Home राष्ट्रीय समाचार भारत के एआई समिट की चर्चा विदेशी मीडिया में कुछ और ही...

भारत के एआई समिट की चर्चा विदेशी मीडिया में कुछ और ही वजह से

4
0

Source :- BBC INDIA

एआई इम्पैक्ट समिट

इमेज स्रोत, Getty Images

20 फ़रवरी 2026, 12:46 IST

पढ़ने का समय: 7 मिनट

भारत में एआई इम्पैक्ट समिट 16 फ़रवरी से शुरू हुआ और 20 फ़रवरी को कई दूसरी वजहों से चर्चाओं के साथ संपन्न होने जा रहा है.

नई दिल्ली में इस समिट का असर कमोबेश वैसा ही दिखा, जैसा 2023 में भारत में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान था.

इस समिट में ओपन एआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने अनुमान लगाया कि सुपरइंटेलिजेंस के शुरुआती वर्जन दो वर्षों के भीतर आ सकते हैं और एंथ्रोपिक पीबीसी के सीईओ डारियो अमोदेई ने कहा कि एआई अरबों लोगों को ग़रीबी से बाहर निकाल सकता है और सभी के लिए एक बेहतर दुनिया बना सकता है.

लेकिन ऑल्टमैन और डारियो अमोदेई की चर्चा इन दोनों बयानों से अलग एक-दूसरे के हाथ पकड़ ऊपर उठाने से बचने वाले वीडियो क्लिप के कारण हो रही है. इस वीडियो क्लिप की चर्चा अमेरिकी मीडिया में भी हो रही है.

अमेरिकी मीडिया आउटलेट ब्लूमबर्ग ने लिखा है, ”एक बार का प्रतिद्वंद्वी, हमेशा के लिए प्रतिद्वंद्वी होता है. जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में भारत के एआई समिट के सबसे व्यस्त दिन की शुरुआत की तो उन्होंने 13 अन्य व्यावसायिक और राजनीतिक नेताओं के साथ एक फोटो ऑप आयोजित किया.”

”सभी नेता एक क़तार में खड़े होकर एक-दूसरे के हाथ पकड़कर अपने सिर के ऊपर उठाए हुए थे. लेकिन दो लोगों को छोड़कर. ओपनएआई और एंथ्रोपिक पीबीसी के प्रतिद्वंद्वी सीईओ सैम ऑल्टमैन और डारियो अमोदेई को एक-दूसरे के पास खड़ा किया गया था. लेकिन उन्होंने असहजता के साथ एक-दूसरे का हाथ पकड़ने से इनकार कर दिया. वे अपने हाथ हवा में क्रॉस करके खड़े रहे और एक-दूसरे से नज़रें मिलाने से बचते रहे.”

एआई इम्पैक्ट समिट

इमेज स्रोत, Getty Images

ऑल्टमैन और अमोदेई की प्रतिद्वंद्विता

ब्लूमबर्ग ने लिखा है, ”अमोदेई पहले ओपनएआई में काम कर चुके थे लेकिन उन्होंने यह महसूस करते हुए कंपनी छोड़ दी थी कि ओपनएआई कुछ ज़्यादा ही व्यावसायिक होती जा रही है. यह दृश्य भारत में एक्स सहित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हो गया. बाद में साझा किए गए एक वीडियो में ऑल्टमैन ने कहा कि उन्हें ”मंच पर क्या हो रहा था, इसका पता नहीं था” और पता नहीं था कि उन्हें क्या करना था.”

ब्लूमबर्ग ने लिखा है, ”ओपनएआई की नेटवर्थ लगभग 500 अरब डॉलर और एंथ्रोपिक की 380 अरब डॉलर आंकी गई है. इस साल एंथ्रोपिक की कई प्रगति के कारण दोनों के बीच प्रतिस्पर्धा और तेज़ हो गई है. विशेष रूप से, उसके क्लॉड कोड सूट की बढ़ती लोकप्रियता ने बाज़ार में ओपनएआई के कोडेक्स से बढ़त बनाई है.”

”इसके बाद ओपनएआई ने ओपनक्लॉ के डेवलपर को नियुक्त किया, जो एक लोकप्रिय ओपन सोर्स एआई टूल है. एंथ्रोपिक ने ओपनएआई को सीधे चुनौती देते हुए एक हाई-प्रोफाइल सुपर बाउल विज्ञापन भी जारी किया. इसमें यह संदेश दिया गया कि क्लॉड चैटबॉट इंटरैक्शन में कभी विज्ञापन नहीं दिखाएगा.”

अमेरिकी अंग्रेज़ी डेली न्यूज़पेपर सीएटल टाइम्स ने भी सैम ऑल्टमैन और डारियो अमोदेई की असहजता को लेकर रिपोर्ट प्रकाशित की है. सीएटल टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ”दोनों एआई डेवलपर्स का एक पुराना इतिहास है, जो ओपन एआई के लोकप्रिय उत्पाद चैटजीपीटी और एंथ्रोपिक के प्रतिस्पर्धी चैटबॉट क्लाउड के निर्माण से भी पहले का है. अमोदेई ने ओपन एआई में काम किया था, इसके बाद उन्होंने और उनकी बहन डैनिएला अमोदेई सहित एक समूह ने 2021 में इस्तीफ़ा देकर एंथ्रोपिक की स्थापना की.”

ओपन एआई ने 2022 के अंत में चैटजीपीटी लॉन्च किया, जिससे एआई लार्ज लैंगवेज मॉडल की विशाल व्यावसायिक क्षमता सामने आई, जो ईमेल लिखने, कंप्यूटर कोड तैयार करने और प्रश्नों के उत्तर देने में सहायता कर सकते हैं.”

”एंथ्रोपिक ने 2023 में क्लाउड का पहला वर्जन पेश किया. उनकी अलग-अलग सोच पर इस महीने की शुरुआत में अमेरिका में सार्वजनिक बहस होने लगी. जब एंथ्रोपिक ने सुपर बाउल के दौरान टीवी विज्ञापन प्रसारित किए, जिनमें ओपएन एआई का मजाक उड़ाया गया. इन विज्ञापनों में चैटजीपीटी के मुफ़्त और सस्ते संस्करणों में ओपन एआई की ओर से शुरू की जा रही डिजिटल विज्ञापन रणनीति की आलोचना की गई.”

जहां एंथ्रोपिक ने अपनी आय का मॉडल मुख्य रूप से क्लाउड को अन्य व्यवसायों को बेचने पर केंद्रित किया है, वहीं ओपन एआई ने चैटजीपीटी का मुफ्त उपयोग करने वाले सैकड़ों मिलियन उपभोक्ताओं से कमाई के लिए विज्ञापनों का रास्ता अपनाया है. ऑल्टमैन ने सोशल मीडिया पर इन टीवी विज्ञापनों को भ्रामक बताते हुए उनकी आलोचना की है.”

लेकिन बात एआई के इन दोनों हस्तियों के एक-दूसरे के हाथ नहीं पकड़ने तक ही सीमित नहीं है. माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स ने भारत में आयोजित एक एआई समिट में अपना मुख्य भाषण रद्द कर दिया क्योंकि जेफरी एपस्टीन के साथ उनके संबंधों को लेकर बढ़ती जांच का सामना करना पड़ रहा है.

गेट्स फाउंडेशन इंडिया ने गुरुवार को एक्स पर कहा, “सावधानीपूर्वक विचार के बाद और यह सुनिश्चित करने के लिए कि ध्यान एआई समिट की प्रमुख प्राथमिकताओं पर बना रहे, बिल गेट्स अपना मुख्य भाषण नहीं देंगे.” यह घोषणा नई दिल्ली में तयशुदा भाषण से कुछ घंटे पहले की गई.

अमेरिकी अख़बार वाल स्ट्रीट जर्नल ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ”गेट्स, इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के प्रमुख वक्ताओं में थे. गेट्स की अनुपस्थिति एपस्टीन की जांच से जुड़े लाखों पन्नों के दस्तावेज जारी होने के बाद सामने आई है.”

एआई समिट

इमेज स्रोत, Getty Images

क्या भारत एआई पावर बन पाएगा?

एआई समिट को लेकर ब्लूमबर्ग ने अपनी एक अन्य रिपोर्ट में लिखा है कि भारत ऐसे एआई पावर नहीं बन सकता है. ब्लूमबर्ग ने लिखा है, ”मोदी उस समय सिलिकॉन वैली को आकर्षित कर रहे हैं, जब अमेरिकी कंपनियां भारत के युवा और तकनीक-प्रेमी बाज़ार पर क़ब्ज़ा जमाने की होड़ में हैं.”

”भारत अब अमेरिका के बाद चैटजीपीटी का दूसरा सबसे बड़ा उपयोगकर्ता बन चुका है. सेंसट टावर की विश्लेषक स्नेहा पांडे के अनुसार, 2025 में जेनरेटिव एआई ऐप डाउनलोड में भारत 207% की वार्षिक वृद्धि के साथ दुनिया में अग्रणी रहा जबकि अमेरिका में यह वृद्धि 63% थी.”

ब्लूमबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ”पूरे हफ़्ते एआई अपनाने के इन आंकड़ों का व्यापक रूप से उल्लेख हुआ. बिना यह ध्यान दिए कि 1.4 अरब की विशाल आबादी स्वाभाविक रूप से डेटा को प्रभावित करती है. लेकिन इन आंकड़ों ने समिट हॉल में मौजूद एक बड़े सवाल को भी उजागर किया. भारत एआई का सबसे उत्साही उपभोक्ता होने से एक गंभीर उत्पादक कैसे बनेगा?”

शिखर सम्मेलन में डेटा सेंटर निवेश की घोषणाओं की बाढ़ सी आ गई. अरबपति मुकेश अंबानी ने 110 अरब डॉलर का वादा किया. अदानी ग्रुप ने 100 अरब डॉलर का संकल्प लिया और ओपन एआई ने टाटा ग्रुप के साथ बड़े एआई इंफ्रास्ट्रक्चर सहयोग की घोषणा की. मोदी इसे एक उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत कर सकते हैं.

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में कहा गया है कि संभव है कि ये आकर्षक सुर्खियां बाधाओं से घिर जाएं क्योंकि डेवलपर्स को भारत के संसाधन-संकट और जटिल प्रशासनिक ढांचे में ज़मीन, पानी और बिजली जैसी ज़रूरतों को पूरा करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है.”

”जब कई शहर अब भी पीने योग्य पानी और स्वच्छ हवा के लिए संघर्ष कर रहे हैं, तब बिजली ग्रिड और जल आपूर्ति पर अतिरिक्त दबाव पर्यावरणीय और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं को जन्म दे सकता है. वैश्विक स्तर पर, इस पैमाने के निर्माण केवल इंजीनियरिंग नहीं, बल्कि राजनीतिक चुनौतियां भी होते हैं.”

एआई समिट

इमेज स्रोत, Getty Images

एफ़टी ने अपनी एक रिपोर्ट में लिखा है, ”भारत का रिसर्च और विकास पर ख़र्च पिछले दशक में घटकर जीडीपी के 0.7 प्रतिशत से भी नीचे आ गया है, जो चीन के 2.5 प्रतिशत और अमेरिका के 3.5 प्रतिशत की तुलना में बहुत कम है.”

”भारत का बड़ा हिस्सा डिफ़ेंस रिसर्च पर ख़र्च होता है, जिससे सिविलियन टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन के लिए सीमित संसाधन बचते हैं. 2022 में इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्रालय सरकार को कुल आरएंडडी ख़र्च का केवल दो प्रतिशत ही मिला था.”

वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अपनी एक रिपोर्ट में लिखा है, ”कई देशों को चिंता है कि एआई मौजूदा तकनीकी खाइयों को और गहरा कर सकती है. वे इस बात को लेकर सतर्क हैं कि ऐसी तकनीक के लिए अमेरिका या चीन पर निर्भर रहने से उनकी अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा पर गहरे प्रभाव हो सकते हैं.”

”इसी कारण कुछ देश स्थानीय कंप्यूटिंग स्ट्रक्चर विकसित करने, अपने मॉडल बनाने और घरेलू एआई प्रतिभा को बढ़ावा देने की दिशा में प्रयास कर रहे हैं. हालाँकि, यह आसान नहीं होगा.”

वॉल स्ट्रीट जर्नल ने लिखा है, ”इपोच एआई नामक रिसर्च ग्रुप के अनुसार, एआई के अग्रिम मोर्चे पर मॉडल विकसित करने के लिए अमेरिका और चीन जैसे देश ही दसियों अरब डॉलर निवेश कर सकते हैं. वैश्विक एआई सुपरकंप्यूटिंग क्लस्टरों में अमेरिका की हिस्सेदारी लगभग 75 प्रतिशत और चीन की लगभग 15 प्रतिशत है.”

”मार्च 2024 में भारत ने एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पर पाँच साल में ख़र्च के लिए 1.1 अरब डॉलर का निवेश शुरू किया. सीबी इंसाइट्स के अनुमान के अनुसार, 2025 में एआई कंपनियों को मिले 226 अरब डॉलर के वेंचर कैपिटल निवेश में भारत की हिस्सेदारी बहुत छोटी रही.”

”भारतीय एआई पॉलिसी रिसर्चर अमलान मोहंती ने कहा कि अमेरिका ने यह संकेत भी दिया है कि वह चीन के साथ प्रतिस्पर्धा में उच्च-स्तरीय एआई चिप्स तक पहुँच को व्यापार और जियोपॉलिटिक्स के साधन के रूप में उपयोग करने को तैयार है.”

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

SOURCE : BBC NEWS