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मंगल ग्रह पर दिखा अजीबोगरीब पत्थर, वैज्ञानिकों का भी चकराया सिर! क्या है इस ‘जेबरा रॉक’ का रहस्य?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

नासा के परसेवरेंस रोवर ने मंगल ग्रह पर एक अजीबोगरीब ‘जेबरा रॉक’ खोजा है। लाल ग्रह पर इस काले और सफेद धारियों वाले रहस्यमयी पत्थर ने वैज्ञानिकों को भी हैरान कर दिया है। जानिए इस अनोखे पत्थर ‘फ्रेया कैसल’ के बनने का विज्ञान।

मंगल ग्रह (Mars) हमेशा से इंसानों और वैज्ञानिकों के लिए एक बड़ी पहेली रहा है। हाल ही में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के परसेवरेंस रोवर ने इस लाल ग्रह से एक ऐसी तस्वीर भेजी है, जिसने पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। धूल भरी लाल-नारंगी मिट्टी और चट्टानों के बीच एक ऐसा पत्थर दिखा है, जिस पर जेबरा जैसी काली और सफेद धारियां बनी हुई हैं। इंटरनेट पर इसे ‘जेबरा रॉक’ कहा जा रहा है। आइए समझते हैं कि आखिर यह अनोखा पत्थर क्या है और वैज्ञानिक इसे लेकर इतने हैरान क्यों हैं।

क्या है यह ‘जेबरा रॉक’?

यह पत्थर बहुत बड़ा नहीं है, इसकी चौड़ाई सिर्फ 20 सेंटीमीटर (करीब 8 इंच) के आसपास है। नासा की टीम ने आधिकारिक तौर पर इसे ‘फ्रेया कैसल’ नाम दिया है। इस पत्थर पर स्पष्ट रूप से काली और सफेद पट्टियां बनी हुई हैं। लाल ग्रह पर जहां हर तरफ सिर्फ लाल और भूरे रंग की चट्टानें हैं, वहां यह ब्लैक एंड व्हाइट पत्थर दूर से ही बिल्कुल अलग चमकता हुआ दिखाई देता है।

कहां मिला?

यह पत्थर मंगल के जेजेरो क्रेटर इलाके में मिला है। यह इलाका अरबों साल पहले एक पानी की झील हुआ करता था। फिलहाल रोवर इस क्रेटर (गड्ढे) के किनारे की ऊंची ढलानों पर चढ़ाई कर रहा है, जहां उसे यह पत्थर पड़ा हुआ मिला। वैज्ञानिकों का कहना है कि मंगल ग्रह पर इससे पहले ऐसी बनावट वाला पत्थर कभी नहीं देखा गया। हालांकि अभी इसकी पूरी रासायनिक जांच होना बाकी है, लेकिन इसके बनने के पीछे दो मुख्य वैज्ञानिक कारण (प्रक्रियाएं) हो सकते हैं:

  1. आग्नेय प्रक्रिया: जब ज्वालामुखी का पिघला हुआ मैग्मा (लावा) जमीन के नीचे बहुत धीरे-धीरे ठंडा होता है, तो उसमें मौजूद अलग-अलग खनिज अपनी-अपनी परतों में जमने लगते हैं। इससे पत्थर पर धारियां बन जाती हैं।
  2. कायांतरित प्रक्रिया: जब किसी चट्टान पर अत्यधिक गर्मी और दबाव पड़ता है, तो उसका मूल रूप बदल जाता है। हमारी पृथ्वी पर भी ऐसे कायांतरित पत्थरों में जेबरा जैसी धारियां देखने को मिलती हैं।

वैज्ञानिकों का सिर क्यों चकरा रहा है?

इस छोटे से पत्थर ने वैज्ञानिकों को इसलिए सबसे ज्यादा हैरान किया है क्योंकि-

यह वहां का लोकल पत्थर नहीं है: सबसे बड़ी हैरानी की बात यह है कि यह पत्थर वहां मौजूद बाकी जमीन और चट्टानों से बिल्कुल अलग है। यह किसी चट्टान का हिस्सा नहीं है, बल्कि जमीन पर अलग से पड़ा हुआ एक ढीला पत्थर है।

लुढ़क कर आया मेहमान: वैज्ञानिकों का पक्का अनुमान है कि यह पत्थर इस जगह पर नहीं बना है, बल्कि यह जेजेरो क्रेटर की ऊंची पहाड़ियों से लुढ़क कर नीचे आ गिरा है।

परसेवरेंस रोवर अभी ढलान पर ऊपर की ओर चढ़ रहा है। इस पत्थर के मिलने से वैज्ञानिकों में यह उत्साह जाग गया है कि जब रोवर और ऊपर पहुंचेगा, तो शायद उसे इस रहस्यमयी ‘जेबरा रॉक’ का पूरा का पूरा स्रोत या पुरानी चट्टानें मिल जाएं।

यह छोटा सा ‘जेबरा रॉक’ मंगल ग्रह के छिपे हुए अतीत के बड़े राज खोल सकता है। यह इस बात का सबूत है कि मंगल का प्राचीन इतिहास बहुत उथल-पुथल, अत्यधिक गर्मी और ज्वालामुखीय गतिविधियों से भरा रहा होगा।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN