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बांग्लादेश में वोटिंग से 24 घंटे पहले अमेरिका की चेतावनी, चुनाव की पारदर्शिता पर उठे सवाल; जानें क्यों

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Source :- LIVE HINDUSTAN

संक्षेप:

Bangladesh Election 2026: बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले आम चुनाव से ठीक 24 घंटे पहले अमेरिकी सांसदों और विशेषज्ञों ने गंभीर चेतावनी जारी की है। उन्होंने कहा कि यह मतदान प्रक्रिया न तो स्वतंत्र है और न ही निष्पक्ष है।

बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले आम चुनाव से ठीक 24 घंटे पहले अमेरिकी सांसदों और विशेषज्ञों ने गंभीर चेतावनी जारी की है। उन्होंने कहा कि यह मतदान प्रक्रिया न तो स्वतंत्र है और न ही निष्पक्ष है। दरअसल, सोमवार को रेबर्न हाउस ऑफिस बिल्डिंग में हिंदू एक्शन और उत्तरी अमेरिका के हिंदुओं के गठबंधन (कोहना) द्वारा आयोजित एक ब्रीफिंग में 100 से अधिक लोग शामिल हुए, जिनमें कांग्रेस के स्टाफ सदस्य, राजनयिक, पत्रकार, शिक्षाविद और विदेश में रहने वाले बांग्लादेशी हिंदू समुदाय के सदस्य शामिल थे। मुख्य भाषण देते हुए विदेश नीति विशेषज्ञ माइकल रुबिन ने चेतावनी दी कि धार्मिक स्वतंत्रता अक्सर किसी राज्य के लोकतांत्रिक पतन का सबसे पहला संकेत होती है।

रुबिन ने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता हमेशा खतरे की घंटी होती है। एक बार सहिष्णुता कमजोर हो जाए तो उसे बहाल करना बेहद कठिन हो जाता है। उन्होंने पाकिस्तान से तुलना करते हुए याद दिलाया कि बांग्लादेश के पूर्व विरोधी देश में भी कभी हिंदू और ईसाई आबादी थी, लेकिन बाद में वहां असहिष्णुता ने जड़ें जमा लीं। रुबिन ने 1971 में पाकिस्तानी सेना और जमात-ए-इस्लामी के आतंकवादियों द्वारा किए गए नरसंहार का जिक्र किया और कहा कि बांग्लादेश उस हिंसा के पीछे की विचारधारा का मुकाबला करने में असफल रहकर इतिहास दोहराने का जोखिम उठा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर यदि आप नरसंहार को तो हरा देते हैं, लेकिन उसे समर्थन देने वाली विचारधारा को नहीं हराते, तो वह फिर से उभर आएगी। उन्होंने वर्तमान स्थिति को एक ‘चेतावनी’ करार दिया।

…मतदान को स्वतंत्र या निष्पक्ष नहीं माना जा सकता

तीन सांसदों के संबोधन से द्विदलीय चिंता साफ दिखाई दी। युद्ध के अनुभवी सांसद टॉम बैरेट (रिपब्लिकन-मिशिगन) ने धार्मिक हिंसा की निंदा की और नैतिक स्पष्टता की जरूरत पर जोर दिया। सांसद सुहास सुब्रमण्यम (डेमोक्रेट-वर्जीनिया) ने हिंदुओं पर बढ़ते हमलों की ओर इशारा करते हुए आगामी चुनावों को मौलिक रूप से दोषपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग को चुनाव में भाग लेने से रोक दिया गया है। सुब्रमण्यम ने कहा कि कर्म निष्ठा कथनी से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है, और तर्क दिया कि ऐसे में मतदान को स्वतंत्र या निष्पक्ष नहीं माना जा सकता।

स्वतंत्र पत्रकार शुवो रॉय ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया की कवरेज की कमी की आलोचना की। उन्होंने कहा कि जब देश की प्रमुख राजनीतिक शक्ति को ही चुनाव लड़ने से रोक दिया गया हो, तो आप चुनाव को स्वतंत्र और निष्पक्ष नहीं कह सकते। उन्होंने चेतावनी दी कि जब जांच-पड़ताल कम हो जाती है, तो मनमानी करने वालों को खुली छूट मिल जाती है। इस दौरान शिक्षाविदों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और पत्रकारों की गवाही ने अगस्त 2024 के बाद के बांग्लादेश की भयावह तस्वीर पेश की, जो इस्लामी समर्थित यूनुस के उदय के बाद की स्थिति को दर्शाती है।

चुनाव मात्र दिखावा न हो

वक्ताओं ने प्रेस की स्वतंत्रता के हनन, आलोचकों के खिलाफ हिंसक प्रतिशोध और हिंदुओं को निशाना बनाकर किए जाने वाले भीड़ हमलों का विस्तार से वर्णन किया। कोहना की युवा टीम के सदस्यों ने अपने रिश्तेदारों के व्यक्तिगत अनुभव साझा किए, जो लिंचिंग और जबरन विस्थापन के डर में जी रहे हैं। सत्र के अंत में हिंदू एक्शन की संचार निदेशक एडेल नाज़ारियन ने इस मुद्दे को नैतिक और रणनीतिक दोनों स्तरों से जोड़ा। उन्होंने कहा कि शांति का मतलब संघर्ष का अभाव नहीं है। शांति का मतलब है गरिमा, समान सुरक्षा और एक ऐसा चुनाव जो मात्र दिखावा न हो।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN