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(चेतावनी: इस ख़बर के कुछ विवरण आपको विचलित कर सकते हैं)
बिहार के अररिया ज़िले के फ़ारबिसगंज बाज़ार समिति इलाक़े में शुक्रवार सुबह माहौल सामान्य दिख रहा है. हालाँकि, बातचीत में लोग बीते गुरुवार हुई दिल दहला देने वाली घटना से सहमे नज़र आते हैं.
यहाँ फल का आढ़त लगाने वाले रवि कुमार बीबीसी न्यूज़ हिंदी से कहते हैं, “अभी माहौल ठीक है, लेकिन कल की घटना सोचकर दिल दहल जाता है.”
उनका इल्ज़ाम है, ”पुलिस पहली हत्या होने के एक घंटे बाद आई. अगर पुलिस जल्दी आ जाती तो दूसरी हत्या नहीं होती.”
रवि जिन ‘दो हत्याओं’ की बात कर रहे हैं, उनके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हैं. ये वीडियो फ़ारबिसगंज के हैं.
घटना के वायरल वीडियो में दिख रहा है कि रवि चौहान नाम का एक व्यक्ति नबी हसन नाम के एक शख़्स की गला काट कर हत्या कर देता है. इसके बाद वहाँ मौजूद भीड़ भी रवि चौहान को पीट-पीट कर गंभीर तौर पर ज़ख़्मी कर देती है.
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बीबीसी न्यूज़ हिन्दी ने अररिया के एसपी जितेन्द्र कुमार से पूछा कि पुलिस के रहते भीड़ ने रवि के साथ हिंसा कैसे की? इस सवाल पर उन्होंने कोई साफ़ जवाब नहीं दिया.
हालाँकि, एसपी जितेन्द्र कुमार ने कहा, “इस मामले में तीन एफ़आईआर दर्ज़ हुई हैं. रवि चौहान के परिवार की तरफ़ से अज्ञात लोगों, नबी हसन के परिवार की तरफ़ से रवि चौहान और वीडियो बना रहे अज्ञात लोगों और अररिया पुलिस की तरफ़ से भी अज्ञात लोगों पर एफ़आईआर दर्ज़ हुई है. इस मामले में सख़्त क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी.”
सोशल मीडिया पर एक वीडियो की तुलना हाल ही में आई एक फ़िल्म के दृश्य से भी की जा रही है. इस घटना के बाद कुछ लोग राज्य की क़ानून-व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं.
क्या है पूरा मामला?
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बिहार के अररिया ज़िले में फ़ारबिसगंज नाम का सब डिवीज़न है.
यहाँ बाज़ार समिति के गेट पर रवि चौहान नाम का व्यक्ति सत्तू और लिट्टी का ठेला लगाते थे. वहीं नबी हसन पिकअप वैन चलाते थे और बाजार समिति के सामान लाते-ले जाते थे.
पुलिस की तरफ़ से जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक़, 45 साल के नबी हसन अमौना पंचायत के रहने वाले थे. यह इलाक़ा जोगबनी बॉर्डर से कुछ पहले पड़ता है. वहीं 33 साल के रवि चौहान, फ़ारबिसगंज के ही मटियारी के रहने वाले थे.
बाज़ार समिति में फल की आढ़त लगाने वाले रवि कुमार बताते हैं कि ये दोनों पहले से ही एक-दूसरे से परिचित थे और दोनों में आपसी तनातनी भी चलती रहती थी. गुरुवार सुबह नबी हसन अपनी पिकअप वैन लेकर बाजार समिति पहुँचे थे.
यहाँ रवि चौहान और नबी हसन के बीच किसी बात को लेकर बहस हुई लेकिन बाद में यह बहस आक्रामक हो गई और रवि चौहान ने चाकू से नबी हसन पर वार कर दिया.
पुलिस की प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक़, रवि चौहान ने बाज़ार समिति के आगे धारदार चाकू से नबी हसन का गला काट दिया. इस घटना से गुस्साए लोगों ने रवि चौहान का पीछा कर उसे पकड़ लिया और उसके साथ मारपीट कर बुरी तरह से जख़्मी कर दिया.
वायरल वीडियो में दिख रहा है कि पुलिस रवि चौहान को गंभीर हालत में भीड़ से बचाते हुए ले जा रही है. एसपी जितेन्द्र कुमार ने बताया कि रवि चौहान को इलाज के लिए फ़ारबिसगंज के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया. हालाँकि, इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.
‘साढ़े तीन घंटों तक फ़ारबिसगंज का माहौल रहा ख़राब’
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पुलिस ने दोनों शवों का पोस्टमार्टम कराकर परिवारजनों को सौंप दिया. इसके बाद रवि चौहान और नबी हसन का धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार किया गया.
वायरल वीडियो में दिख रहा है कि रवि चौहान चाकू लेकर खड़ा हुए हैं और कई लोग उससे थोड़ी दूरी पर खड़े होकर वीडियो बना रहे हैं. इस घटना के बाद भी रवि चौहान कुछ देर तक खुलेआम घूमते रहे.
फ़ारबिसगंज से कांग्रेस विधायक मनोज बिस्वास बीबीसी हिन्दी से बात करते हुए आरोप लगाते हैं, “यह पूरी प्रशासनिक लापरवाही है. सीमांचल का पूरा इलाक़ा सूखे नशे (ड्रग्स) के असर में है.”
उनका कहना है, ”मुझे सुबह साढ़े आठ बजे इसकी सूचना मिली थी जिसके बाद मैंने थाना प्रभारी से लेकर एसपी तक संपर्क किया. घटनास्थल से थाना जिसकी दूरी एक किलोमीटर से भी कम है, वहाँ के हालात पर क़ाबू पाने में पुलिस को दोपहर के 12 बज गए. पुलिस चाहती तो रवि चौहान की ‘मॉब लिंचिंग’ को बचा सकती थी. साढ़े तीन घंटे तक फ़ारबिसगंज डिस्टर्ब रहा.”
वहीं अररिया के बीजेपी सांसद प्रदीप सिंह ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी कहा, “यह घटना समाज में बढ़ती असहिष्णुता और क़ानून व्यवस्था को चुनौती के गंभीर संकेत हैं. मैं ज़िला प्रशासन से इस घटना की निष्पक्ष, त्वरित और गहन जाँच की माँग करता हूँ.”
स्थानीय निवासी शौकत अंसारी के मुताबिक़, “इस घटना के बाद न सिर्फ़ घटना स्थल (बाजार समिति) पर हालात बिगड़े रहे बल्कि सरकारी अस्पताल (जहाँ रवि चौहान को इलाज के लिए लाया गया था) में भी हालात बिगड़ गए थे.”
‘हमारी पुलिस ने बहुत मशक़्क़त से अभियुक्त को छुड़ाया’
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स्थानीय निवासी शौकत अंसारी बताते हैं, “अस्पताल में भी नबी हसन के परिजन और गाँव वाले पहुँच गए थे. वे बहुत गुस्से में थे. उन्होंने एंबुलेंस आदि को निशाना बनाया. इसके बाद मरीज़ों के साथ-साथ चिकित्सक भी दहशत में आ गए थे.”
पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों पर अररिया के एसपी जितेन्द्र कुमार ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहा, “पुलिस ने बहुत मशक़्क़त से अभियुक्त को छुड़ाया और उसे अस्पताल में भर्ती कराया. अस्पताल में भी हालात सामान्य ही थे. मैं खुद वहाँ गया था.”
“फ़ारबिसगंज में भी हालात सामान्य हैं. हम लोगों ने गुरुवार रात शांति समिति की बैठक भी की थी. हत्या में इस्तेमाल हुआ चाकू भी बरामद कर लिया गया है.”
क्या पुलिस ने समय रहते कार्रवाई नहीं की?
इस सवाल पर उन्होंने कुछ भी साफ़ तौर पर नहीं कहा. हालाँकि, एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, “यह घटना ‘मॉब लिंचिंग’ नहीं है. हमारी पुलिस ने रवि चौहान को लोगों से छुड़ाया था और उसे अस्पताल में भर्ती कराया था, जहाँ इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हुई है.”
राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया
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इस घटना के बाद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सरकार को घेरा. उन्होंने पटना में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, “इतनी भयानक तस्वीर अब तक हम लोगों ने नहीं देखी थी.”
उन्होंने आरोप लगाया, ”सरेआम हत्याकांड चलता रहा, लेकिन कोई सुध लेने वाला नहीं. गृह मंत्रालय बीजेपी के पास है और पूरा सिस्टम चौपट है और बीजेपी – जेडीयू के नेता केवल सीएम चेयर में व्यस्त हैं.”
वहीं भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की प्रदेश उपाध्यक्ष अनामिका पासवान अपनी सरकार का बचाव करते हुए बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहती हैं, “दोनों (मृतक) के बीच व्यक्तिगत दुश्मनी थी. इसमें क़ानून व्यवस्था का तो कोई सवाल नहीं है. क़ानून व्यवस्था तो ठीक ही है.”
“हर जगह पुलिस मौजूद नहीं रह सकती. विपक्ष को वे दिन याद करने चाहिए जब थाने में एफ़आईआर तक दर्ज नहीं होती थी. अभी तो क़ानून का भय लोगों में है.”
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