रोटीन वाला खाना
अंडे, टोफू, मछली, दाल या पनीर जैसी चीजों में प्रोटीन की भरपूर मात्रा होती है। इससे पेट भरा रहता है और पेट की चर्बी कम करने में मदद मिलती है।
4) ज्यादातर साबुत अनाज
महिला ने अपने खाने में से प्रोसेस्ड फूड की मात्रा को कम कर दिया और ज्यादा से ज्यादा सब्जियां, सूप, फर्मेंटेड खाना और सादा खाने को शामिल किया।
5) धीरे-धीरे खाना
जापानी खाना धीरे-धीरे और ध्यान के साथ खाया जाता है, जिससे शरीर को पेट भरने का एहसास होता है।
पेट की चर्बी कम करने को लेकर दी टिप
महिला बताती हैं कि जापानी खाने की आदतों को अपनाकर कुछ ही हफ्तों में उनका शरीर हल्का महसूस होने लगा, पेट फूलना कम हो गया और कमर का आकार धीरे-धीरे बदलने लगा। इसी के साथ उन्होंने शेयर किया की पेट की चर्बी अक्सर खान-पान की आदतों में बदलाव से कम होती है, न कि सिर्फ व्यायाम से।
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