Source :- LIVE HINDUSTAN
एलपीजी सिलेंडर के संकट की आशंका से देशभर में घबराहट का माहौल है। अब पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा कि एलपीजी बुकिंग के लिए घबराने की कोई जरूरत नहीं है। घरेलू उपयोग के लिए एलपीजी का आपूर्ति चक्र सामान्य समय की तरह 2.5 दिन ही रहेगा।
LPG cylinder crunch: एलपीजी सिलेंडर के संकट की आशंका से देशभर में घबराहट का माहौल है। लोग लंबी-लंबी कतारें लगाकर सिलेंडर ले रहे हैं। अब सरकार की ओर से सिलेंडर डिलीवरी को लेकर एक अहम बयान जारी किया गया है। सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को रसोई गैस सिलेंडर की बुकिंग में घबराहट न दिखाने की सलाह देते हुए कहा है कि बुकिंग के ढाई दिन में सिलेंडर उपलब्ध कराया जाएगा। मतलब ये हुआ कि जिस दिन आप बुकिंग करेंगे उसके ढाई दिन में सिलेंडर डिलीवर कर दिया जाएगा। यही स्थिति पहले भी थी।
क्या कहा सरकार ने?
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बुधवार को कहा कि घरेलू एलपीजी के उत्पादन को बढ़ाने के लिए विशेष प्रबंध किये गए हैं जिससे पिछले कुछ दिनों में उत्पादन 25 प्रतिशत बढ़ा है। उन्होंने बताया कि रसोई गैस का किसी दूसरे कार्य में इस्तेमाल रोकने के लिए मंत्रालय सिलेंडर डिलिवरी प्रमाणन कोड को सख्ती से लागू कर रहा है। वर्तमान में 90 प्रतिशत उपभोक्ताओं को डिलिवरी प्रमाणन कोड प्रणाली के तहत लाने का प्रयास है।
सुजाता शर्मा ने पश्चिम एशिया संकट के मद्देनजर सरकार द्वारा किये गये उपायों पर अंतर-मंत्रालय संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि भारत एलपीजी के मामले में 60 प्रतिशत आयात पर निर्भर है और आयातित एलपीजी का 90 प्रतिशत हिस्सा ईरान के पास हर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता है जो युद्ध से प्रभावित है। इसके मद्देनजर जारी विशेष आदेश में सरकारी रिफाइनरियों को एलपीजी का उत्पादन यथासंभव बढ़ाने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में एलपीजी सिलेंडर की कीमत 60 रुपये की हाल की वृद्धि के बाद 913 रुपये है। उज्ज्वला उपभोक्ताओं को प्रति सिलेंडर 613 रुपये देने पड़ रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय कीमतों में उछाल के बावजूद सरकार के हस्तक्षेप से देश में कीमतों को नीचे रखा जा रहा है।
हर रोज गैस की खपत 18.9 करोड़ मानक घन मीटर
सुजाता शर्मा ने बताया कि भारत में हर रोज गैस की खपत 18.9 करोड़ मानक घन मीटर के बराबर है। इसमें से 9.7 करोड़ घन मीटर का आयात किया जाता है। इस समय खाड़ी क्षेत्र में युद्ध के कारण 4.7 करोड़ घन मीटर गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसके लिए वैकल्पिक स्रोतों से आपूर्ति बढ़ाने का प्रयास हैं। उन्होंने बताया कि तरल एलएनजी के दो टैंकर इस समय रास्ते में हैं। सरकार ने उपलब्ध गैस को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को पहुंचाने के लिए नियंत्रण आदेश जारी किया है। इसके तहत घरेलू, परिवहन, अस्पताल और शैक्षणिक क्षेत्रों को प्राथमिकता में रखा गया है। उर्वरक क्षेत्र को 70 प्रतिशत आपूर्ति की जा रही है जबकि तेल शोधन संयंत्रों को उपभोग में 35 प्रतिशत तक कटौती करने के लिए कहा गया है।
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