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भीड़ में खोने पर भी सुरक्षित रहेगा बच्चा, अगर पैरेंट्स बताएंगे ये 5 जरूरी नियम- एक्सपर्ट की सलाह!

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Source :- LIVE HINDUSTAN

हर साल दुनिया भर में लगभग 80 लाख बच्चों के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज होती है। एक्सपर्ट के अनुसार अगर माता-पिता बच्चों को पहले से कुछ सरल बातें समझा दें, तो मुश्किल स्थिति में भी बच्चा शांत रहकर सुरक्षित मदद पा सकता है।

भीड़भाड़ वाली जगहों पर बच्चा अगर पल भर को भी नजरों से ओझल हो जाए तो मन में बुरे ख्याल उठने लगते हैं। जाहिर है पेरेंट्स से बिछड़ने के बाद बच्चे भी पूरी तरह से घबरा जाते हैं। पेरेंटिंग एक्सपर्ट अंबिका अग्रवाल कहती हैं कि ऐसे हालात में घबराहट से ज्यादा जरूरी है पहले से की गई तैयारी। अगर बच्चे को कुछ आसान नियम सिखा दिए जाएं तो वह डरने के बजाय सही कदम उठा सकता है और जल्दी सुरक्षित मिल सकता है। अंतरराष्ट्रीय चाइल्ड प्रोटेक्शन डेटा के अनुसार हर साल दुनिया भर में लगभग 80 लाख बच्चों के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज होती है। इनमें से कई मामले भीड़भाड़ वाली जगहों पर अचानक बिछड़ने से शुरू होते हैं। एक्सपर्ट के अनुसार अगर माता-पिता बच्चों को पहले से कुछ सरल बातें समझा दें, तो मुश्किल स्थिति में भी बच्चा शांत रहकर सुरक्षित मदद पा सकता है। चलिए जानते हैं सेफ रखने के लिए उन्हें कौन सी बाते समझाना जरूरी है।

बच्चे को सिखाएं कि एक ही जगह रुककर इंतजार करे

अंबिका कहती हैं कि सबसे पहला और जरूरी नियम यह है कि बच्चा अगर भीड़ में अपने माता-पिता से अलग हो जाए, तो इधर-उधर भटकने की कोशिश न करे। वो जहां पर अपने पेरेंट्स से बिछड़ा है वही रुककर इंतजार करना चाहिए। जब बच्चा एक जगह रुकता है तो माता-पिता के लिए उसे ढूंढना आसान हो जाता है। वहीं अगर बच्चा लगातार इधर-उधर चलता रहेगा तो उसे ढूंढना मुश्किल हो सकता है।

केवल सही व्यक्ति से ही मदद मांगे

पेरेंटिंग एक्सपर्ट बच्चों को यह भी सिखाने की सलाह देती हैं कि वे हर किसी से मदद ना मांगें। अगर जरूरत पड़े तो ऐसे व्यक्ति से मदद मांगें जिसके साथ छोटे बच्चे हों या जो यूनिफॉर्म में हो, जैसे पुलिसकर्मी, सिक्योरिटी गार्ड या कोई सरकारी कर्मचारी। ऐसे लोग आमतौर पर मदद करने के लिए जिम्मेदार होते हैं और बच्चे को सुरक्षित तरीके से उसके माता-पिता तक पहुंचाने में हेल्प कर सकते हैं।

बच्चे को दें कुछ जरूरी जानकारी

अंबिका अग्रवाल कहती हैं कि हर पेरेंट्स को बच्चों को यह भी सिखाना चाहिए कि अगर वे किसी से मदद मांगें तो अपना नाम साफ-साफ बताएं। साथ ही अपनी माता या पिता का नाम और उनका फोन नंबर भी बोलें। जब बच्चा आत्मविश्वास से यह जानकारी देता है, तो सामने वाला व्यक्ति तुरंत माता-पिता से संपर्क करने की कोशिश कर सकता है। इसलिए बच्चों को अपना परिचय बोलने की आदत बचपन से ही सिखाना जरूरी है।

कम से कम एक फोन नंबर याद होना चाहिए

पेरेंटिंग एक्सपर्ट कहती हैं कि हर बच्चे को अपने माता-पिता में से कम से कम एक का फोन नंबर याद होना चाहिए। इसे याद कराने का सबसे आसान तरीका है कि इसे गाने या कविता की तरह बार-बार दोहराया जाए। जब बच्चा इसे कई बार बोलता है तो नंबर उसकी याद में बैठ जाता है। इससे अगर बच्चा कहीं अलग हो जाए तो वह आसानी से किसी को नंबर बता सकता है।

डर लगे तो चुप ना रहें, जोर से बोलें

एक्सपर्ट बच्चों को यह भी सिखाने की सलाह देती हैं कि अगर कोई अजनबी उन्हें कहीं ले जाने की कोशिश करे या उन्हें असहज महसूस हो, तो वे चुप ना रहें। उन्हें जोर से बोलना चाहिए और साफ-साफ कहना चाहिए कि वे अपने माता-पिता के बिना कहीं नहीं जाएंगे। आत्मविश्वास से बोलना कई बार बच्चों को खतरनाक स्थिति से बचा सकता है।

छोटे बच्चों के लिए एक आसान उपाय

छोटे बच्चों के हाथ की कलाई पर माता-पिता अपना फोन नंबर लिख सकते हैं। अगर बच्चा बहुत छोटा है और नंबर बोल नहीं पाता, तो वह किसी भरोसेमंद बड़े व्यक्ति को अपनी कलाई दिखा सकता है। इससे तुरंत माता-पिता से संपर्क किया जा सकता है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN